काठमांडू।नेपाल में आई विनाशकारी बाढ़ के बाद राहत और बचाव अभियान लगातार तीसरे दिन भी जारी है।इस प्राकृतिक आपदा में मरने वालों की संख्या 538 हो गई है।नेपाल पुलिस के मुताबिक अब तक मिले शव देश के आठ जिलों से बरामद किए गए हैं।इस दौरान सबसे ज्यादा मौतें चितवन में हुई हैं। यहां यह आंकड़ा 221 है,इसके बाद नवलपरासी ईस्ट में 134, गोरखा में 46, नुवाकोट में 37, धादिंग में 33, तनहूं में 28, नवलपरासी वेस्ट में 27 और रसुवा में 12 शव बरामद हुए हैं। नेपाल में लगभग 910 लोग अब भी लापता बताए जा रहे हैं। वहीं तिब्बत में 558 लोगों के लापता होने की जानकारी चीन की ओर से दी गई है।इस तरह नेपाल और चीन की सीमा के दोनों ओर कुल लापता लोगों की संख्या 1,468 हो गई है।
1,500 से ज्यादा लोगों को निकाला गया सुरक्षित
बचाव अभियान में नेपाल के लगभग 7,451 सुरक्षाकर्मी तैनात किए गए हैं,इनमें 2,391 नेपाल आर्मी के जवान शामिल हैं।नेपाल पुलिस के मुताबिक हेलीकॉप्टर के जरिए 50 विदेशी नागरिकों समेत 796 लोगों को रेस्क्यू किया गया है। वहीं 796 लोगों को सड़क मार्ग से सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया।रेस्क्यू टीम मलबे में दबे लोगों की तलाश के लिए भारी मशीनों,स्निफर डॉग्स,ड्रोन और ग्राउंड टीमों का इस्तेमाल कर रही है।अस्पतालों में परिजन अपने लापता रिश्तेदारों की जानकारी के लिए रेस्क्यू किए गए लोगों की लिस्ट और तस्वीरें देख रहे हैं।
ग्लेशियर टूटने से आई विनाशकारी बाढ़
इस विनाशकारी बाढ की शुरुआत नेपाल-तिब्बत सीमा के पास बर्फ और चट्टानों के बड़े भूस्खलन और ग्लेशियर के ढहने से हुई।भारी मात्रा में पानी,मिट्टी और मलबा ल्हेंडे नदी में पहुंचा और इसके बाद भोटे कोशी और त्रिशूली नदी में बाढ़ आ गई। अमेरिकी जियोलॉजिकल सर्वे के मुताबिक जिस घटना को शुरुआत में 4.4 तीव्रता के भूकंप के तौर पर रिपोर्ट किया गया था,वह असल में ग्लेशियर के ढहने और मलबे के बहाव के कारण हुई थी।
नए खतरे की चेतावनी,दो झीलों से बढ़ा जोखिम
नेपाल और चीन ने हिमालयी क्षेत्र में नए सिरे से बाढ़ का खतरा जताया है।सीमा के दोनों ओर बनी दो नई झीलों के टूटने की आशंका से खतरा बढ़ गया है।चीनी अधिकारियों के मुताबिक एक नई बैरियर झील में करीब 20 लाख घन मीटर पानी जमा हो चुका है।अगले तीन दिनों में इसमें करीब 30 लाख घन मीटर और पानी आने की आशंका है।नेपाल के मौसम विभाग ने भोटे कोशी और त्रिशूली नदियों के किनारे रहने वाले लोगों को सतर्क रहने और नदी किनारे जाने से बचने की सलाह दी है।
84 भारतीय नागरिकों को किया गया रेस्क्यू
भारत ने भी राहत और बचाव अभियान में मदद तेज कर दी है।विदेश मंत्रालय के मुताबिक नेपाल में 84 भारतीय नागरिकों को सुरक्षित निकाला गया है,इनमें त्रिशूली-1 हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट में काम करने वाले 63 कर्मचारी और तमिलनाडु के 21 लोग शामिल हैं।भारत ने नेपाल के लिए अतिरिक्त 37.5 टन राहत सामग्री,दवाइयां और भोजन के पैकेट भेजे हैं।इसके साथ बुधवार से भेजी गई कुल मानवीय सहायता 47.5 टन हो गई है।
सड़क और पुलों को भारी नुकसान
विनाशकारी बाढ़ से नेपाल का इंफ्रास्ट्रक्चर भी बुरी तरह प्रभावित हुआ है।अधिकारियों के मुताबिक 35 मोटरेबल पुल, 45 सस्पेंशन ब्रिज और 40 किलोमीटर सड़कें क्षतिग्रस्त हुई हैं। इससे प्रभावित इलाकों तक राहत पहुंचाने और बचाव अभियान चलाने में मुश्किलें बढ़ गई हैं।अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी नेपाल को हरसंभव मदद की पेशकश की है। ट्रंप ने कहा कि अमेरिका सहायता भेज रहा है।अधिकारियों के मुताबिक लगभग 50 से 60 अमेरिकी नागरिक भी इस आपदा से प्रभावित क्षेत्र में फंसे हुए हैं।