नई दिल्ली।पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव की सरगर्मी के बीच विपक्षी एकता की एक नई पटकथा लिखी जा रही है। पहले चरण के मतदान से एक दिन पहले बंगाल में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को दिल्ली से बड़ा नैतिक बल मिला है।आम आदमी पार्टी (आप) के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने सीएम ममता बनर्जी से फोन पर बात कर न केवल उनका कुशलक्षेम जाना,बल्कि चुनाव को लेकर उनके प्रति अपना पूर्ण समर्थन भी व्यक्त किया।यह बातचीत पूरी तरह से भावनात्मक रही,ये ममता और केजरीवाल के बीच गहरे व्यक्तिगत संबंधों को रेखांकित करती है।इसे केजरीवाल ने खुद साझा किया।
सियासी नहीं,पारिवारिक दिखा रिश्ता
अरविंद केजरीवाल और ममता बनर्जी के बीच लगभग 15 से 20 मिनट तक बात हुई,इस दौरान राजनीति से अधिक भावनात्मक पहलुओं पर जोर रहा।बातचीत में उन पुराने दिनों का जिक्र हुआ जब ममता बनर्जी दिल्ली के मुख्यमंत्री के धरने में शामिल होने पहुंची थीं।
विपक्षी एकजुटता को धार देने की कोशिश
सियासी पंडितों का मानना है कि चुनाव से ऐन पहले केजरीवाल का ममता को फोन करना एक सोची-समझी रणनीति का हिस्सा है।बंगाल में एक बड़ा वर्ग हिंदी भाषी है, जहां केजरीवाल की एक खास छवि है,उनके समर्थन से तृणमूल कांग्रेस को मनोवैज्ञानिक लाभ मिल सकता है।दोनों ही नेता केंद्र सरकार की नीतियों और केंद्रीय जांच एजेंसियों के सक्रिय होने को लेकर एक जैसा रुख रखते हैं।
संघीय ढांचे की रक्षा पर हुई बात
फोन पर हुई इस बातचीत में संघीय ढांचे की रक्षा पर भी बात हुई है।भारतीय सियासत में ममता बनर्जी और अरविंद केजरीवाल की जोड़ी को स्ट्रीट फाइटर्स के रूप में देखा जाता है।ममता दीदी और केजरीवाल का रिश्ता केवल सियासत तक सीमित नहीं है।यह दो ऐसे नेताओं का मिलन है,जिन्होंने अपनी जमीन शून्य से तैयार की है।केजरीवाल जानते हैं कि बंगाल में ममता की जीत उनके लिए भी राष्ट्रीय स्तर पर संजीवनी का काम करेगी।
भाजपा ने साधा निशाना,बताया डर का गठबंधन
ममता बनर्जी और अरविंद केजरीवाल के बीच हुई बातचीत पर भाजपा ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष वीरेंद्र सचदेवा ने कहा कि भाजपा के प्रदेश नेतृत्व ने कहा कि बंगाल की जनता ममता सरकार के कुशासन से ऊब चुकी है। अब चाहे दिल्ली से समर्थन आए या कहीं और से परिवर्तन निश्चित है।यह बातचीत दो ऐसे नेताओं के बीच है जो अपनी जमीन खिसकते देख एक दूसरे का सहारा ढूंढ रहे हैं।