सुल्तानपुर में मेनका गांधी की राह को मुश्किल बना रही है सपा-बसपा, जानें कैसा है सियासी समीकरण
सुल्तानपुर में मेनका गांधी की राह को मुश्किल बना रही है सपा-बसपा, जानें कैसा है सियासी समीकरण

24 May 2024 |  73




सुल्तानपुर।उत्तर प्रदेश की तीन लोकसभा सीटें रायबरेली, अमेठी और सुल्तानपुर के परिणाम पर इस बार सबकी निगाह है।कारण गांधी परिवार से जुड़ाव।रायबरेली से राहुल गांधी चुनाव लड़ रहे हैं,तो अमेठी में वो पिछला चुनाव हार गए थे।इस बार गांधी परिवार के सेवक किशोरी लाल शर्मा अमेठी से चुनाव लड़ रहे हैं।सुल्तानपुर से गांधी परिवार की बहू मेनका गांधी चुनाव लड़ रही हैं।मेनका नौवीं बार संसद पहुंचने के लिए चुनाव लड़ रही हैं।रायबरेली और अमेठी में चुनाव हो चुका है।सुल्तानपुर में 25 मई को चुनाव होगा।

सुल्तानपुर में भाजपा कितनी मतबूत है

मेनका गांधी ने भाजपा से 2019 का चुनाव जीता था। सुल्तानपुर में मेनका गांधी को लोग माता श्री या माता जी कहकर बुलाते हैं। मेनका गांधी का मुकाबला समाजवादी पार्टी के राम भुआल निषाद और बहुजन समाज के उदयराज वर्मा से है।साल 2019 का लोकसभा चुनाव सपा और बसपा ने मिलकर लड़ा था।मेनका गांधी और बसपा के चंद्र भद्र सिंह उर्फ सोनू में कांटे की लड़ाई हुई थी।मेनका गांधी यह चुनाव केवल 14 हजार वोटों के अंतर से जीत पाई थीं।मेनका गांधी को चार लाख 59 हजार 196 और सोनू सिंह को चार लाख 44 हजार 670 वोट मिले थे।इससे पहले 2014 के चुनाव में मेनका गांधी के बेटे वरुण गांधी सुल्तानपुर से भाजपा से चुनाव लड़े थे। वरुण गांधी ने बसपा के पवन पांडेय को एक लाख 78 हजार 902 वोटों से हराया था। वरुण गांधी को चार लाख 10 हजार 348 और पवन पांडेय को दो लाख 31 हजार 446 वोट मिले थे।सपा उम्मीदवार को दो लाख 28 हजार 144 वोट मिले थे।इससे पता चलता है कि सुल्तानपुर में भाजपा का जनाधार कम हो रहा है।इसे बढ़ाना मेनका गांधी के लिए बड़ी चुनौती है।

सुल्तानपुर का सियासी समीकरण

सुल्तानपुर लोकसभा में पांच विधानसभा सीटें आती हैं। इसमें इसौली,सुल्तानपुर,सुल्तानपुर सदर,कादीपुर और लंभुआ है ।इनमें से इसौली को छोड़कर बाकी की चार सीटे भाजपा के पास हैं। सुल्तानपुर में दलित वोटर लगभग 22 प्रतिशत तो मुसलमान वोटर लगभग 17 प्रतिशत हैं।सुल्तानपुर में मेनका गांधी का मुकाबला दो ओबीसी प्रत्याशियों से है।सपा प्रत्याशी राम भुआल निषाद जहां मल्लाह जाति के हैं, जिसकी इस क्षेत्र में आबादी करीब ढाई लाख मानी जाती है।वहीं बसपा प्रत्याशी उदयराज वर्मा कुर्मी जाति से आते हैं। बसपा ने 1999 और 2004 का चुनाव यहां से जीता था।

सुल्तानपुर में चुनाव प्रचार करते सपा प्रमुख अखिलेश यादव.

मेनका गांधी ने चुनाव प्रचार में राम मंदिर के मुद्दे को नहीं छुआ।मेनका गांधी भी तब जब सुल्तानपुर से अयोध्या लगभग एक घंटे की दूरी पर है।चुनाव प्रचार में मेनका गांधी का जोर विकास के मुद्दे पर रहा। मेनका गांधी ने जनता के सामने उन कामों को रखा जो उनके कार्यकाल में हुए हैं।मेनका गांधी का चुनाव प्रचार करने न तो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आए और न ही केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह।मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बुधवार को सुल्तानपुर में एक जनसभा को संबोधित किया। वहीं निषाद पार्टी के संजय निषाद और भाजपा का दलित चेहरा माने जाने वाले पूर्व आईपीएस अधिकारी असीम अरुण ने मेनका गांधी के लिए चुनाव प्रचार किया है।इसे निषाद और दलित वोटों को साधने की कोशिश के रूप में देखा गया। चुनाव प्रचार के अंतिम दिन मेनका गांधी के बेटे वरुण गांधी भी मां का चुनाव प्रचार करने पहुंचे।

गोरखपुर से आया है सपा प्रत्याशी

साल 2024 के चुनाव से कुछ दिन पहले ही चंद्र भद्र सिंह उर्फ सोनू सिंह ने बसपा छोड़ सपा में शामिल हो गए हैं।सोनू सिंह ने सुल्तानपुर में मेनका गांधी की राह को कठिन बना दिया है। इंडिया गठबंधन में यह सीट सपा के खाते में आई है।सपा ने राम भुआल निषाद को प्रत्याशी बनाया है।राम भुआल निषाद गोरखपुर जिले की कौड़ीराम विधानसभा से दो बार विधायक रह चुके हैं।राम भुआल बसपा सरकार में मंत्री भी रह चुके हैं। सपा ने 2019 का चुनाव राम भुआल निषाद को गोरखपुर से लड़ाया था। गोरखपुर में राम भुआल भाजपा के रविकिशन शुक्ल से तीन लाख 670 वोटों के अंतर से हार गए थे।सपा मुखिया अखिलेश यादव ने 20 मई को चांदपुर सैदोपट्टी में राम भुआल निषाद के समर्थन में एक जनसभा को संबोधित किया था।इसमें भीम निषाद भी शामिल हुए, जिन्हें सपा ने पहले अपना प्रत्याशी बनाया था।भीम निषाद का टिकट काटकर ही राम भुआल निषाद को दिया गया।सपा मुखिया अखिलेश यादव और भीम निषाद के साथ आने से सुल्तानपुर के सपा कार्यकर्ताओं में जोश आ गया है।इससे लड़ाई और कांटे की हो गई है।

मेनका गांधी का सियासी सफर

मेनका गांधी पहली बार सुल्तानपुर से 2019 में चुनाव लड़ीं। इसके पहले मेनका गांधी पीलीभीत और आंवला से चुनाव जीत रही थीं। मेनका गांधी 1989 में जनता दल से पीलीभीत से पहली बार सांसद चुनी गईं थी। बाद में मेनका गांधी ने 1996, 1998, 1999 में भाजपा के समर्थन से पीलीभीत से चुनाव जीतीं। मेनका गांधी भाजपा में 2004 में शामिल हुईं। भाजपा ने 2004 में मेनका गांधी को पीलीभीत और 2009 में आंवला से टिकट दिया।मेनका गांधी फिर 2014 में पीलीभीत से लोकसभा के लिए चुनी गईं।इसके बाद मेनका गांधी को नरेंद्र मोदी की सरकार में महिला एवं बाल विकास मंत्री बनाया गया था।

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