नेपाल त्रासदी के बाद सड़क धंसने से काठमांडू का रास्ता बंद, यूपी से जाने वाले फंसे हजारों वाहन
नेपाल त्रासदी के बाद सड़क धंसने से काठमांडू का रास्ता बंद, यूपी से जाने वाले फंसे हजारों वाहन

03 Sep 2026 |   22



 

कुशीनगर।नेपाल में आई त्रसादी का असर देश की मुख्य यातायात व्यवस्था पर विकराल रूप में दिखाई दे रहा है। त्रिशूली नदी प्रचंड उफान पर है,इससे पृथ्वी राजमार्ग के कृष्णभीर क्षेत्र में भारी क्षति पहुंची है।मलेखु सड़क खंड के धंस जाने से काठमांडू को पश्चिमी और पूर्वी नेपाल से जोड़ने वाला मुख्य राजमार्ग पूरी तरह ठप हो गया है,इससे हजारों वाहनों का पहिया थम गया है।

मुख्य राजमार्ग क्षतिग्रस्त होने के कारण अब यात्रियों और मालवाहक वाहनों को तीन वैकल्पिक मार्गों से निकाला जा रहा है।पहला विकल्प हेटौंडा-दामन-पालुंग-नौबिसे होकर जाने वाला त्रिभुवन राजपथ है,जहां अत्यधिक मोड़ होने से सीमित क्षमता की यात्री बसें चल पा रही हैं।दूसरा मार्ग हेटौंडा-भीमफेदी-कुलेखानी होकर काठमांडू जाता है, जो सबसे संकरा होने से केवल हल्के निजी वाहनों के लिए उपयुक्त है।तीसरे विकल्प के रूप में हेटौंडा-मकवानपुरगढ़ी-ठिंगन-छपेली होते हुए ललितपुर पहुंचने वाले मार्ग है,जहां बड़े वाहनों का संचालन भी हो रहा है।

नेपाल के रसुवा जिले में आई त्रसादी से जिले के 12 प्रमुख स्थान टिमुरे,रसुवागढ़ी,स्याफ्रूबेंसी,मैलुंग,बेट्रावती,धुन्चे, पैरेबेसी,खल्ली बस्ती,सोले,शान्तिबाजार,सल्लेटर और त्रिशूली क्षेत्र सर्वाधिक प्रभावित हैं।बाढ़ के उफान और मलबे से टिमुरे, रसुवागढ़ी और स्याफ्रूबेंसी समेत कई इलाकों में ढांचागत संरचनाओं को भारी नुकसान पहुंचा है।

धादिंग जिले के मलेखु स्थित शीतल बाजार क्षेत्र में बाढ़ के दबाव से लगभग 60 मीटर सड़क का हिस्सा पूरी तरह धंस गया है।कृष्णभीर और मलेखु के समीप परेवाभीर में सड़क धंसने से यह पूरा सड़क खंड पूरी तरह अवरुद्ध पड़ा है। इसके अलावा हेटौंडा से कुलेखानी और चित्लांग होते हुए थानकोट पहुंचने वाले रास्ते का उपयोग भी हल्के वाहनों के लिए वैकल्पिक रूप में किया जा रहा है। नेपाल में आवागमन बाधित होने से गैस समेत अन्य आवश्यक वस्तओं की किल्लत हो गई है।

नेपाल में आई त्रसादी और भूस्खलन के बाद जिले की खुली अंतरराष्ट्रीय सीमा से जुड़े हजारों परिवारों के सामने अपनों की सुरक्षा को लेकर एक बड़ी चिंता खड़ी हो गई है।नेपाल के आपदा प्रभावित इलाकों में मौजूद रिश्तेदारों,बेटी-दामाद और कारोबार के सिलसिले में गए लोगों से संपर्क न हो पाने के कारण सीमावर्ती इलाकों में परिजनों की रातें बेचैनी में बीत रही हैं। सड़कें टूटने, कई स्थानों पर यातायात ठप होने और बिजली-नेटवर्क सेवा ध्वस्त होने से संवाद का हर जरिया बंद पड़ गया है।

महराजगंज और नेपाल का रिश्ता केवल दो देशों की सीमा भर का नहीं है,बल्कि यहां का ताना-बाना पारिवारिक,सांस्कृतिक और सामाजिक संबंधों से बुना हुआ है।जिले के ठूठीबारी, बरगदवा,निचलौल,पारसमलिक,परसौनी,नौतनवा और सोनौली समेत तमाम सीमावर्ती कस्बों और गांवों के अनगिनत परिवारों की रिश्तेदारी नेपाल के तराई से लेकर पहाड़ी इलाकों तक है।नेपाल में त्रसादी की खबर आने के बाद से इन गांवों के घरों में चूल्हे तक ठंडे पड़ गए हैं।लोग लगातार फोन मिला रहे हैं,लेकिन उधर से नेटवर्क कवरेज से बाहर या स्विच ऑफ का संदेश ही मिल रहा है।

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