लखनऊ।उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (केजीएमयू) प्रकरण में यूपी एसटीएफ की जांच में चौंकाने वाला खुलासा हुआ है।केजीएमयू धर्मांतरण और लव जिहाद की फंडिंग में 100 से ज्यादा डॉक्टर और मौलाना शामिल थे।गिरोह से जुड़े डॉक्टर और मौलाना जकात के नाम पर हर महीने लगभग 10 लाख रुपये फंडिंग जुटाते थे।एसटीएफ गिरोह के जुड़े कई लोगों को चिंह्नित कर उनके बैंक खातों के साथ ही अन्य जानकारियां जुटा रही है।
एसटीएफ की जांच में पता चला है कि धर्मांतरण और लव जिहाद की फंडिंग में लखनऊ,आगरा,बस्ती,सहारनपुर देवबंद, बरेली के सरकारी और निजी संस्थानों के डॉक्टरों के अलावा मौलाना जुड़े थे।इस पैसे का इस्तेमाल लव जिहाद और धर्मांतरण में किया जाता था।एसटीएफ की जांच की जद में केजीएमयू के डॉक्टर समेत 12 मेडिकल स्टाफ के लोग और शहर के दो निजी मेडिकल कॉलेज से जुड़े संचालक और उनके अधिकारियों के अलावा आगरा एसएनएमसी के पूर्व वर्तमान छात्र हैं।गिरोह से जुड़े लोगों के खातों की डिटेल बैंकों से मांगी गई है।
केजीएमयू के हास्टलों में आने वाले मौलाना मेडिकल स्टाफ को संगठन से जोड़कर तकरीर करते थे। डॉ. रमीज भी तकरीर करता था।देवबंद,बरेली और आगरा से आने वाले मौलाना जकात (चंदा) इकट्ठा कराते। इस कार्य में जब उन्हें रुपयों की जरूरत होती तो उसी जकात से खर्च किया जाता था।
एसटीएफ की जांच में यह भी पता चला है कि गिरोह के जुड़े लोग हिंदू महिलाओं का धर्मांतरण सवाब (पुण्य) मानते थे। केजीएमयू कैंपस के हाल में होने वाली तकरीर में बाहर से आने वाले मौलाना धर्मांतरण के लिए साजिश करते थे,स्क्रिप्ट तैयार की जाती थी,कैसे हिंदू महिला डॉक्टरों को जाल में फंसाना है,किस तरह से उनकी मानसिक दशा बदलनी है,इन सब बातों की शिक्षाएं मौलाना देते थे।
केजीएमयू के बंद कमरों में दीनी तालीम के नाम पर गैर जनपदों से मौलाना आते थे।कमरों में दीनी तालीम के नाम पर रमीज मुस्लिम मेडिकल छात्रों को जुटाता था। इसमें कई ऐसे छात्र होते थे,जो सीधे साधे और पढ़ने वाले होते थे। वह इन सब कृत्यों से दूर रहते थे। रमीज उन्हें भी दीनी तालीम के नाम पर बुलाता था। मौलाना सीधे-साधे मुस्लिम मेडिकल छात्रों को धीरे-धीरे भड़का कर अपने नापाक मंसूबों में शामिल करते और गलत राह पर ले जाते थे। हिंदुओं के बारे में गलत बाते बताकर उनके मन में द्वेष भरते थे।