अरविंद केजरीवाल के खिलाफ अवमानना की याचिका पर सुनवाई से जज ने खुद को किया अलग
अरविंद केजरीवाल के खिलाफ अवमानना की याचिका पर सुनवाई से जज ने खुद को किया अलग

22 Apr 2026 |   18



अरविंद केजरीवाल के खिलाफ अवमानना की याचिका पर सुनवाई से जज ने खुद को किया अलग

अब इस याचिका पर वो बेंच करेगी सुनवाई,जिस बेंच के जस्टिस तेजस करिया नहीं होंगे सदस्य 

नई दिल्ली।दिल्ली हाईकोर्ट के जज जस्टिस तेजस करिया ने पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल समेत आम आदमी पार्टी के दूसरे नेताओं और पत्रकार के खिलाफ जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा की बेंच में हुई सुनवाई के वीडियो अपलोड करने पर कोर्ट की अवमानना की कार्यवाही शुरु करने की मांग करने वाली याचिका की सुनवाई से हट गए हैं।अब इस याचिका पर वो बेंच सुनवाई करेगी,जिस बेंच के सदस्य जस्टिस तेजस करिया नहीं होंगे।

यह याचिका वकील वैभव सिंह ने दायर किया है।याचिका में दिल्ली आबकारी घोटाला मामले में ट्रायल कोर्ट की ओर से अरविंद केजरीवाल को बरी करने के खिलाफ सीबीआई की याचिका पर सुनवाई से जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा को हटने की मांग की सुनवाई के वीडियो रिकॉर्ड कर उसे सोशल मीडिया पर अपलोड करने पर आपत्ति जताई गई है।याचिका में केजरीवाल और पत्रकार के अलावा कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह,आम आदमी पार्टी के मनीष सिसोदिया,संजय सिंह, संजीव झा,पूरनदीप साहनी,जरनैल सिंह,मुकेश अहलावत और विनय मिश्रा के खिलाफ कोर्ट की अवमानना की कार्रवाई करने की मांग की गई है।

याचिका में मांग की गई है कि कोर्ट की कार्यवाही का वीडियो सोशल मीडिया प्लेटफार्म्स से हटाए जाएं।याचिका में अरविंद केजरीवाल पर आरोप लगाया गया है कि उन्होंने कोर्ट में बिना आधार के भ्रामक दलीलें दी।केजरीवाल ने कोर्ट का मान कम करने के लिए कई अनर्गल आरोप लगाए।याचिका में कहा गया है कि केजरीवाल की दलीलों को रिकॉर्ड कर उन्हें एक्स, फेसबुक,इंस्टाग्राम और यूट्यूब के विभिन्न चैनल्स पर अपलोड किया गया।ऐसा कर आम लोगों को भ्रमित करने की कोशिश की गई। इसके जरिये कोर्ट और केंद्र सरकार पर अनावश्यक दबाव बनाने का प्रयास किया गया। इसके पहले याचिकाकर्ता वकील वैभव सिंह ने इसके पहले हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल से शिकायत कर केजरीवाल और दूसरे लोगों के खिलाफ कार्रवाई करने की मांग की थी।

बता दें कि जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा की बेंच ने 20 अप्रैल को पूर्व सीएम अरविंद केजरीवाल की सुनवाई से हटने की मांग खारिज कर दिया था।जस्टिस शर्मा ने कहा था कि केवल अनुमान के आधार पर किसी मामले की सुनवाई से नहीं हटाया जा सकता है।

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