गोरखपुर।सुपर अल नीनो प्रशांत महासागर के भूमध्यरेखीय क्षेत्र में समुद्र की सतह का तापमान बहुत अधिक बढ़ जाने की घटना है।इसके प्रभाव से वैश्विक मानसूनी हवाएं कमजोर हो जाती हैं।सुपर अल नीनो से सबसे बड़ा खतरा वर्तमान में खरीफ की मुख्य फसलों धान और मक्का पर मंडरा सकता है, क्योंकि इससे बारिश कम हो सकती है या सूखे की स्थिति बन सकती है।
कृषि विभाग ने शुरू की जागरूकता मुहिम
किसानों को इस समस्या से निजात दिलाने के क्रम में योगी सरकार कई पहल कर रही है,तो जिले में कृषि विभाग इसको लेकर जागरूकता अभियान के साथ सूचना के माध्यमों का उपयोग कर रहा है।सुपर अल नीनो के प्रभाव में कम बारिश या सूखा पड़ने की आशंका को देखते हुए किसानों को जागरूक करने का क्रम चल रहा है।किसानों की आय कम न होने पाए,इसके लिए कृषि विभाग ने मुहिम शुरू की है। विभाग की तरफ से किसानों को कम पानी की खपत वाली फसलों की पैदावार करने की सलाह दी जा रही है।
फसल बीमा और धान की सीधी बुआई की सलाह
कृषि विभाग की तरफ से सभी किसानों से यह आग्रह भी किया जा रहा है कि वे किसी भी संभावित नुकसान से बचने के लिए प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत अपनी फसलों का बीमा अवश्य कराएं।गोरखपुर जिला कृषि अधिकारी डॉक्टर राजमंगल चौधरी के मुताबिक अल नीनो के प्रतिकूल प्रभाव से बचने और फसलों की सुरक्षा के लिए किसानों को भी अपने स्तर पर तैयारियां करने के लिए सुझाव दिए जा रहे हैं,जैसे किसान कम समय वाली फसलों को चुनें, जहां पानी की पर्याप्त मात्रा में उपलब्धता हो वहीं धान की बुआई करें,धान की फसल डायरेक्ट सीडेड राइस या धान की सीधी बुआई पद्धति से लगाएं,इससे 30 से 40 प्रतिशत तक पानी की बचत होती है।
मोटे अनाज और आधुनिक सिंचाई पर ज़ोर
जहां पानी की पर्याप्त उपलब्धता नहीं है,वहां कम पानी और कम समय में पकने वाली फसल अरहर,मूंग,उर्द,तिलहन,तिल, मूंगफली और मोटे अनाज को प्राथमिकता दे सकते हैं।जिला कृषि अधिकारी के मुताबिक किसानों को कृषि विज्ञान केंद्रों या राज्य कृषि विभाग की सलाह पर सूखे के प्रति उन्नत बीजों का चयन करने के साथ ही ड्रिप या स्प्रिंकलर सिंचाई का उपयोग करना वर्तमान समय के अनुकूल होगा।खेत का पानी खेत में रोकने और वर्षा की प्रत्येक बूंद सहेजने के लिए खेतों की मेड़बंदी मजबूत करने की भी जरूरत है।मल्चिंग मिट्टी की नमी को उड़ने से बचाने के लिए फसलों के बीच में पुआल या सूखी पत्तियों की परत को बिछाना लाभप्रद होगा।
पूर्वांचल में मानसून पिछड़ने से बढ़ी चिंता
जिला कृषि अधिकारी राजमंगल चौधरी ने कहा है कि किसानों को इसके अलावा खाद,बीज आदि की खरीद के लिए किसान क्रेडिट कार्ड का उपयोग करना चाहिए,इससे किसी भी आपातकालीन स्थिति में नकदी की कमी नहीं होगी।मौसम वैज्ञानिक कैलाश पांडेय ने बताया है कि पूरा पूर्वांचल मानसून में काफी पिछड़ा हुआ है।अभी इसके और भी लेट होने की संभावना है,ऐसी स्थिति में आम नागरिक तो जैसे-तैसे अपना जीवन काट रहा है, लेकिन किसानों के लिए अपनी फसल अच्छी काटना बिना पानी के कठिनाई भरा होगा,इसलिए कृषि विभाग के सुझाव पर भी किसानों को अमल करना चाहिए। यह बड़े कैंपेन का भी विषय है,जिसे ग्राम पंचायत स्तर पर संचालित करते हुए किसानों को लाभ पहुंचाना चाहिए।