यूजीसी नियमों को लेकर डीयू में हंगामा,छात्रों का जोरदार प्रदर्शन,जानें क्या है मांग
यूजीसी नियमों को लेकर डीयू में हंगामा,छात्रों का जोरदार प्रदर्शन,जानें क्या है मांग

03 Feb 2026 |   27



 

नई दिल्ली।विश्वविद्यालय अनुदान आयोग(यूजीसी)2026 के नियमों पर सुप्रीम कोर्ट द्वारा रोक लगाए जाने के बाद एक बार फिर छात्रों का प्रदर्शन देखा जा रहा है।दिल्ली यूनिवर्सिटी (डीयू)में मंगलवार को बड़ी संख्या में अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अन्य पिछड़ा वर्गके छात्रों और उनके समर्थकों ने यूजीसी के नए नियमों 2026 को लागू करने की मांग को लेकर विरोध प्रदर्शन किया।इस दौरान छात्रों ने यूजीसी रेगुलेशन लागू करो,जय भीम जैसे नारे गए।छात्रों का कहना है कि नए नियमों से उच्च शिक्षा में समान अवसर मिलेगा और इसे रोकना सामाजिक न्याय के खिलाफ है।छात्रों के प्रदर्शन को देखते हुए आर्ट्स फैकल्टी के बाहर भारी संख्या में पुलिस बल तैनात है और स्थित पर नजर बनाए हुए हैं।

बता दें कि सुप्रीम कोर्ट ने यूजीसी के हालिया समानता नियमों पर यह कहते हुए गुरुवार को रोक लगा दी कि यह प्रारूप प्रथम दृष्टया अस्पष्ट है,इसके बहुत व्यापक परिणाम हो सकते हैं।कोर्ट ने ये भी कहा था कि इसका असर खतरनाक रूप से समाज को विभाजित करने वाला भी हो सकता है।

सुप्रीम कोर्ट ने यूजीसी विनियम 2026 के खिलाफ दायर तीन याचिकाओं पर केंद्र और यूजीसी से 19 मार्च तक जवाब मांगा।याचिकाओं में यह आपत्ति उठाई गई है कि इन नियमों में जाति-आधारित भेदभाव को केवल अनुसूचित जाति,
अनुसूचित जनजाति और अन्य पिछड़ा वर्ग के सदस्यों के खिलाफ होने वाले भेदभाव तक ही सीमित रूप में परिभाषित किया गया है।

प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची की पीठ ने कहा कि अगर हम दखल नहीं देते हैं तो इसके खतरनाक परिणाम होंगे,समाज में विभाजन होगा और इसके गंभीर प्रभाव होंगे।प्रथम दृष्टया हम कहते हैं कि विनियमन की भाषा अस्पष्ट है और विशेषज्ञों को इसकी भाषा को संशोधित करने के लिए जांच करने की जरूरत है, ताकि इसका दुरुपयोग न हो।

पीठ ने नियम 3(1)(सी) के तहत संस्थागत संरक्षण से सामान्य श्रेणियों को बाहर रखने वाली जाति-आधारित भेदभाव की गैर-समावेशी परिभाषा को स्थगित करने का निर्देश दिया और यूजीसी (उच्च शिक्षा संस्थानों में समता के संवर्द्धन हेतु) विनियम 2012 को बहाल कर दिया।

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