भारत-यूके व्यापार समझौता 15 जुलाई से लागू,किसानों, श्रमिकों और MSMEs को मिलेगा बड़ा फायदा
भारत-यूके व्यापार समझौता 15 जुलाई से लागू,किसानों, श्रमिकों और MSMEs को मिलेगा बड़ा फायदा

14 Jul 2026 |   28



 

नई दिल्ली।भारत और यूनाइटेड किंगडम के बीच व्यापार संबंधों में एक नया अध्याय शुरू होने जा रहा है।दोनों देशों के बीच व्यापक आर्थिक और व्यापार समझौता कल बुधवार से पूरी तरह लागू हो जाएगा।वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में इसे भारत के व्यापार इतिहास का एक स्वर्णिम और ऐतिहासिक क्षण बताया। राजेश अग्रवाल ने कहा कि यह समझौता दोनों वैश्विक अर्थव्यवस्थाओं के बीच भविष्य-उन्मुख आर्थिक ढांचे का निर्माण करेगा।

वाणिज्य सचिव राकेश अग्रवाल ने कहा कि यह मुक्त व्यापार समझौता पारंपरिक शुल्कों में कटौती से कहीं आगे जाता है,इसके तहत कुल 30 अध्याय शामिल किए गए हैं,जो डिजिटल व्यापार,सरकारी खरीद,नवाचार,श्रम, पर्यावरण,लैंगिक समानता और सूक्ष्म,लघु एवं मध्यम उद्योगों (MSMEs) जैसे आधुनिक विषयों को कवर करते हैं। राजेश अग्रवाल ने कहा कि यह समझौता दोनों देशों के बीच तकनीकी और गैर-शुल्क बाधाओं को दूर करेगा,जिससे भारतीय व्यापारियों को नए बाजार तलाशने में आसानी होगी।

वाणिज्य सचिव राकेश अग्रवाल ने कहा कि इस समझौते में भारत ने अपने संवेदनशील घरेलू उद्योगों के हितों की रक्षा का पूरा ध्यान रखा है।डेयरी उत्पाद,अनाज,दालें,सब्जियां,सोना, आभूषण,स्मार्टफोन और कुछ महत्वपूर्ण पॉलिमर को इस समझौते के तहत विशेष सुरक्षा प्रदान की गई है,इसके विपरीत भारत के कपड़ा,फुटवियर और चमड़ा जैसे श्रम-प्रधान क्षेत्रों को भारी लाभ होगा।यूके में इन उत्पादों पर लगने वाला 12 प्रतिशत तक का आयात शुल्क अब शून्य हो जाएगा,जिससे भारतीय निर्यात बढ़ेगा और लाखों नए रोजगार पैदा होंगे।

राजेश अग्रवाल ने कहा कि आईटी और सेवा क्षेत्र के लिए इसके साथ लागू होने वाला डबल कंट्रीब्यूशन कन्वेंशन एक बड़ा मील का पत्थर साबित होगा।वर्तमान में यूके में काम करने वाले भारतीय पेशेवरों को वहां की राष्ट्रीय बीमा प्रणाली में लगभग 25 प्रतिशत योगदान देना पड़ता था,जिसका लाभ वे नहीं उठा पाते थे,अब नए नियम के तहत यूके में 5 साल तक काम करने वाले भारतीय पेशेवरों को वहां सामाजिक सुरक्षा योगदान देने से छूट मिलेगी और वे भारत में ही अपना योगदान जारी रख सकेंगे,इससे 75,000 से अधिक भारतीय श्रमिकों और 900 से अधिक नियोक्ताओं को सीधा वित्तीय लाभ होगा।

राजेश अग्रवाल ने कहा कि भारतीय किसानों को यूके के 90 बिलियन डॉलर के विशाल कृषि बाजार तक बेहतर पहुंच मिलेगी,इसके साथ ही भारत के समुद्री और सीफूड निर्यात को यूके में पूरी तरह से सीमा शुल्क छूट दी गई है,जिससे तटीय क्षेत्रों के मछुआरों और निर्यातकों की आय में वृद्धि होगी। नियमों को आसान बनाने के लिए सेल्फ-सर्टिफिकेशन प्रणाली शुरू की जा रही है,जो व्यापार में कागजी कार्रवाई और अनुपालन के बोझ को कम करेगी।

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