नई दिल्ली।सोना अपने हाई प्राइस से 40000 रुपये तक सस्ता बिक रहा है,चांदी की कीमत 2.25 लाख रुपये से अधिक गिर चुकी है। सोने-चांदी के इस क्रैश का कनेक्शन चीन से कनेक्ट हो रहा है।
2 लाख से अधिक गिर चुकी है चांदी
चांदी ऑल टाइम हाई से 2 लाख 19 हजार से अधिक गिर चुकी है,जिस तरह से दाम गिर रहे हैं,ये सवाल वाजिब है कि सोने-चांदी की कीमत में इस गिरावट के पीछे कौन जिम्मेदार है।आखिर सोना-चांदी अचानक इतना क्यों सस्ता होने लगा। अक्सर युद्ध और वैश्विक संकट के पीछे महंगा होने वाला सोना इस बार उल्टी चाल चल रहा है।
कितना सस्ता हो चुका है सोना-चांदी
इंटरनेशनल मार्केट में सोने में बड़ी गिरावट आई है।सोना 145 डॉलर के बड़े फॉल के साथ गिरकर 3,875.84 डॉलर प्रति औंस पर पहुंच गया। MCX पर सोने का दाम 138419 रुपये प्रति 10 ग्राम पर पहुंच गया है।घरेलू सर्राफा बाजार में 24 कैरेट वाला सोना 1.40 लाख रुपये पर पहुंच गया।इंडिया बुलियन एंड ज्वैलर्स एसोसिएशन की वेबसाइट पर जारी रेटलिस्ट के मुताबिक 24 कैरेट प्योरिटी वाला सोना 1,40,054 रुपये/10 ग्राम ,22 कैरेट प्योरिटी वाला गोल्ड 1,28,289 रुपये/10 ग्राम,18 कैरेट प्योरिटी वाला गोल्ड 1,05,041 रुपये/10 ग्राम,14 कैरेट शुद्धता वाला सोना 81,932 रुपये/10 ग्राम। 1 किलो चांदी 1,81,344 रुपये पर पहुंच गया।
जुलाई के बाद से निचले स्तर पर सोना
गोल्ड की स्पॉट कीमत जुलाई के बाद से सबसे निचले स्तर पर पहुंच चुकी है।यूएस गोल्ड फ्यूचर के दिसंबर डिलीवरी वाला गोल्ड गिरकर 3991.10 डॉलर प्रति औंस पर पहुंच गया है। भारत में 29 जनवरी 2026 को सोना अपने पीक हाई पर था। 24 कैरेट शुद्धता वाला गोल्ड 1.79 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम पर पहुंच गया था और 1 किलो चांदी 3.89 लाख रुपये पर थी।
सोने-चांदी में गिरावट के पीछे चीन का हाथ
सोने-चांदी की कीमत में इस गिरावट को लेकर हर कोई हैरान है।स्विस वेल्थ मैनेंजमेंट फर्म के एक्सपर्ट जुलियंस बेयर की माने तो सोने की कीमत में इस गिरावट के पीछे चीन का हाथ हो सकता है।चीन के निवेशक बड़ी मात्रा में सोना बेचकर कैश इकट्ठा कर रहे हैं।चीन में ऑफशोर कैपिटल पर सरकार की सख्ती के बीच निवेशक सोने पर होल्डिंग कम कर रहे हैं।चीन की सरकार ने ऑफशोर ट्रस्ट्स पर 20 फीसदी का टैक्स लगा दिया है।पहले सिर्फ विदेशी कंपनियां इसके दायरे में थी, लेकिन अब आम निवेशकों को भी इस दायरे में शामिल कर दिया है।
चीन सरकार ने सख्त किए नियम
चीनी सरकार ने घरेलू निवेशकों को बढ़ावा देने और पूंजी देश से बाहर जाने से रोकने के लिए क्रॉस बॉर्डर स्टॉक ट्रेडिंग पर भी पाबंदी लगा दी है,जिसका असर सोने के निवेश पर दिखने लगा है।चीन सरकार की सख्त नीतियों का असर सोने के दाम पर पड़ रहा है।चीनी निवेशकों की इस बिकवाली से अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की कीमतों पर और दबाव पड़ सकता है, जिससे कीमत और नीचे जा सकती है।
सिर्फ चीन ही नहीं है सोने की गिरावट के लिए जिम्मेदार
सोने में गिरावट के लिए सारी जिम्मेदारी सोने की नहीं है. अमेरिकी बॉन्ड पर बढ़ते ब्याज दर निवेशकों को आकर्षित कर रहे हैं,चूंकि गोल्ड पर कोई इंटरेस्ट नहीं मिलता है, इसलिए निवेशक सोने के बजाए यूएस बॉन्ड में निवेश बढ़ा रहे हैं।बॉन्ड यील्ड 5 फीसदी तक पहुंच चुका है।बॉन्ड पर बेहतर रिटर्न सोने पर दबाव को बढ़ा रहा है।
कच्चे तेल ने सोने को किया बेहाल
अमेरिका और ईरान में तनाव के बाद से कच्चे तेल के संकट का असर भी सोने की कीमत पर पड़ा है।कच्चे तेल की कीमत 69 डॉलर से बढ़कर अब 115 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच चुकी है।महंगा तेल महंगाई को बढ़ा रहा है।महंगाई की वजह से केंद्रीय बैंक ब्याज दर बढ़ा रहे हैं,ब्याज बढ़ने से सोने पर दबाव बढ़ता है,महंगाई के चलते लोग सोना खरीदने से परहेज करते हैं।मांग घटती है और कीमतों में गिरावट आने लगती है। सोने के साथ इस बार ऐसा ही कुछ हो रहा है।
क्या लौटेगी सोने की चमक
सोने के गिरते दाम के बाद सवाल है कि क्या कीमतों में फिर से तेजी लौटेगी,क्या ग्लोबल मार्केट में 5500 डॉलर प्रति औंस के आंकड़े को पार करने वाला गोल्ड फिर से इस लेवल पर पहुंच पाएगा।अधिकांश जानकार यहीं मानते हैं कि भले ही सोना अभी गिर रहा है,लेकिन इसका लॉग टर्म आउटलुक पॉजिटिव बना हुआ है।
साल 2027 में सोना फिर से चमकेगा
जुलियस बेयर भी मानते हैं कि सरकार पर बढ़ते कर्ज,ब्याज के बढ़ते बोझ और केंद्रीय बैंकों की ओर से बढ़ रही खरीदारी के चलते सोने में फिर से चमक लौटेगी। UBS के एनालिस्ट Giovanni Staunovo के मुताबिक साल 2027 में सोना फिर से 5000 डॉलर के आंकड़े पर पहुंच सकता है। अमेरिकी फेडरल की ओर से ब्याज दरों में कटौती के बाद सोने में फिर से निवेश बढ़ेगा और कीमतों में तेजी लौटेगी।