सपा के 3 बागी विधायकों के शामिल होने से भाजपा में ठाकुर बनाम ब्राह्मण की छिड़ेगी रार
सपा के 3 बागी विधायकों के शामिल होने से भाजपा में ठाकुर बनाम ब्राह्मण की छिड़ेगी रार

13 Oct 2026 |   56



 

धनंजय सिंह।उत्तर प्रदेश में 2027 में होने वाले विधानसभा चुनाव को लेकर अभी से सभी पार्टियां तैयारी में जुट गई हैं। विधानसभा चुनाव को लेकर समीकरण भी साधे जाने लगे हैं। समाजवादी पार्टी के तीन बागी विधायक राकेश प्रताप सिंह,विधायक अभय सिंह और विनोद चतुर्वेदी 14 अक्टूबर को भारतीय जनता पार्टी में शामिल होंगे। विधायक राकेश प्रताप सिंह,अभय सिंह और विनोद चतुर्वेदी की भाजपा में  से 2027 के चुनाव से पहले अवध और बुंदेलखंड का सियासी पारा चढ़ गया है। बागियों को साधने के चक्कर में भाजपा के सामने अपनी पारंपरिक सीटों पर ठाकुर बनाम ब्राह्मण के अंदरूनी असंतोष को संभालने और सामाजिक संतुलन बनाए रखने की बड़ी चुनौती खड़ी हो गई है।

राकेश प्रताप सिंह अमेठी जिले की गौरीगंज विधानसभा से विधायक हैं।अभय सिंह अयोध्या जिले की गोसाईंगंज विधानसभा से विधायक हैं, जबकि विनोद चतुर्वेदी जालौन जिले की कालपी विधानसभा से विधायक हैं।इन नेताओं की भाजपा में जॉइनिंग के ऐलान के साथ ही यह सवाल खड़ा हो गया है कि क्या भाजपा इन्हें इनकी मौजूदा सीटों से ही 2027 के चुनाव में उतारेगी,क्या भाजपा ने इनसे दोबारा टिकट देने का वादा किया है।

अगर गौरीगंज से राकेश प्रताप सिंह और गोसाईंगंज से अभय सिंह को भाजपा से टिकट मिलता है,तो 2022 में भाजपा से चुनाव लड़ चुके दो बड़े ब्राह्मण चेहरों का क्या होगा।गौरीगंज से पूर्व प्रत्याशी चंद्र प्रकाश मिश्र मटियारी और गोसाईंगंज से पूर्व विधायक इंद्र प्रताप तिवारी उर्फ खब्बू तिवारी भाजपा के कद्दावर नेता माने जाते हैं,ऐसे में बड़ा सवाल यह है कि क्या ये दोनों नेता पार्टी में बने रहेंगे या फिर राजनीतिक पाला बदलकर दो-दो हाथ करेंगे।

भाजपा में शामिल होने जा रहे गौरीगंज विधायक राकेश प्रताप सिंह समाजवादी पार्टी के टिकट पर तीन बार से विधायक हैं। राकेश प्रताप सिंह 2012 से लगातार इस सीट से जीतते आ रहे हैं। फरवरी 2024 में हुए राज्यसभा चुनाव के दौरान राकेश प्रताप सिंह सपा से बगावत कर भाजपा उम्मीदवार के पक्ष में क्रॉस वोटिंग की थी।

अब राकेश प्रताप सिंह आधिकारिक तौर पर भाजपा का दामन थामने जा रहे हैं।सदस्यता वे अमेठी में लेंगे।गौरीगंज में आयोजित एक कार्यक्रम में भाजपा की राष्ट्रीय महासचिव स्मृति ईरानी और प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी राकेश प्रताप सिंह को पार्टी में शामिल कराएंगे,लेकिन सवाल यही है कि क्या भाजपा 2027 में राकेश प्रताप सिंह को गौरीगंज से टिकट देगी।

अगर भाजपा राकेश प्रताप सिंह को उम्मीदवार बनाती है, तो 2022 में भाजपा प्रत्याशी रहे चंद्र प्रकाश मिश्र मटियारी का रुख क्या होगा।चंद्र प्रकाश मिश्र मटियारी जिले के बड़े ब्राह्मण नेता हैं और अमेठी में उनका अपना जनाधार है।बसपा सरकार में मंत्री रह चुके चंद्र प्रकाश मिश्र मटियारी को स्मृति ईरानी ही भाजपा में लेकर आई थीं और उन्हें स्मृति की कोर टीम का अहम चेहरा माना जाता है।

पार्टी में शामिल होने मात्र से टिकट नहीं मिल जाता है। उम्मीदवारी का दावा कोई भी कर सकता है। चंद्र प्रकाश मिश्र मटियारी भी टिकट का दावा कर रहे हैं। चंद्र प्रकाश मिश्र मटियारी 2047 के मिशन को लेकर चल रहे हैं।पिछली बार भाजपा से चुनाव लड़े थे और इस बार भी तैयारी पूरी है। वैसे टिकट का फैसला भाजपा और संगठन करता है।

अयोध्या जिले की गोसाईंगंज विधानसभा से विधायक अभय सिंह 2012 में पहली बार सपा के टिकट पर विधानसभा पहुंचे थे। 2017 के चुनाव में अभय सिंह को भाजपा के दिग्गज नेता इंद्र प्रताप तिवारी उर्फ खब्बू तिवारी ने हराया था। 2022 में अभय सिंह दूसरी बार सपा के टिकट पर जीते,लेकिन 2024 के राज्यसभा चुनाव में अभय सिंह ने पाला बदल लिया।अब अभय सिंह 14 अक्टूबर को आधिकारिक रूप से भाजपा में शामिल होने जा रहे हैं।

