तुर्रम सिंह राजपूत✍️
एटा। उत्तर प्रदेश के एटा जिले के शकरौली थाना क्षेत्र के वलीदादपुर गांव में चार वर्षीय मासूम उवेश कुमार के गंभीर रूप से घायल होने की घटना अब केवल एक सड़क दुर्घटना नहीं रह गई है।इस मामले में दर्ज एफआईआर को लेकर पीड़ित परिवार और ग्रामीणों ने ऐसे गंभीर आरोप लगाए हैं, जिससे पुलिस की प्रारंभिक कार्रवाई को सवालों के घेरे में लाकर खड़ा कर दिया है।
पीड़ित परिवार का आरोप है कि 26 जून की सुबह करीब 7 बजे खेल रहे मासूम को एक बैलगाड़ी (बुग्गी) ने कुचल दिया, जिससे उसकी टांग बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई।परिजनों का कहना है कि चालक मौके से भाग निकला और गंभीर रूप से घायल बच्चे को तत्काल उपचार के लिए आगरा ले जाया गया, जहां उसका इलाज जारी है।
घटना के बाद सोशल मीडिया पर वायरल हुए वीडियो में घटनास्थल पर मौजूद महिलाओं की चीख-पुकार सुनाई देती है।पीड़ित परिवार का दावा है कि यह वीडियो उनके आरोपों की पुष्टि करता है कि दुर्घटना बैलगाड़ी से हुई थी।हालांकि वायरल वीडियो की स्वतंत्र और आधिकारिक पुष्टि अभी शेष है।
सबसे गंभीर आरोप एफआईआर को लेकर है।परिजनों और ग्रामीणों का कहना है कि रिपोर्ट में जिस व्यक्ति का नाम आरोपी के रूप में दर्ज किया गया है, वह वास्तविक चालक नहीं है। उनका यह भी आरोप है कि दुर्घटना में प्रयुक्त वाहन का विवरण भी वास्तविक घटना से अलग दर्ज किया गया है। यदि जांच में यह आरोप सही पाए जाते हैं, तो यह केवल एक त्रुटि नहीं बल्कि निष्पक्ष विवेचना पर गंभीर प्रश्न खड़े करने वाला मामला होगा।
ग्रामीणों का कहना है कि सच्चाई सामने लाने के लिए वायरल वीडियो, प्रत्यक्षदर्शियों के बयान,घटनास्थल के साक्ष्य और अन्य उपलब्ध प्रमाणों की वैज्ञानिक एवं निष्पक्ष जांच कराई जानी चाहिए,उनका मानना है कि वास्तविक दोषी की पहचान कर उसके विरुद्ध विधिसम्मत कार्रवाई होना आवश्यक है।
पीड़ित परिवार ने प्रशासन से मांग की है कि पूरे प्रकरण की उच्चस्तरीय जांच कराई जाए, यदि एफआईआर में किसी प्रकार की तथ्यात्मक गड़बड़ी या लापरवाही पाई जाए तो जिम्मेदार व्यक्तियों के विरुद्ध भी कानून के अनुसार कार्रवाई हो। साथ ही घायल मासूम के समुचित उपचार और आर्थिक सहायता की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।
यह मामला अब केवल एक परिवार की पीड़ा तक सीमित नहीं है।सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या विवेचना उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर निष्पक्ष होगी,या फिर उठ रहे सवालों के समाधान किए बिना मामला आगे बढ़ा दिया जाएगा।
अब पूरे मामले पर निगाहें पुलिस विवेचना और प्रशासनिक जांच पर टिकी हैं। जांच के निष्कर्ष ही तय करेंगे कि पीड़ित परिवार द्वारा लगाए गए आरोपों में कितनी सच्चाई है और क्या इस मामले में किसी स्तर पर तथ्य छिपाने या गलत जानकारी दर्ज करने जैसी कोई चूक हुई है।