वसूली के आरोप से गिरफ्तारी तक गरमाया मामला:भोजनालय संचालक ने SI पर 15 हजार मासिक मांगने का लगाया आरोप,गिरफ्तारी के पुलिस रिकॉर्ड और वायरल CCTV को लेकर उठे सवाल
वसूली के आरोप से गिरफ्तारी तक गरमाया मामला:भोजनालय संचालक ने SI पर 15 हजार मासिक मांगने का लगाया आरोप,गिरफ्तारी के पुलिस रिकॉर्ड और वायरल CCTV को लेकर उठे सवाल

24 Sep 2026 |   23



ब्यूरो तुर्रम सिंह 

एटा।रिजोर थाना पुलिस की कार्रवाई को लेकर एक भोजनालय संचालक द्वारा लगाए गए गंभीर आरोपों ने पुलिस कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं।पीड़ित प्रवीन कुमार ने उपनिरीक्षक अमीर अहमद पर कथित रूप से 15 हजार रुपए प्रतिमाह मांगने का आरोप लगाया है।पीड़ित का दावा है कि रकम देने से इनकार करने के बाद पुलिसकर्मी उसे उसके भोजनालय से थाने ले गए।मामले को लेकर पीड़ित ने वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक कार्यालय पहुंचकर पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच और दोषी पाए जाने वाले पुलिसकर्मियों के विरुद्ध कार्रवाई की मांग की है।

पुलिस रिकॉर्ड में बिजलीघर के पास गिरफ्तारी का उल्लेख

पीड़ित प्रवीन कुमार के आरोपों के विपरीत पुलिस अभिलेखों में गिरफ्तारी का अलग घटनाक्रम दर्ज होने की बात सामने आ रही है। मिली जानकारी के अनुसार पुलिस रिकॉर्ड में प्रवीन कुमार की गिरफ्तारी दोपहर करीब तीन बजे बिजलीघर के पास दर्शाई गई है। साथ ही गिरफ्तारी के दौरान शराब बरामदगी का भी उल्लेख किया गया है।यही बिंदु अब पूरे मामले में महत्वपूर्ण सवाल बनकर सामने आया है।

वायरल CCTV ने बढ़ाया विवाद

मामले से जुड़ा एक CCTV फुटेज सोशल मीडिया पर वायरल होने का दावा किया जा रहा है।पीड़ित पक्ष का कहना है कि CCTV में दिखाई देने वाली परिस्थितियां पुलिस रिकॉर्ड में दर्ज गिरफ्तारी के घटनाक्रम से अलग प्रतीत होती हैं। यदि वायरल फुटेज की प्रामाणिकता और समय की पुष्टि होती है, तो पुलिस रिकॉर्ड में दर्ज घटनाक्रम और वास्तविक घटनास्थल के बीच अंतर की जांच आवश्यक हो सकती है।हालांकि, वायरल CCTV की मूल रिकॉर्डिंग, उसकी तारीख-समय की तकनीकी पुष्टि और फुटेज की निरंतरता की स्वतंत्र रूप से पुष्टि अभी नहीं हुई है।

आरोप सही हैं तो गंभीर मामला,जांच जरूरी

एक ओर पुलिस अभिलेखों में शराब बरामदगी और गिरफ्तारी का उल्लेख है,वहीं दूसरी ओर भोजनालय संचालक प्रवीन कुमार पुलिसकर्मी पर अवैध वसूली की मांग और उसके बाद जबरन थाने ले जाने का आरोप लगा रहा है। दोनों पक्षों के दावों के बीच उत्पन्न विरोधाभास को देखते हुए मामले की निष्पक्ष जांच महत्वपूर्ण हो जाती है।जांच में CCTV फुटेज, पुलिस की जीडी, गिरफ्तारी मेमो, बरामदगी मेमो, मौके की लोकेशन, संबंधित पुलिसकर्मियों की ड्यूटी और मोबाइल/अन्य उपलब्ध तकनीकी साक्ष्यों का परीक्षण किया जाए तो घटनाक्रम की वास्तविकता स्पष्ट हो सकती है।पीड़ित के आरोप अभी आरोप मात्र हैं और उनकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। वहीं पुलिस रिकॉर्ड में दर्ज बरामदगी और गिरफ्तारी भी जांच के दौरान उपलब्ध अभिलेखों के आधार पर ही परखी जानी चाहिए।

SSP कार्यालय पहुंचा पीड़ित, निष्पक्ष जांच की मांग

मामले में पीड़ित प्रवीन कुमार द्वारा वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक कार्यालय पहुंचकर शिकायत किए जाने के बाद अब निगाहें पुलिस विभाग की जांच प्रक्रिया पर टिकी हैं। सवाल यह है कि क्या पुलिस विभाग आरोपों और पुलिस रिकॉर्ड के बीच सामने आ रहे कथित अंतर की स्वतंत्र एवं निष्पक्ष जांच कराएगा।
यदि वसूली का आरोप गलत है तो जांच से स्थिति स्पष्ट होनी चाहिए और यदि आरोपों में प्रथमदृष्टया तथ्य सामने आते हैं तो नियमानुसार कार्रवाई की जानी चाहिए। इसी प्रकार यदि गिरफ्तारी से संबंधित पुलिस रिकॉर्ड और CCTV में वास्तविक अंतर पाया जाता है तो उसकी भी जवाबदेही तय होना आवश्यक है।फिलहाल मामला जांच का विषय है। पुलिस या संबंधित अधिकारियों की आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने आने के बाद तस्वीर और स्पष्ट हो सकेगी।

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