अयोध्या की सियासत में अभय सिंह और खब्बू तिवारी की सियासी अदावत जगजाहिर है।अभय सिंह और खब्बू तिवारी ही अपने-अपने इलाके में बाहुबली नेता के रूप में जाने जाते हैं।खब्बू तिवारी और अभय सिंह के बीच लंबे समय से चली आ रही प्रतिद्वंद्विता के चलते क्षेत्र में ब्राह्मण बनाम ठाकुर की सियासत हमेशा गर्म रहती है।अभय सिंह जहां ठाकुर समाज का प्रतिनिधित्व करते हैं तो वहीं खब्बू तिवारी क्षेत्र में ब्राह्मण सियासत का बड़ा चेहरा हैं।

सपा के बागी विधायक विनोद चतुर्वेदी भी भाजपा में शामिल हो रहे हैं।विनोद चतुर्वेदी का सियासी सफर कांग्रेस से शुरू हुआ था। विनोद चतुर्वेदी लंबे समय तक जालौन जिला कांग्रेस के अध्यक्ष रहे और प्रदेश संगठन में भी अहम भूमिका निभाई। 2007 में विनोद चतुर्वेदी पहली बार कांग्रेस के टिकट पर विधायक बने थे। 2021 में कांग्रेस छोड़कर सपा में शामिल हुए विनोद चतुर्वेदी ने 2022 के चुनाव में कालपी सीट से जीत हासिल की। विनोद चतुर्वेदी ने निषाद पार्टी (बीजेपी गठबंधन) के प्रत्याशी छोटे सिंह को 2,816 वोटों के मामूली अंतर से हराया था।बुंदेलखंड में पुराने कांग्रेसी रहे चतुर्वेदी ने 2024 के राज्यसभा चुनाव में सपा से बगावत कर भाजपा का समर्थन किया था।

कालपी विधानसभा में विनोद चतुर्वेदी की सियासी लड़ाई हमेशा ठाकुर नेताओं से ही रही है। 2022 में निषाद पार्टी के छोटे सिंह से मुकाबला हुआ,तो इससे पहले 2017 में भाजपा के नरेंद्र पाल सिंह यहां से विधायक रहे थे। कालपी में पारंपरिक रूप से ठाकुर नेताओं का दबदबा रहा है,लेकिन विनोद चतुर्वेदी के मैदान में रहने से यहां की सियासत अक्सर ब्राह्मण बनाम ठाकुर के ध्रुवीकरण के इर्द-गिर्द घूमती है।

सपा के बागी विधायक अभय सिंह,राकेश प्रताप सिंह और विनोद चतुर्वेदी के भाजपा में शामिल होने से भाजपा का अंदरूनी सियासी गणित बिगड़ने का खतरा पैदा हो गया है। गोसाईंगंज और गौरीगंज में सपा के इन बागी ठाकुर चेहरों का सीधा मुकाबला भाजपा के ही स्थानीय ब्राह्मण नेताओं से रहा है।

अयोध्या और अवध क्षेत्र में खब्बू तिवारी का अच्छा-खासा असर माना जाता है।ऐसे में अगर भाजपा अभय सिंह को गोसाईंगंज विधानसभा से टिकट देती है तो खब्बू तिवारी की नाराजगी झेलना आसान नहीं होगा।ठीक यही स्थिति गौरीगंज विधानसभा में भी है,जहां चंद्र प्रकाश मिश्र मटियारी का टिकट कटने से भाजपा के अंदर असंतोष पनप सकता है।

अगर टिकट कटने की सूरत में खब्बू तिवारी या चंद्र प्रकाश मिश्र मटियारी जैसे नेताओं ने पाला बदलकर समाजवादी पार्टी का रुख कर लिया तो भाजपा को केवल दो सीटों का ही नुकसान नहीं होगा,बल्कि पूरे अवध क्षेत्र में भाजपा का नरेटिव प्रभावित हो सकता है,इससे सपा के उस आरोप को बल मिलेगा कि भाजपा में ब्राह्मणों की अनदेखी कर ठाकुरों को तरजीह दी जा रही है।दूसरी ओर कालपी में विनोद चतुर्वेदी के आने से भाजपा के कैडर ठाकुर वोट बैंक को साधे रखना भी एक चुनौती होगा।

भाजपा के सामने पहले से ही ब्राह्मण मतदाताओं को साधकर रखने की चुनौती रही है,ऐसे में सवाल उठता है कि क्या भाजपा इन नए नेताओं को किसी दूसरी सीट से लड़ाएगी या फिर पुराने ब्राह्मण चेहरों को अन्य जगहों पर समायोजित करेगी।

अमेठी के समीकरण को देखें तो जिले की 5 विधानसभा सीटों में से भाजपा 2 पर ठाकुर और 2 सुरक्षित सीटों पर दलित प्रत्याशी उतारती रही है,जबकि गौरीगंज सीट पर ब्राह्मण चेहरे को मौका मिलता रहा है।अगर गौरीगंज में चंद्र प्रकाश मिश्र मटियारी का टिकट कटता है तो पूरे जिले का सामाजिक संतुलन प्रभावित हो सकता है।कमोबेश यही हाल अयोध्या का है,जहां पूर्व विधायक पवन पांडेय सपा से पहले ही मजबूती से दावेदारी ठोक रहे हैं,ऐसे में अगर भाजपा खब्बू तिवारी को दरकिनार करती है, तो जिले के ब्राह्मण मतदाताओं को साधना मुश्किल हो सकता है।सपा के बागियों को साथ लाकर कुनबा बढ़ा रही भाजपा के लिए सबसे बड़ी परीक्षा यह होगी कि क्षेत्र में ब्राह्मण और ठाकुर वोटों के बीच संतुलन कैसे कायम रखती है।

More news