जलेसर-अवागढ़-एटा मार्ग मौत का राजपथ,रामगढ़ी के गड्ढे बन गए कातिल,प्रशासन मौन
जलेसर-अवागढ़-एटा मार्ग मौत का राजपथ,रामगढ़ी के गड्ढे बन गए कातिल,प्रशासन मौन

27 Feb 2026 |   5



ब्यूरो तुर्रम सिंह 

एटा। उत्तर प्रदेश के एटा जिले की जलेसर तहसील के अंतर्गत जलेसर–अवागढ़–एटा प्रमुख मार्ग पर गांव रामगढ़ी के पास सड़क नहीं,बल्कि मौत का जाल बिछा है।वर्षों से बने गहरे और चौड़े गड्ढे अब मौत के कुएं का रूप ले चुके हैं।स्थानीय ग्रामीणों और राहगीरों का आरोप है कि इन खतरनाक गड्ढों के कारण अब तक कई निर्दोष लोग जान गंवा चुके हैं,लेकिन जिम्मेदार विभागों की संवेदनाएं अब भी नहीं जागीं।

ताजा तस्वीरें और जीपीएस लोकेशन (27.468858° N, 78.297487° E | Plus Code: F79W+CRQ, जलेसर) यह साबित करने के लिए पर्याप्त हैं कि सड़क की हालत बदतर से बदतर हो चुकी है।कहीं गड्ढों में पानी भरा है,जो रात के समय जानलेवा जाल बन जाता है,तो कहीं बड़े-बड़े गड्ढे सड़क को इस कदर चीर रहे हैं कि ट्रक और भारी वाहन मुश्किल से निकल पा रहे हैं।दोपहिया वाहन चालकों के लिए यह मार्ग हर पल मौत का निमंत्रण बन चुका है।

 वर्षों से अनदेखी,हर दिन खतरा

ग्रामीणों का कहना है कि यह स्थिति कोई नई नहीं है। कई वर्षों से शिकायतें की जा रही हैं,लेकिन लोक निर्माण विभाग की ओर से केवल कागजी खानापूर्ति होती रही है।अस्थायी पैचवर्क के बाद फिर वही हाल गड्ढे पहले से और गहरे।
यह मार्ग जलेसर तहसील मुख्यालय से होकर गुजरता है। जिला प्रशासन के अधिकारी,विधायक,सांसद और अन्य जनप्रतिनिधि भी इसी रास्ते से आवागमन करते हैं। इसके बावजूद सड़क की दुर्दशा पर कोई स्थायी कार्रवाई नहीं हुई। ग्रामीणों का गुस्सा फूट पड़ा है,जब वीआईपी गाड़ियां निकलती हैं तो सब ठीक लगता है,लेकिन आम आदमी की जान जाए तो कोई जिम्मेदार नहीं।

 यूपी में भयावह आंकड़े

देशभर में 2020 से 2024 के बीच गड्ढों से जुड़ी दुर्घटनाओं में 9,438 मौतें दर्ज की गईं,जिनमें उत्तर प्रदेश में 5,127 लोगों की जान ग‌ई,जो राष्ट्रीय कुल का 54 फीसदी से अधिक है। एटा जिले भी इस भयावह आंकड़े से अछूता नहीं है। जलेसर–अवागढ़–एटा मार्ग पर आए दिन ट्रक-बाइक टक्कर, ऑटो पलटने और अन्य हादसे होते रहे हैं। रामगढ़ी के पास के गड्ढे लंबे समय से दुर्घटनाओं का मुख्य कारण बने हुए हैं।
 
जिम्मेदारी किसकी

सवाल सीधा है,क्या प्रशासन को ये गड्ढे दिखाई नहीं देते,क्या पीडब्ल्यूडी गहरी नींद में है,जिला मजिस्ट्रेट,पुलिस अधीक्षक, मुख्य विकास अधिकारी और संबंधित विभागों के अधिकारी संपूर्ण समाधान दिवस में इसी मार्ग से गुजरते हैं, फिर भी सड़क की मरम्मत क्यों नहीं होती।ग्रामीणों का आरोप है कि जब तक मीडिया दबाव न बनाए, तब तक कोई कार्रवाई नहीं होती।यह लापरवाही केवल तकनीकी त्रुटि नहीं, बल्कि जनता की सुरक्षा के साथ खुला खिलवाड़ है।

 लोगों की प्रमुख मांग

स्थानीय लोगों ने प्रदेश सरकार और संबंधित विभागों से मांग की है कि इस मार्ग का तत्काल उच्चस्तरीय निरीक्षण कराया जाए,गड्ढों की अस्थायी नहीं,बल्कि स्थायी मरम्मत हो,जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय कर कठोर कार्रवाई की जाए,हादसों में जान गंवाने वाले परिवारों को उचित मुआवजा और न्याय मिले।यदि अब भी अनदेखी जारी रही, तो यह सड़क विकास की नहीं, प्रशासनिक विफलता की प्रतीक बन जाएगी। लोगों का संदेश साफ है,अब चुप्पी नहीं, जवाबदेही चाहिए।

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