भारत-ब्रिटेन ट्रेड डील पर स्कॉच का पेंच, 75% टैरिफ छूट को लेकर शराब कंपनियों में नाराजगी
भारत-ब्रिटेन ट्रेड डील पर स्कॉच का पेंच, 75% टैरिफ छूट को लेकर शराब कंपनियों में नाराजगी

24 Oct 2026 |   19



 

नई दिल्ली।भारत और ब्रिटेन के बीच हुए मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) को लागू हुए अभी कुछ ही समय हुआ है, लेकिन अब इस पर विवाद शुरू हो गया है।भारत ने थोक में आयात होने वाली स्कॉच व्हिस्की पर 75 फीसदी की रियायती टैरिफ दर देने से इनकार कर दिया है।इस फैसले से शराब उद्योग में हलचल मच गई है।डियाजियो और पेर्नोड रिकार्ड जैसी बड़ी कंपनियों का प्रतिनिधित्व करने वाली संस्था इंटरनेशनल स्पिरिट्स एंड वाइन्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (ISWAI) ने इस पर कड़ी आपत्ति जताई है।

ISWAI ने भारत के वाणिज्य मंत्री को पत्र लिखकर कहा है कि थोक स्कॉच व्हिस्की को रियायती टैरिफ के दायरे से बाहर रखना दोनों देशों के बीच हुए समझौते की शर्तों के खिलाफ है। संस्था ने चेतावनी दी है कि अगर भारत का यह रुख जारी रहता है,तो मुक्त व्यापार समझौते के तहत दोनों देशों को मिलने वाले प्रमुख फायदे प्रभावित हो सकते हैं।

भारत और ब्रिटेन के बीच यह समझौता 15 जुलाई से लागू हुआ था।इससे पहले स्कॉच व्हिस्की पर आयात शुल्क को लेकर दोनों देशों के बीच लंबे समय तक बातचीत चली थी। चर्चा के बाद भारत इस बात पर सहमत हुआ था कि स्कॉच की कुछ श्रेणियों पर आयात शुल्क तुरंत 150 फीसदी से घटाकर 75 फीसदी किया जाएगा। इसके बाद अगले 10 वर्षों में इसे धीरे-धीरे घटाकर 40 फीसदी तक लाया जाएगा।

ब्रिटेन सरकार ने इस समझौते को ऐतिहासिक बताते हुए कहा था कि इससे स्कॉच व्हिस्की जैसे उसके प्रमुख उत्पादों को भारतीय बाजार में बड़ी राहत मिलेगी। हालांकि अब स्थिति कुछ अलग नजर आ रही है। भारतीय जांच एजेंसियों का मानना है कि आयात शुल्क में कटौती का फायदा थोक में आयात होने वाले स्कॉच कंसंट्रेट यानी गाढ़े मिश्रण को नहीं मिलता।

इसी मामले में भारत के राजस्व खुफिया निदेशालय (डीआर‌आई) ने हाल ही में डियाजियो और पेर्नोड रिकार्ड के दफ्तरों की तलाशी ली और उनके अधिकारियों से पूछताछ की। जांच एजेंसियों को शक है कि कंपनियों ने कम टैक्स चुकाने के लिए आयात किए गए सामान की गलत श्रेणी दिखाई है। जांच अधिकारियों के मुताबिक, थोक में आयात होने वाले स्कॉच कंसंट्रेट को उस कस्टम श्रेणी में रखा जाना चाहिए, जिस पर 150 फीसदी की पूरी आयात ड्यूटी लगती है।

कंपनियों का कहना है कि उन्होंने कोई गड़बड़ी नहीं की है और वे भारतीय जांच एजेंसियों के साथ पूरा सहयोग कर रही हैं। पेर्नोड रिकार्ड के लिए भारत बिक्री की मात्रा के लिहाज से दुनिया का सबसे बड़ा बाजार है। हालांकि, कंपनी भारत में पहले से ही प्रतिस्पर्धा नियमों के उल्लंघन से जुड़े मामलों और करीब 314 मिलियन डॉलर के पुराने टैक्स बकाये की मांग का सामना कर रही है।

पेर्नोड रिकार्ड और डियाजियो जैसी कंपनियां ब्रिटेन से बड़ी मात्रा में स्कॉच कंसंट्रेट यानी गाढ़ा मिश्रण आयात करती हैं। इसके बाद इसमें दूसरी सामग्रियां मिलाकर भारत में रॉयल स्टैग, ब्लेंडर्स प्राइड और मैकडॉवेल्स जैसी लोकप्रिय व्हिस्की तैयार की जाती हैं। कंपनियों का मानना है कि मुक्त व्यापार समझौते के तहत इस कंसंट्रेट पर भी कम आयात शुल्क लागू होना चाहिए।

इस विवाद पर ब्रिटेन सरकार ने भी प्रतिक्रिया दी है। सरकार के प्रवक्ता ने कहा है कि इस मामले को सुलझाने के लिए भारत सरकार से बातचीत की जा रही है। ब्रिटेन चाहता है कि उसकी कंपनियों को समझौते में तय की गई आयात शुल्क दरों के मुताबिक कारोबार करने का मौका मिले।

ब्रिटेन की स्कॉच व्हिस्की एसोसिएशन (SWA) ने भी इस मुद्दे पर अपनी बात रखी है। संगठन का कहना है कि भारतीय बाजार में स्कॉच व्हिस्की की सफलता के लिए थोक में आयात अहम है। इसलिए जरूरी है कि भारत और ब्रिटेन के बीच हुए समझौते की शर्तों का सही तरीके से पालन किया जाए।

बता दें कि भारत में शराब का कारोबार करीब 65 अरब डॉलर का है। रेटिंग एजेंसी क्रिसिल के मुताबिक भारत में आयात होने वाली कुल स्पिरिट्स में से करीब 75 फीसदी ब्रिटेन से आती हैं। इनमें स्कॉच व्हिस्की की हिस्सेदारी सबसे ज्यादा है। ऐसे में इस मामले की जांच और कस्टम श्रेणी को लेकर उठे विवाद से पूरे शराब उद्योग में अनिश्चितता बढ़ गई है।

उद्योग से जुड़े जानकारों का कहना है कि भारत में आयात शुल्क को लेकर होने वाले विवाद विदेशी निवेशकों के लिए चिंता का विषय रहे हैं। इससे पहले सैमसंग और फॉक्सवैगन जैसी बड़ी विदेशी कंपनियों को भी भारी-भरकम टैक्स नोटिस मिल चुके हैं।

शराब उद्योग से जुड़ी संस्था ने सरकार से मांग की है कि इस मामले में जल्द स्थिति साफ की जाए। इससे नियमों का पालन करने वाली कंपनियों को बिना किसी रुकावट के कारोबार करने में मदद मिलेगी।

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