पीएम डिग्री विवाद मामले में हाईकोर्ट ने दिया 3 हफ्ते का समय,जानें डीयू से किन बातों का मांगा जवाब
पीएम डिग्री विवाद मामले में हाईकोर्ट ने दिया 3 हफ्ते का समय,जानें डीयू से किन बातों का मांगा जवाब

10 Feb 2026 |   23



 

नई दिल्ली।प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की शैक्षणिक डिग्री की जानकारी देने की मांग करने वाली याचिका पर मंगलवार को दिल्ली हाईकोर्ट में सुनवाई हुई। सुनवाई के दौरान दिल्ली यूनिवर्सिटी (डीयू) ने हाईकोर्ट को बताया कि इस याचिका में कोई खास दम नहीं है और याचिका का मकसद सिर्फ मामले को सनसनीखेज बनाना है।सुनवाई के बाद हाईकोर्ट ने डीयू को देरी माफी से जुड़ी याचिकाओं पर आपत्तियां दर्ज करने के लिए तीन सप्ताह का समय दिया और अब इस मामले में अगली सुनवाई 27 अप्रैल को होगी।

 मकसद सिर्फ सनसनी फैलाना

सुनवाई के दौरान डीयू की ओर से अदालत में पेश हुए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा,यह सिर्फ सनसनी फैलाने के लिए है।इस मामले में कुछ भी नहीं है।इसके साथ ही मेहता ने जवाब दाखिल करने के लिए समय मांगा और कहा कि वह अपील दायर करने में हुई देरी और मामले के गुण-दोष (मेरिट) दोनों पर जवाब देना चाहते हैं।

अपील करने में हुई देरी को बताया मामूली

अपीलकर्ताओं की तरफ से पेश हुए वरिष्ठ वकील शादान फरासत ने कहा कि अगर सॉलिसिटर जनरल मामले के गुण-दोष पर बहस करने के लिए तैयार हैं, तो अदालत अपील में नोटिस जारी कर सकती है।साथ ही शादान ने अपील दाखिल करने में हुई देरी को मामूली बताते हुए इसे माफ करने योग्य बताया।

 सिर्फ सनसनी फैलाने के लिए नोटिस नहीं दे सकते

सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने इस सुझाव का विरोध करते हुए कहा कि वह पहले से ही मामले में पेश हो रहे हैं और नोटिस जारी करना केवल मामले को और सनसनीखेज बनाने का काम करेगा। मेहता ने कहा,मैं बराबर पेश हो रहा हूं और सिर्फ किसी बात को सनसनीखेज बनाने के लिए नोटिस जारी नहीं किया जा सकता।

27 अप्रैल को होगी अगली सुनवाई

दोनों पक्षों की दलीलों को सुनने के बाद मुख्य न्यायाधीश देवेंद्र कुमार उपाध्याय और जस्टिस तुषार राव गेडेला की डिवीजन बेंच ने दिल्ली विश्वविद्यालय को देरी माफी से जुड़ी याचिकाओं पर आपत्तियां दर्ज करने के लिए तीन सप्ताह का समय दिया। अब इस मामले की अगली सुनवाई 27 अप्रैल को होगी।

संजय सिंह समेत अन्य लोगों ने दायर की याचिका

बता दें कि दिल्ली हाईकोर्ट में इस मामले से जुड़ी याचिकाएं आम आदमी पार्टी के नेता संजय सिंह,आरटीआई कार्यकर्ता नीरज शर्मा और वकील मोहम्मद इरशाद की तरफ से दायर की गई हैं।ये याचिकाएं सिंगल जज के 25 अगस्त, 2024 को दिए उस आदेश के खिलाफ दायर की गई हैं,जिसमें उन्होंने प्रधानमंत्री की डिग्री से जुड़ी जानकारी को सार्वजनिक करने के केंद्रीय सूचना आयोग के 2016 के निर्देश को रद्द कर दिया था।एकल न्यायाधीश ने अपने फैसले में कहा था कि,डिग्री और मार्कशीट जैसे शैक्षणिक रिकॉर्ड आरटीआई एक्ट के तहत व्यक्तिगत जानकारी की श्रेणी में आते हैं और इन्हें तब तक सार्वजनिक नहीं किया जा सकता, जब तक कोई बड़ा सार्वजनिक हित साबित न हो।

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