ब्यूरो तुर्रम सिंह
जलेसर/एटा। उत्तर प्रदेश के एटा जिले के जलेसर थाना क्षेत्र के गांव जमालपुर दुर्जन से इंसानियत को शर्मसार कर देने वाली घटना सामने आई है,जहां कथित रूप से उच्च जाति के दबंग लोगों ने एक दलित परिवार पर सुनियोजित और बर्बर हमला कर दिया।मारपीट,जातिसूचक गालियां,जानलेवा धमकियां और एक युवती के साथ छेड़छाड़ की कोशिश।इस पूरे घटनाक्रम ने कानून व्यवस्था की पोल खोलकर रख दी है।
पीड़ित अशोक कुमार पुत्र नथू राम निवासी जमालपुर दुर्जन द्वारा थाना जलेसर में दिए गए प्रार्थना पत्र के अनुसार मामला पुराने आर्थिक विवाद से जुड़ा है।करीब तीन वर्ष पूर्व गांव के प्रधान से जुड़े एक व्यक्ति को आवास योजना के नाम पर 15 हजार रुपये दिए गए थे,जो आज तक वापस नहीं किए गए। बाद में पीड़ित को जानकारी हुई कि यह योजना पूरी तरह निशुल्क है,जिससे ठगी का संदेह और गहरा गया।
घटना का दिन 29 अप्रैल समय सुबह 10:30 बजे
जब पीड़ित की पत्नी काम पर गई हुई थी,तभी बेटे पुष्पेंद्र कुमार ने रुपये वापस मांगे।इसी बात पर आरोप है कि सनी कुमार ने अपने साथ कई लोगों को बुला लिया और फिर जो हुआ,वह बर्बरता की सारी हदें पार कर गया।आरोपियों ने पुष्पेंद्र को बीच सड़क पर पकड़कर लाठियों-डंडों से बेरहमी से पीटना शुरू कर दिया। इसके बाद उसे घर के अंदर घसीटकर भी मारपीट जारी रखी गई। जब परिवार के अन्य सदस्य बचाने आए, तो उन्हें भी नहीं बख्शा गया।सबसे गंभीर आरोप यह है कि इस दौरान पीड़ित की बहन शिवानी को कथित रूप से बुरी नीयत से पकड़कर छेड़छाड़ की कोशिश की गई। उसे बचाने आए छोटे भाई देव कुमार को भी बुरी तरह पीटा गया। पूरे घटनाक्रम में जातिसूचक गालियां दी गईं और पूरे परिवार को जान से मारने की धमकियां दी गईं।
प्रशासन पर उठे सवाल
इतनी गंभीर घटना के बावजूद खबर लिखे जाने तक पुलिस की ओर से कोई स्पष्ट आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। इससे स्थानीय लोगों में आक्रोश है और सवाल उठ रहे हैं कि क्या दलितों के खिलाफ अपराधों पर अब भी सख्त कार्रवाई केवल कागजों तक सीमित है।
पीड़ित की मांग
अशोक कुमार ने सभी नामजद आरोपियों के खिलाफ सुसंगत धाराओं में तत्काल एफआईआर दर्ज कर कड़ी से कड़ी कानूनी कार्रवाई की मांग की है। साथ ही परिवार की सुरक्षा सुनिश्चित करने की भी गुहार लगाई है।
बता दें कि यह घटना न सिर्फ एक परिवार पर हमला है, बल्कि समाज में व्याप्त जातीय द्वेष और कानून के डर के खत्म होते प्रभाव का भी गंभीर संकेत है।अब देखने वाली बात यह होगी कि पुलिस और प्रशासन इस मामले में कितनी तेजी और निष्पक्षता से कार्रवाई करता है, या फिर यह मामला भी अन्य मामलों की तरह फाइलों में दबकर रह जाएगा।