महिला जज पर दबाव डाला,बदनाम करने का कैंपेन चलाया,भाजपा नेता बांसुरी स्वराज ने केजरीवाल पर लगाए गंभीर आरोप
महिला जज पर दबाव डाला,बदनाम करने का कैंपेन चलाया,भाजपा नेता बांसुरी स्वराज ने केजरीवाल पर लगाए गंभीर आरोप

21 Apr 2026 |   13



 

नई दिल्ली।शराब नीति मामले में जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा से केस ट्रांसफर की अरविंद केजरीवाल की याचिका को दिल्ली हाईकोर्ट ने खारिज कर दी है। याचिका खारिज होने के बाद सियासी घमासान तेज हो गया है।इस फैसले को लेकर भारतीय जनता पार्टी की सांसद बांसुरी स्वराज ने पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल पर न्यायपालिका पर दबाव बनाने की कोशिश का आरोप लगाया।

बांसुरी स्वराज ने मंगलवार को नई दिल्ली में पार्टी मुख्यालय में प्रेस कॉन्फ्रेंस की और अरविंद केजरीवाल पर जमकर निशाना साधा।बांसुरी ने कहा कि कल दिल्ली हाई कोर्ट का एक आदेश आया है।जस्टिस स्वर्ण कांता ने केजरीवाल की दबाव की रणनीति को खारिज करते हुए न्यायिक स्वतंत्रता का एक नया आयाम स्थापित किया है। हम उसका मिलकर अभिनंदन और स्वागत करते हैं।

बांसुरी स्वराज ने आरोप लगाया कि केजरीवाल ने न्यायपालिका पर दबाव बनाने की कोशिश की।कहा,अरविंद केजरीवाल एक दबंग व्यक्ति की तरह व्यवहार कर रहे हैं। उन्होंने देश की न्यायपालिका की एक महिला जज पर दबाव बनाने की कोशिश की।कोर्ट का फैसला साफ दिखाता है कि दबाव की राजनीति न्याय व्यवस्था पर नहीं चलती।

बांसुरी स्वराज ने कहा कि अरविंद केजरीवाल एक दबंग हैं। उन्होंने देश की सम्मानित न्यायपालिका की एक महिला सदस्य पर दबाव डालने की कोशिश की।केजरीवाल की दबाव बनाने की रणनीति को खारिज करते हुए दिल्ली हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश ने उनके केस ट्रांसफर की मांग को अस्वीकार कर दिया। बांसुरी ने कहा कि केजरीवाल ये बात भूल गए कि इस देश की न्याय प्रणाली उनकी सुविधा से नहीं चलती। इस देश की न्याय प्रणाली संविधान और कानून के तहत चलती है।

बांसुरी स्वराज ने कहा कि केजरीवाल ने 9 मार्च को आए आदेश के बाद 11 मार्च को दिल्ली हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश के सामने अर्जी लगाई कि जस्टिस स्वर्णकान्ता के सामने से ये केस हटा दिया जाए,क्योंकि केजरीवाल को 9 मार्च को आया आदेश पसंद नहीं आया। यह बात साबित हो गई है कि आम आदमी पार्टी एक ड्रामा कंपनी है और केजरीवाल उस ड्रामा कंपनी के निर्देशक हैं। बांसुरी ने कहा कि 13 मार्च को उन्होंने जस्टिस स्वर्ण कांता के समक्ष अर्जी लगाई और कहा कि हमें आप पसंद नहीं हैं, आप स्वयं ही इस केस को त्याग दीजिए। इसके बाद शुरू हुआ इस देश के न्यायतंत्र के खिलाफ सोचा-समझा षड्यंत्र।

बांसुरी स्वराज ने कहा कि आम आदमी पार्टी ने नैरेटिव कंट्रोल करने के लिए जस्टिस स्वर्ण कांता के खिलाफ एक दुर्भावनापूर्ण मीडिया और सोशल मीडिया कैंपेन चलाया। जस्टिस स्वर्ण कांता पर व्यक्तिगत आरोप लगाए गए और उनके बच्चों के खिलाफ भी आरोप लगाए गए। बांसुरी ने कहा कि यह किसी न्यायाधीश का मामला नहीं था,बल्कि एक निर्णायक षड्यंत्र था,यह धारणा का मामला नहीं था,यह नियंत्रण का मामला था,वे भूल गए कि अदालतें दबाव से नहीं, बल्कि संविधान से चलती हैं।

बांसुरी स्वराज ने कहा कि केजरीवाल न सिर्फ नाटकबाजी कर रहे हैं,बल्कि वे डरे हुए भी हैं।उन्हें पता है कि राउज एवेन्यू कोर्ट का आदेश हाई कोर्ट में न्यायिक जांच में शायद पास न हो।पिछले एक मामले में सभी सबूत,गवाह और सामग्री दिल्ली हाई कोर्ट के सामने पेश किए गए थे। उसी के आधार पर केजरीवाल और अन्य आरोपियों की जमानत दिल्ली हाई कोर्ट ने रद्द कर दी थी। 

बांसुरी स्वराज ने कहा कि केजरीवाल इसलिए डरे हुए हैं क्योंकि उन्हें पता है कि दिल्ली हाई कोर्ट यह सुनिश्चित कर सकता है कि दिल्ली की जनता को न्याय मिले।बांसुरी ने कहा,आम आदमी पार्टी का नारी विरोधी चेहरा सामने आया है। आम आदमी पार्टी ने नारी शक्ति वंदन अधिनियम का विरोध कर महिलाओं का हक छीना है। आम आदमी पार्टी चाहती है कि महिलाएं सिर्फ वोट देने तक सीमित रही।

बताते चलें कि दिल्ली शराब नीति मामले में पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा ने उनके मामले की सुनवाई से हटने से साफ इनकार कर दिया है। केजरीवाल की ओर से दायर याचिका में जस्टिस शर्मा की निष्पक्षता पर सवाल उठाते हुए उन्हें केस से अलग होने की मांग की गई थी, जिसे अदालत ने सिरे से खारिज कर दिया। जस्टिस शर्मा ने कहा था कि उनकी न्यायिक गरिमा और ईमानदारी को दी गई यह चुनौती न केवल अनुचित है बल्कि न्यायपालिका की स्वतंत्रता पर प्रहार है।

More news