विश्व की चुनौतियों के बीच भारत की अर्थव्यवस्था दिखाएगी दम,अब 7.5 फीसदी बढ़ोतरी का अनुमान
विश्व की चुनौतियों के बीच भारत की अर्थव्यवस्था दिखाएगी दम,अब 7.5 फीसदी बढ़ोतरी का अनुमान

13 Oct 2026 |   26



 

नई दिल्ली।फिच सॉल्यूशंस की इकाई बीएमआई ने भारत के लिए वित्त वर्ष 27 की बढ़ोतरी का अनुमान पहले के 6.8 प्रतिशत से बढ़ाकर 7.5 प्रतिशत कर दिया है। साथ ही दूसरी तिमाही (जुलाई-सितंबर) के लिए 8.3 प्रतिशत बढ़ोतरी का अनुमान जताया गया है।बीएम‌आई ने इस बढ़ोतरी के लिए लगातार हो रही औद्योगिक वृद्धि का हवाला दिया है।बीएम‌आई ने तेल की ऊंची कीमतों,महंगाई की चिंताओं के कारण नीतिगत दर में संभावित बढ़ोतरी और मजबूत होते अल-नीनो के संबंध में चेतावनी भी दी है।साथ ही वित्त वर्ष 28 (अप्रैल 2027 से मार्च 2028) के लिए बढ़ोतरी का अनुमान 6.5 प्रतिशत से घटाकर 6.3 प्रतिशत कर दिया है।

बीएमआई ने भारत के लिए अपने हालिया नजरिये में कहा, कम अंतराल वाले आंकड़ों के सूचकांक जोरदार वृद्धि की ओर इशारा कर रहे हैं।हमारा जीडीपी ट्रैकर वित्त वर्ष 2026-27 की दृसरी तिमाही (जुलाई-सितंबर) में लगभग 8.3 प्रतिशत की वृद्धि का संकेत दे रहा है।

बीएम‌आई की रिपोर्ट में बताया गया है कि औद्योगिक उत्पादन की बढ़ोतरी पहली तिमाही (अप्रैल-जून) के 6.2 प्रतिशत से बढ़कर जुलाई-अगस्त में 7.7 प्रतिशत हो गई है। इसके अलावा वाहनों के पंजीकरण में भी बढ़ोतरी हुई है। पहली तिमाही में यह 16 प्रतिशत थी, जो दूसरी तिमाही (जुलाई-सितंबर) में बढ़कर 26 प्रतिशत हो गई।

देश की बढ़ोतरी के अनुमान में यह बढ़ोतरी भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) और कई वैश्विक एजेंसियों द्वारा किए गए इसी तरह के बदलावों के बाद सामने आई है। चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही (अप्रैल-जून) में अर्थव्यवस्था ने 7.8 प्रतिशत की उम्मीद से बेहतर वृद्धि दर्ज की थी।

हाल ही में आरबीआई ने वित्त वर्ष 27 के लिए वृद्धि के अपने अनुमान को 6.7 प्रतिशत से बढ़ाकर 7.1 प्रतिशत किया था। विश्व बैंक ने भी चालू वित्त वर्ष 2026-27 के लिए भारत की वृद्धि का अनुमान पहले के 6.6 प्रतिशत से बढ़ाकर 7.1 प्रतिशत कर दिया है।

वृद्धि बढ़ाने वाले कारकों के संबंध में रिपोर्ट में कहा गया है कि रिलायंस,अदाणी,एडब्ल्यूएस और माइक्रोसॉफ्ट द्वारा आर्टिफिशल इंटेलिजेंस के नियोजित निवेश और साथ ही 2025 के शांति अधिनियम के तहत डेटा केंद्रों के लिए बिजली क्षमता बढ़ाने की सरकारी कोशिशों से जीडीपी को लंबे समय तक बढ़ावा मिलने के आसार हैं क्योंकि ये बुनियादी ढांचे के निवेश की प्रतिबद्धताएं लंबे समय की हैं।

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