आरबीआई का डॉलर पर शिकंजा।अचानक बदल गई रुपये की किस्मत,जानें आज कितना मजबूत
आरबीआई का डॉलर पर शिकंजा।अचानक बदल गई रुपये की किस्मत,जानें आज कितना मजबूत

12 Oct 2026 |   28



 

नई दिल्ली।भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने रुपये को सपोर्ट देकर मजबूत करने के लिए जो कदम उठाए हैं,अब उनका असर भी दिखने लगा है।आरबीआई ने स्पॉट मार्केट में डॉलर की डिमांड को कम करने के लिए और करेंसी में सट्टेबाजी ट्रेड पर लगाम लगाने के लिए 12 अक्टूबर से पाबंदियों को प्रभावी किया है,इनके लागू होते ही भारतीय करेंसी रुपया में डॉलर की तुलना में तगड़ा उछाल आया है। आज सोमवार को करेंसी मार्केट ओपन होते ही रुपया 1 फीसदी से ज्यादा चढ़ गया।

डॉलर के मुकाबले रुपए में जोरदार उछाल

आरबीआई द्वारा हाजिर और एडवांस डॉलर की मांग को कंट्रोल करने के इन नीतिगत उपायों को लागू किए जाने के बाद सोमवार को भारतीय रुपया डॉलर के मुकाबले 95.74 पर पहुंच गया, जो शुक्रवार के 96.73 के बंद भाव से 1 फीसदी अधिक है,इसके अलावा भारतीय करेंसी दूसरी एशियाई करेंसियों में भी शानदार परफॉर्मेंस करता हुई नजर आ रही है।

इस साल जमकर टूटा,अब तगड़ा कमबैक

आरबीआई के उठाए कदमों के बाद रुपया में यह सुधार तब आया है,जब भारतीय करेंसी कैलेंडर वर्ष 2026 में अब तक 7 फीसदी से ज्यादा और फाइनेंशिय ईयर 2027 में अब तक लगभग 3.5 फीसदी से अधिक कमजोर हो चुकी है।इस साल कारोबार के दौरान रुपये बीते मई महीने में 96.96 प्रति डॉलर के रिकॉर्ड निचले स्तर के करीब पहुंच गया था,रुपये पर लगातार दबाव कच्चे तेल की तेज रफ्तार से बढ़ती कीमतों, मजबूत होते डॉलर और लगातार विदेशी पूंजी की निकासी के चलते देखने को मिला. 

एक्सपर्ट जता रहे हैं ये अनुमान

रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक सिटी के अर्थशास्त्रियों की मानें, तो उन्होंने कहा कि केंद्रीय बैंक के हालिया उपायों से रुपये के स्थिर होने से पहले उसमें अचानक तेजी आ सकती है।उन्होंने सोमवार को जारी एक बयान में कहा, आरबीआई का उपायों वाला पैकेज रुपये के अवमूल्यन से संबंधित अल्पकालिक लेन-देन की लागत को बढ़ाता है,यह भुगतान संतुलन पर पहले से मौजूद दबावों को दूर नहीं करता है।

आरबीआई ने उठाए हैं ये बड़े कदम 

आरबीआई के मुताबिक अमेरिकी डॉलर इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन, हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन और भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन को बेचे जाएंगे।यह सोमवार 12 अक्‍टूबर से आदेश प्रभावी हो गया और अगले आदेश तक लागू रहेगा।इस व्‍यवस्‍था के तहत आरबीआई नामित बैंकों के माध्‍यम से तीन पब्लिक सेक्‍टर की तेल कंपनियों को अमेरिकी डॉलर बेचेगा,इस सुविधा का उद्देश्‍य यह तय करना है कि कंप‍नियां अपने ऑपरेशन के लिए अपनी हर दिन की विदेशी मुद्रा आवश्‍यकताओं को पूरा कर सकें।

तेल कंपनियों के लिए स्‍पेशल डॉलर विंडो 

पहला उपाय:आरबीआई ने मौजूदा बाजार स्थितियों के आकलन करके विशेष व्यवस्था के तहत तीनों तेल कंपनियों को बैंकिंग प्रणाली के माध्यम से डॉलर प्राप्त करने के लिए एक चैनल उपलब्ध कराया है।बता दें तेल डिस्‍ट्रीब्‍यूशन कंपनियों को कच्‍चे तेल के आयात और अन्‍य विदेशी खर्चों के भुगतान के लिए डॉलर की आवश्‍यकता होती है।

दूसरा उपाय:विदेशी करेंसी डेरिवेटिव के लिए लोअर लिमिट  
आरबीआई ने कुछ विदेशी मुद्रा डेरिवेटिव लेनदेन करने की सीमा को 100 मिलियन डॉलर से घटाकर 5 मिलियन डॉलर कर दिया है।संशोधित सीमा रुपये से जुड़े एक्सचेंज-ट्रेडेड करेंसी डेरिवेटिव्स में मान्यता प्राप्त स्टॉक एक्सचेंजों पर भी लागू है,इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि बड़े डेरिवेटिव पोजीशन,जैसे आयात भुगतान या निर्यात सपोर्टिव हों, न कि मुख्य रूप से सट्टेबाजी के उद्देश्यों के लिए उपयोग किए जाएं।

तीसरा उपाय:आरबीआई का अगला उपाय 20 लाख डॉलर से अधिक के सांकेतिक मूल्य वाले पात्र रुपये से जुड़े विदेशी मुद्रा डेरिवेटिव कॉन्‍ट्रैक्‍ट के लिए विदेशी मुद्रा रिस्‍क रिजर्व की आवश्यकता अनिवार्य की है।रजिस्‍टर्ड डीलरों को हर पात्र लेनदेन के रुपये मूल्य के 20 फीसदी के बराबर कैश रिजर्व अमाउंट आरबीआई के पास रखना होगा।यह आवश्यकता उन कॉन्‍ट्रैक्‍ट पर लागू होती है,जिनका उपयोग चालू खाता जोखिमों को हेज करने के लिए किया जाता है,जहां यूजर्स रुपये के मुकाबले विदेशी मुद्रा खरीदता है।

चौथा उपाय:रजिस्‍टर्ड डीलरों को फॉरेक्स डेरिवेटिव कॉन्‍ट्रैक्‍ट में एंट्री करने वाले यूजर्स से एक वचन पत्र प्राप्त करना और उसे अपने पास रखना होगा,जिसमें यह पुष्टि की गई हो कि उसी रिस्‍क को किसी अन्य डीलर के माध्यम से हेज नहीं किया गया है,इस आवश्यकता का उद्देश्य एक ही तरह के जोखिम की दोहरी हेजिंग को रोकना और बाजार में सुधार करना है।

इधर आरबीआई एक्शन,उधर रुपये की उड़ान 

इन उपायों से डॉलर की सट्टेबाजी डिमांड मांग कम हो सकती है और शॉर्ट टर्म अस्थिरता में राहत मिल सकती है,ये उपाय ऐसे समय में आए हैं,जब केंद्रीय बैंक के विदेशी मुद्रा बाजार में हस्तक्षेप और ब्याज दरों में वृद्धि के बावजूद बीते शुक्रवार को रुपया अपने रिकॉर्ड निचले स्तर के करीब बना हुआ है।शुक्रवार को रुपया 96.73 रुपये प्रति डॉलर पर बंद हुआ था, जो मई के लाइफ टाइम लो-लेवल 96.96 रुपये के करीब था। केंद्रीय बैंकों के उपाय लागू होने से रुपये ने तेजी से कमबैक किया है।

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