बेटे की चाहत में 12वीं बार मां बनी 42 साल की महिला,इस बार भी पूरी नहीं हुई चाहत
बेटे की चाहत में 12वीं बार मां बनी 42 साल की महिला,इस बार भी पूरी नहीं हुई चाहत

30 Jan 2026 |   36



 

रोहतक।हरियाणा के रोहतक जिले के बहुजमालपुर गांव की एक महिला की कहानी ने दिल दहला दिया है। 42 वर्षीय सुदेश देवी ने बेटे की चाहत में 27 सालों में 12 बार बच्चों को जन्म दिया है,लेकिन हर बार बेटी ही हुई। 23 जनवरी को सुदेश ने 12वीं बेटी को जन्म दिया।अब परिवार ने और बच्चे न पैदा करने का फैसला लिया है।अब परिवार आर्थिक मुश्किलों और सात बेटियों को पालने की वजह से परेशान है।आइए विस्तार से जानें।

1998 में हुई थी सुदेश की शादी

सुदेश देवी की शादी 1998 में श्री भगवान से हुई थी।दोनों मजदूरी करते हैं।सुदेश दिहाड़ी मजदूर है और पति मजदूरी के साथ ऑटो-रिक्शा भी चलाते हैं।परिवार की आर्थिक हालत कमजोर रही है।शादी के बाद से बेटे की तीव्र इच्छा के कारण सुदेश बार-बार गर्भवती हुई।कुल 12 प्रेग्नेंसी में से केवल 7 बच्चे जीवित हैं,पांच की मौत हो गई।दो बेटियों की जन्म के तुरंत बाद,एक बेटे की 2020 में कुछ घंटों में और दो मिसकैरेज भी हुए।

2001 में पैदा हुई पहली बेटी

सुदेश देवी को पहली बेटी निशा 2001 में पैदा हुई (अब 25 वर्ष की),जो स्वास्थ्य खराब होने से माता-पिता के साथ रहती है।दूसरी बेटी मनीषा (23 वर्ष) की शादी हो चुकी है और उसके दो बच्चे हैं।अन्य बेटियां काजल (12वीं कक्षा), राधिका (11वीं कक्षा), प्रेरणा (7वीं कक्षा) स्कूल जाती हैं।सबसे छोटी प्रिया (7 वर्ष) अभी स्कूल नहीं जाती है। 23 जनवरी को कम हीमोग्लोबिन के कारण हाई-रिस्क प्रेग्नेंसी होने पर भी पीजीआई रोहतक में नॉर्मल डिलीवरी हुई।फिलहाल नई बेटी का नाम अभी नहीं रखा गया है।

डॉक्टरों ने दी चेतावनी

डॉक्टरों ने सुदेश देवी को कई बार चेतावनी दी कि आगे प्रेग्नेंसी जानलेवा हो सकती है,लेकिन परिवार और पति की इच्छा के आगे सुदेश चुप रही।सुदेश की मां लक्ष्मी कहती हैं कि बेटी ने बेटे की चाह में बहुत कष्ट सहे है,बेटी को विश्वास था कि बेटा परिवार का सहारा बनेगा।अब वे कहती हैं कि इस आखिरी बेटी के बाद और बच्चे नहीं चाहिए।

जींद जिले के उचाना का मामला

यह मामला हरियाणा में बेटे की चाहत और लिंग भेदभाव की गहरी समस्या को उजागर करता है।इसी तरह जींद जिले के उचाना में एक महिला ने 11वीं डिलीवरी में बेटे को जन्म दिया, जबकि पहले 10 बेटियां थीं।फतेहाबाद में भी संजय और सुनीता ने 19 वर्षों में 10 बेटियों के बाद 11वीं संतान के रूप में बेटा पाया था।

महिलाओं की सेहत पर खतरा

इन घटनाओं में महिलाओं की सेहत पर बड़ा खतरा दिखता है। विशेषज्ञों के मुताबिक बार-बार प्रेग्नेंसी से एनीमिया,कमजोरी, उच्च रक्तचाप और अन्य जटिलताएं बढ़ती हैं।डॉक्टर नीलम सूरी गायनेकोलॉजिस्ट बताती हैं कि इतनी डिलीवरी महिला की जान के लिए जोखिम भरी होती हैं,खासकर गरीबी और कम पोषण में।

परिवार की सरकार से मांग

सुदेश देवी का परिवार सरकार से आर्थिक सहायता की मांग कर रहा है,क्योंकि कई बेटियों को पालना-पढ़ाना मुश्किल है। ऐसे मामले परिवार नियोजन लड़कियों की शिक्षा और लिंग समानता की जरूरत पर जोर देते हैं।समाज में बेटे-बेटी में भेदभाव कम हो,तभी महिलाओं का स्वास्थ्य और सम्मान सुरक्षित रहेगा।

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