1500000 आदिवासियों का दिल्ली में होगा महाकुंभ,लव-लैंड जिहाद और धर्मांतरण के खिलाफ होगा शंखनाद
1500000 आदिवासियों का दिल्ली में होगा महाकुंभ,लव-लैंड जिहाद और धर्मांतरण के खिलाफ होगा शंखनाद

22 May 2026 |   15



 

नई दिल्ली।लव जिहाद और लैंड जिहाद जैसे बढ़ते मामलों और धर्मांतरण के खिलाफ अपनी संस्कृति,धर्म और परंपराओं को बचाने के लिए राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में 24 मई को एक ऐतिहासिक आयोजन होने जा रहा है।देश के कोनों से करीब डेढ़ लाख से ज्यादा जनजाति (आदिवासी) समाज के लोग दिल्ली में एक विराट कुंभ में हुंकार भरेंगे।यह विशाल हुजूम किसी राजनीतिक आंदोलन या धरने-प्रदर्शन के लिए नहीं, बल्कि अपनी हजारों साल पुरानी गौरवशाली संस्कृति, धर्म और परंपराओं की रक्षा का संकल्प लेने के लिए एकजुट हो रहा है।देश में लव जिहाद और लैंड जिहाद के बढ़ते गंभीर मामलों के बीच जनजाति समाज का यह विराट कुंभ पहली बार इतनी बड़ी और रिकॉर्ड संख्या में आयोजित होने जा रहा है।

दिल्ली में 24 मई को होगा जनजातीय समुदाय का महाकुंभ

आयोजकों ने बताया कि इस महा-समागम की सबसे दिलचस्प बात यह है कि लाखों की संख्या में आने वाले जनजातियों का यह जमावड़ा कोई उग्र आंदोलन या विरोध प्रदर्शन नहीं है। बल्कि यह उस महान और जीवंत संस्कृति का एक भव्य प्रदर्शन है,जिसे जनजाति समाज ने हजारों सालों से सहेज कर रखा है।इसी गौरवशाली संस्कृति को अंतरराष्ट्रीय साजिशों से बचाने और उसकी रक्षा का संकल्प लेकर लाखों की संख्या में जनजाति दिल्ली पहुंच रहे हैं।

अंतरराष्ट्रीय शक्तियों के खिलाफ प्रदर्शन

प्रमोद पैठकर अखिल भारतीय प्रचार प्रमुख,वनवासी कल्याण आश्रम से जुड़े हैं।उनका कहना है कि स्वतंत्रता के पहले से ही इन जनजातियों को अंतरराष्ट्रीय शक्तियां टारगेट कर रही हैं। ईसाई मिशनरियों के माध्यम से सेवा कार्यों के बहाने बड़े पैमाने पर धर्मांतरण कराने में जुटी हुई हैं।यहीं वजह है कि धर्मांतरण के इस खेल का नतीजा आज पूरा जनजाति समाज झेल रहा है।

गलत तरीकों से अधिकारों पर कब्जा

प्रमोद पैठकर बताते हैं कि भारतीय संविधान में जनजाति समाज के लिए अलग से प्रावधान किए गए हैं,जिससे उनका समाज और संस्कृति की पहचान और सुरक्षा बनी रहे,लेकिन आज भी एक बड़ा वर्ग उन अधिकारों के लिए संघर्ष कर रहा है।पैठकर बताते हैं कि एक स्टडी के मुताबिक उच्च पदों पर 90%, सरकारी नौकरियों में 10% धर्मांतरित ईसाइयों ने कब्जा कर लिया है, इसलिए जनजाति समाज की मांग है कि दोहरा लाभ लेने वाले ऐसे व्यक्तियों को आरक्षण जैसी सभी सुविधाओं से वंचित कर देना चाहिए,इसके अलावा फर्जी तरीके से गैर जनजाति लोगों ने जनजाति होने के प्रमाण पत्र भी बनवा कर सरकारी नौकरियों पर कब्जा कर लिया है, ये भी गंभीर विषय है और इस पर सरकार को तुरंत कड़ा एक्शन लेना चाहिए।

लव-लैंड जिहाद

प्रमोद पैठकर बताते हैं कि लव जिहाद के साथ साथ अब जनजाति समाज की जमीनों को हड़पने के लिए लैंड जिहाद भी ऑर्गेनाइज्ड तरीके से चलाया जा रहा है।एक के बाद एक कई घटनाएं इस तरह की सामने आ चुकी हैं,इसे ना केवल जनजाति समाज की असुरक्षा का मामला बनता है बल्कि देश की एकता और अखंडता के लिए भी गंभीर खतरा बन चुका है।

हिदुओं के खिलाफ मिशनरियां कर रही काम

बता दें कि भारतीय संस्कृति और हिंदू समाज से छिन्न भिन्न करने के लिए कई प्रयास इन मिशनरियों द्वारा किए जा रहे हैं,जिससे ये जनजातियां धीरे-धीरे मुख्य धारा से अलग हो जाएं,इसलिए 24 मई को देश के लिए और अपनी संस्कृति की रक्षा के लिए लाखों जनजाति लोग देश से आह्वान करने के लिए एकत्रित होंगे।इस जनजाति सांस्कृतिक समागम में देश के गृहमंत्री अमित शाह भी शामिल हो सकते हैं।

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