नई दिल्ली।सूचना का अधिकार (आरटीआई) लागू होने के 20 साल बाद भी विधायी रिकाॅर्ड,सदन की कार्यवाही और प्रस्तावों की जानकारी सार्वजनिक करने में नाकाम रहने पर दिल्ली हाईकोर्ट ने बुधवार को दिल्ली नगर निगम (एमसीडी) को जमकर फटकार लगाई।
ऐसी जानकारी स्वत: ही सार्वजनिक करें
एक जनहित याचिका पर मुख्य न्यायाधीश देवेंद्र कुमार उपाध्याय और न्यायमूर्ति तेजस कारिया की पीठ ने कहा कि आरटीआई अधिनियम की धारा-चार के तहत सार्वजनिक एजेंसियों को अनिवार्य तौर पर ऐसी जानकारी स्वत: ही सार्वजनिक करना है ताकि आरटीआई अधिनियम के तहत प्रक्रिया का कम से कम सहारा लेना पड़े।
पीठ ने आलोचना करते हुए कहा...
गैर सरकारी संस्थान सेंटर फार यूथ, कल्चर, लाॅ एंड एनवायरनमेंट की जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान एमसीडी ने आश्वासन दिया कि अधिकारियों द्वारा सुधारात्मक कदम उठाए जाएंगे,क्योंकि ऐसी जानकारी अपलोड करने का मुद्दा सक्षम प्राधिकारी के विचाराधीन है। इसके जवाब में पीठ ने आलोचना करते हुए कहा कि 20 साल बाद यह काम करने के लिए आपका धन्यवाद। अदालत बहुत आभारी है।
पूछा-जानकारी देने के लिए क्या कदम उठाए
पीठ ने साथ ही सवाल उठाया कि यह कौन सी प्रक्रिया है। एमसीडी को यह जानकारी 120 दिनों के भीतर और फिर नियमित अंतराल पर अपलोड करनी है। अब तक एमसीडी क्या कर रहा था,यह अधिनियम 2005 में पास हुआ था और इसे लागू हुए 20 साल हो गए हैं।
अदालत ने याचिका पर एमसीडी को नोटिस जारी कर...
अदालत ने याचिका पर एमसीडी को नाेटिस जारी कर हलफनामा दाखिल कर यह बताने को कहा कि आरटीआई अधिनियम की धारा-चार को लागू करने के लिए जनता को जानकारी प्रकाशित करके प्रदान करने के लिए क्या कदम उठाए गए हैं।
कोई रिकाॅर्ड अपडेट नहीं किया गया
सुनवाई के दौरान याची की तरफ से अदालत को बताया गया कि आरटीआई आवेदन के जवाब में एमसीडी ने कहा है कि तीन पुरानी नगर पालिकाओं के एकीकरण के बाद से उसकी वेबसाइट को अपडेट करने का काम चल रहा है। इसलिए अब तक उसकी वेबसाइट पर ऐसा कोई रिकाॅर्ड अपडेट नहीं किया गया है।
जानकारी और विवरण देने से कोई लेना-देना नहीं
अदालत काे यह भी बताया गया कि एमसीडी ने यह रुख अपनाया कि उसके प्रस्तावों को अपनी आधिकारिक वेबसाइट पर प्रकाशित करने के लिए कोई नियम या दिशानिर्देश नहीं थे, क्योंकि यह दिल्ली नगर निगम (डीएमसी) अधिनियम की धारा 86 द्वारा शासित है।हालांकि पीठ ने कह कि डीएमसी अधिनियम की धारा-86 का जनता को जानकारी और विवरण देने से कोई लेना-देना नहीं है।
बता दें याचिका में एमसीडी के विधायी रिकाॅर्ड, सदन की कार्यवाही, स्थायी समितियों द्वारा पारित प्रस्तावों और अन्य सभी सार्वजनिक जानकारी को समयबद्ध तरीके से अपनी वेबसाइट पर अपलोड करने का निर्देश देने की मांग की गई है।