ब्यूरो धीरज कुमार द्विवेदी
लखनऊ।उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ को एक ऐतिहासिक सौगात मिलने जा रही है।लखनऊ में मेट्रो नेटवर्क के विस्तार के तहत एक ऐसा अनोखा और इंजीनियरिंग का नायाब नमूना पेश करने की तैयारी है,जिससे लखनऊ देश भर में चर्चा का विषय बन गया है।चारबाग से वसंतकुंज तक प्रस्तावित ईस्ट-वेस्ट कॉरिडोर के तहत बनने वाला पाण्डेयगंज मेट्रो स्टेशन जमीन से लगभग 35 से 38 मीटर नीचे बनेगा।निर्माण पूरा होने के बाद यह देश का सबसे गहरा मेट्रो स्टेशन बन जाएगा।ये पश्चिम बंगाल में लगभग 33 मीटर गहरे हावड़ा मेट्रो स्टेशन का रिकॉर्ड तोड़ देगा।घनी आबादी और जगह की कमी के बीच इस प्रोजेक्ट को अमलीजामा पहनाना लखनऊ मेट्रो के लिए एक बड़ी तकनीकी चुनौती भी है।
पांच मंजिला होगा मेट्रो स्टेशन
जगह की कमी और घनी आबादी वाले क्षेत्र में निर्माण की चुनौती को देखते हुए पाण्डेयगंज मेट्रो स्टेशन को सामान्य तीन मंजिलों के बजाय पांच मंजिलों का बनाया जाएगा।यह स्टेशन चारबाग से वसंतकुंज तक प्रस्तावित ईस्ट-वेस्ट कॉरिडोर का हिस्सा होगा,इसकी गहराई लगभग 12 मंजिला इमारत की ऊंचाई से भी अधिक होगी।
एक-दूसरे के ऊपर-नीचे चलेंगी मेट्रो ट्रेनें
इस मेट्रो स्टेशन की खासियत यह होगी कि आने-जाने वाली मेट्रो ट्रेनों के दोनों ट्रैक समानांतर होने के बजाय अलग-अलग स्तरों पर बनाए जाएंगे।यानी एक ट्रैक दूसरे के ऊपर या नीचे रहेगा।दोनों ट्रैक के बीच एक मंजिल खाली रखी जाएगी,जहां मेट्रो संचालन से जुड़े सिस्टम लगाए जाएंगे।ऊपर-नीचे ट्रैक की यह व्यवस्था देश में अपनी तरह की पहली होगी।
नाले और रेलवे ट्रैक के बीच होगा निर्माण
पाण्डेयगंज मेट्रो स्टेशन का निर्माण तकनीकी रूप से चुनौतीपूर्ण होगा।स्टेशन के एक तरफ नाला और दूसरी तरफ रेलवे ट्रैक होने के कारण निर्माण कार्य में विशेष सावधानी बरतनी होगी।कम जगह और घनी आबादी के बीच इस तरह के स्टेशन का निर्माण लखनऊ मेट्रो के लिए महत्वपूर्ण परियोजना होगी।