दो वक्त की रोटी और फीस भरने का संघर्ष,पंक्चर की दुकान चलाने वाले की बेटी बनी अफसर
बेटी ने साबित कर दिया कि मेहनत सच्ची हो तो आड़े नहीं आते संसाधन
बुलंदशहर।उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर के राजकुमार वर्मा की होनहार बेटी गायत्री वर्मा उत्तर प्रदेश पब्लिक सर्विस कमीशन (UPPSC) की परीक्षा पास कर पीसीएस अफसर बनने जा रही है।गायत्री ने अभावों को मात देते हुए यह बड़ी सफलता अपने तीसरे प्रयास में 210वीं रैंक हासिल करके प्राप्त की है।पंक्चर और चाय की दुकान चलाने वाले पिता की लाडली की इस सफलता से पूरे जिले में जश्न का माहौल है और परिवार बेटी की आरती उतार रहा है।
गायत्री ने इंटर तक पढ़ाई बुलंदशहर में की, ग्रेजुएशन अलीगढ़ से किया
गायत्री वर्मा ने इंटरमीडिएट तक की पढ़ाई बुलंदशहर से की और ग्रेजुएशन की शिक्षा अलीगढ़ स्थित अपने ननिहाल में रहकर पूरी की।आर्थिक तंगी के बावजूद गायत्री ने ऑनलाइन माध्यमों से तैयारी की और सोशल मीडिया से दूरी बनाए रखी। यह कामयाबी उनके पिता के संघर्षों और परिवार के अटूट विश्वास का परिणाम है,जिससे आज क्षेत्र का नाम रोशन हुआ है।
दो वक्त की रोटी और फीस भरने का संघर्ष
गायत्री वर्मा के पिता राजकुमार वर्मा एक मामूली दुकान पर टायर पंक्चर बनाने का काम करते हैं।घर की आर्थिक हालत इतनी कमजोर थी कि पंक्चर की दुकान से होने वाली 200-400 रुपये की कमाई से गुजारा मुश्किल था,इसके लिए राजकुमार को साथ में चाय की दुकान भी खोलनी पड़ी।कई बार बेटी की पढ़ाई की फीस भरने के लिए राजकुमार को ब्याज पर पैसे लेने पड़े। राजकुमार का सपना है कि उनकी बेटी अब पूरी ईमानदारी से काम करे और न खुद भ्रष्टाचार करे, न किसी को करने दे। राजकुमार के घर पर बधाई देने वालों का तांता लगा हुआ है।
हार नहीं मानी और तीसरे प्रयास में मिली सफलता
गायत्री वर्मा की सफलता का सफर आसान नहीं रहा।पहले प्रयास में गायत्री ने प्रीलिम्स भी पास नहीं कर पाई थीं,लेकिन मां के हौसले ने उन्हें फिर से खड़ा किया।दूसरे प्रयास में मुख्य परीक्षा तक पहुंचीं पर अंतिम चयन नहीं हुआ।आखिरकार तीसरे प्रयास में गायत्री ने अपनी मेहनत से 210वीं रैंक हासिल की।आज घर पर ढोल-नगाड़ों की थाप है,गले में फूलों की माला है और बिटिया की आरती उतारी जा रही है।गायत्री ने साबित कर दिया कि मेहनत सच्ची हो तो संसाधन आड़े नहीं आते।