नई दिल्ली।स्टेडियमों में भूजल दोहन रोकने को लेकर पूर्व में दिए गए आदेशों का अनुपालन नहीं करने पर नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने सख्त नाराजगी व्यक्त की है।
एनजीटी चेयरमेन न्यायमूर्ति प्रकाश श्रीवास्तव की अध्यक्षता वाली पीठ ने कड़ी चेतावनी देते हुए नई दिल्ली के अरुण जेटली और उत्तर प्रदेश के लखनऊ में इकाना क्रिकेट स्टेडियम प्रशासन को नोटिस जारी कर पूछा है कि आदेशों के गैर-अनुपालन में क्यों न स्टेडियम के अंदर की सभी गतिविधियों पर रोक लगा दी जाए।
एनजीटी ने छह स्टेडियमों द्वारा आदेशों का पालन न करने और कोई जवाब प्रस्तुत न करने पर न्यायालय ने गंभीर चिंता व्यक्त करते हुए सुनवाई दो जुलाई तक के लिए स्थगित कर दी।एनजीटी ने स्टेडियम प्रशासन को कारण बताओ नोटिस जारी कर कहा कि वे यह स्पष्ट करें कि आदेशों का पालन न करने के कारण उनकी सभी गतिविधियां क्यों न रोक दी जाएं।
एनजीटी ने स्पष्ट किया कि जल संरक्षण पर्यावरण संरक्षण का अनिवार्य हिस्सा है और खेल मैदानों में भूजल के स्थान पर उपचारित जल एवं वर्षा जल का उपयोग अनिवार्य रूप से सुनिश्चित किया जाना चाहिए।
एनजीटी ने साथ ही नई दिल्ली अरुण जेटली स्टेडियम,रामपुर में वीर नारायण सिंह अंतरराष्ट्रीय स्टेडियम,जयपुर में सवाई मानसिंह स्टेडियम,मुंबई में डाॅक्टर डीवाई पाटिल स्टेडियम, लखनऊ में भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेयी इकाना क्रिकेट स्टेडियम,हैदराबाद में राजीव गांधी अंतरराष्ट्रीय स्टेडियम और कटक बाराबती स्टेडियम को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।
सुनवाई के दौरान एनजीटी के समक्ष आवेदनकर्ता ने कहा कि छह स्टेडियमों ने न तो अब तक अपना जवाब दाखिल किया है और न ही बार-बार दिए गए आदेश के बावजूद स्टेडियम की तरफ से कोई पेश हुआ है। यह भी बताया कि इन स्टेडियमों को नोटिस विधिवत भेजा गया था।आवेदनकर्ता ने एनजीटी के समक्ष कहा कि इन छह स्टेडियमों में सभी गतिविधियां पूरी तरह से रोक दी जानी चाहिए और उन्हें वहां किसी भी तरह की खेल गतिविधि करने की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए।
दूसरी तरफ केंद्रीय भूजल प्राधिकरण की तरफ से कहा कि इन स्टेडियमों को 27 मार्च 2026 और सात अप्रैल 2026 को विधिवत ई-मेल भेजे गए थे और लंबित मामले में रिपोर्ट जमा करने को कहा गया था।
एनजीटी ने वर्ष 2021 में अपने पूर्व आदेश के अनुपालन की समीक्षा करते हुए कहा था कि क्रिकेट मैदानों में भूजल के अत्यधिक दोहन को रोकना एवं एसटीपी (सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट) के उपचारित जल तथा वर्षा जल संचयन प्रणाली के उपयोग को सुनिश्चित करना अत्यंत आवश्यक है।