बृजभूषण शरण सिंह ने नमाज विवाद में मांगी माफी,कहा- नगा साधुओं ने की मुस्लिम आक्रांताओं से हनुमानगढ़ी की रक्षा
बृजभूषण शरण सिंह ने नमाज विवाद में मांगी माफी,कहा- नगा साधुओं ने की मुस्लिम आक्रांताओं से हनुमानगढ़ी की रक्षा

22 Jul 2026 |   27



 

गोंडा।अयोध्या हनुमानगढ़ी को लेकर भारतीय जनता पार्टी के पूर्व सांसद बृजभूषण शरण सिंह ने चार दिन पहले दिए गए अपने बयान पर माफी मांग ली है।बृजभूषण ने कहा था कि हनुमानगढ़ी में कभी नमाज नहीं पढ़ी गई।इसके साथ ही दावा किया था कि हनुमानगढ़ी का निर्माण एक मुस्लिम ने कराया था।अब बृजभूषण ने कहा कि वो बयान अधूरा था।कहा कि नगा साधुओं ने मुस्लिम आक्रांताओं से हनुमानगढ़ी की रक्षा की थी। यह भी कहा कि हनुमानगढ़ी की सीढ़ियों पर नमाज नहीं पढ़ी गई,लेकिन परिसर में पढ़ी गई थी।

बता दें कि पिछले दिनों मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अयोध्या दौरे के दौरान राम मंदिर चढ़ावा चोरी पर समाजवादी पार्टी पर निशाना साधते हुए नमाज की बात उठाई थी। सीएम योगी ने कहा था कि जो लोग आज राम मंदिर की आस्था की बात कर रहे हैं, उन लोगों ने ही हनुमानगढ़ी की सीढ़ियों पर नमाज पढ़वाई थी।

बृजभूषण सिंह ने ये किया था दावा

सीएम योगी के इसी दावे को लेकर जब बृजभूषण शरण सिंह से सवाल किया गया तो उन्होंने हनुमानगढ़ी में कभी नमाज पढ़ने की बाते से ही इनकार कर दिया था। बृजभूषण ने साफ कहा कि हनुमानगढ़ी में कभी नमाज नहीं पढ़ी गई। यह भी जोड़ा कि जो लोग नमाज पढ़ने की बातें कर रहे हैं, उन्हें मालूम होना चाहिए कि हनुमानगढ़ी का निर्माण एक मुसलमान ने ही कराया है। आज भी उसका नाम मंदिर पर लगे पत्थर पर लिखा है।

अब अयोध्या महात्म और भगवान शिव की चर्चा

बृजभूषण शरण सिंह का यह बयान तेजी से वायरल हुआ। सपा ने इस बयान के बहाने सीएम योगी पर तीखा हमला शुरू कर दिया था।इस बीच मंगलवार को एक बार फिर इसी मामले पर बृजभूषण शरण सिंह ने बयान दिया और पिछले बयान के लिए माफी भी मांग ली।बृजभूषण ने कहा कि मेरे मुंह से यह निकला था कि इसका निर्माण एक मुस्लिम ने कराया था। यह आधी अधूरी बात है।बृजभूषण ने अब कहा कि अयोध्या के माहत्म में यह बात आती है कि भगवान शिव ने पार्वती जी से चर्चा करते हुए कहा था कि राजरथ द्वार यानी उत्तर तरफ हनुमान जी विराजमान हैं। यानी जब भगवान शिव बताते हैं कि हनुमानगढ़ी अस्तित्व में है तो यह किसी का निर्माण कराया हुआ नहीं है।

गूगल पर फोड़ा ठीकरा

बृजभूषण शरण सिंह ने कहा कि एक घटना 1887 में घटती है।उस समय मुगल वंशज शिराजुद्दौला का शासन था,उससे पहले बिन कासिम ने राम मंदिर पर कब्जा कर लिया और मंदिर को तोड़ डाला था,उसी प्रकार लगातार मुस्लिम आक्रांताओं का हमला हनुमानगढ़ी पर भी होता रहा। मुस्लिम आक्रांता इस बात का प्रयास करते रहे कि हनुमानगढ़ी को भी ध्वस्त कर दिया जाए।तब वहां के नगा साधु ऐसा नहीं करने दिए,जब शिराजुद्दौला आए तो हनुमानगढ़ी में याचक के रूप में गए। इसका उन्हें लाभ हुआ। इस पर शिराजुद्दौला ने 52 बीघा जमीन मंदिर को दे दिया था। गूगल ने इसी को लिख दिया कि शिराजुद्दौला ने मंदिर का निर्माण कराया है।

मुख्यमंत्री की बातों को काटने का प्रश्न ही नहीं

बृजभूषण शरण सिंह ने कहा कि मुझसे पूछा गया था कि हनुमानगढ़ी की सीढ़ियों पर नमाज पढ़ी गई या नहीं। मैंने कहा था नहीं। हालांकि मुझे कहना चाहिए था सीढ़ियों पर नहीं पढ़ी गई,लेकिन परिसर में पढ़ी गई थी। बृजभूषण ने कहा कि मुख्यमंत्री जी ने जो कहा वह भी सच है,संतों ने जो कहा वह भी सही है,मैंने भी जो कहा वह भी सही था,मुझे पूरी बात कहनी चाहिए थी।मुझे कहना चाहिए था कि सीढ़ियों पर नमाज नहीं पढ़ी गई,लेकिन परिसर में पढ़ी गई थी। अगर मैंने पूरी बात कही होती तो इस तरह बवाल नहीं होता। बृजभूषण ने सफाई देते हुए यह भी कहा कि मुख्यमंत्री की बातों को काटने का कोई प्रश्न ही नहीं उठता है। ऐसी मेरी कोई भावना नहीं थी।

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