नंदी का साथ और 800 किमी की पैदल यात्रा,हरियाणा का अनोखा कांवड़िया
नंदी का साथ और 800 किमी की पैदल यात्रा,हरियाणा का अनोखा कांवड़िया

07 Aug 2026 |   30



 

सहारनपुर।देवाधिदेव महादेव का प्रिय महीना सावन में चारों तरफ भगवा ही भगवा नजर आ रहा है,कंधों पर कांवड़, होंठों पर हर हर महादेव और आंखों में महादेव के दर्शन की आस,कोई नौकरी की मन्नत लेकर चला है,कोई बीमारी दूर होने की प्रार्थना कर रहा है,कोई परिवार की खुशहाली मांग रहा है।इस बार हरिद्वार और सहारनपुर के रास्तों पर एक ऐसी कांवड़ दिखाई दी,जिसे देखकर लोग तस्वीरें खींच रहे हैं और हाथ जोड़कर हर-हर महादेव बोल रहे हैं।

इस कांवड़ में देवाधिदेव महादेव के प्रिय वाहन नंदी हैं। हरियाणा के रहने वाले रोशनलाल ने इस बार अपनी कांवड़ को नंदी का स्वरूप दिया है।रोशनलाल का कहना है कि अगर भोलेनाथ को प्रसन्न करना है,तो सबसे पहले उनके सबसे प्रिय गण और वाहन नंदी की सेवा करनी चाहिए।शिव तक पहुंचने का रास्ता नंदी से होकर जाता है,इसलिए इस बार उन्होंने नंदी को ही अपनी यात्रा का केंद्र बना लिया।

रोशनलाल अपने परिवार और बच्चों के साथ हरिद्वार पहुंचे। सबसे पहले उन्होंने नंदी को गंगा स्नान कराया,श्रद्धा के साथ पूजा की और फिर देवाधिदेव महादेव का आशीर्वाद लेकर अपनी लगभग 800 किलोमीटर लंबी पैदल कांवड़ यात्रा शुरू की। यह नजारा देखने के लिए घाट पर मौजूद श्रद्धालु भी रुक गए,कई लोगों ने नंदी के दर्शन किए,तो कई मोबाइल निकालकर तस्वीरें और वीडियो बनाने लगे।

रोशनलाल की यह अनोखी कांवड़ अब रास्ते भर आकर्षण का केंद्र बनी हुई है,जहां-जहां से यह कांवड़ गुजरती है, लोग कुछ देर के लिए ठहर जाते हैं,कोई नंदी के चरण छूता है, कोई प्रणाम करता है, तो कोई पूछता है कि आखिर इस अनोखे विचार की शुरुआत कैसे हुई।रोशनलाल मुस्कुराकर एक ही बात कहते हैं कि नंदी के बिना शिव की पूजा अधूरी है।

रोशनलाल बताते हैं कि उनकी आर्थिक स्थिति बहुत मजबूत नहीं है,लेकिन भक्ति के रास्ते में उन्होंने कभी पैसों को रुकावट नहीं बनने दिया।अगर नीयत साफ हो और श्रद्धा सच्ची हो, तो भोलेनाथ खुद रास्ते बना देते हैं।रोशनलाल की यात्रा सिर्फ कांवड़ लेकर जल चढ़ाने तक सीमित नहीं है,उनका एक बड़ा सपना भी है।वह चाहते हैं कि भविष्य में भगवान शिव और नंदी का एक मंदिर बनवाएं,जहां नंदी को स्थायी स्थान मिले और लोग उनकी पूजा कर सकें।

रोशनलाल कहते हैं कि अगर पूरी जिंदगी साधारण तरीके से भी गुजारनी पड़े, तब भी उन्हें कोई अफसोस नहीं होगा,लेकिन शिव और नंदी की सेवा कभी नहीं छोड़ेंगे।लोगों ने कहा कि आज जब कांवड़ यात्रा में भव्य सजावट, ऊंची-ऊंची कांवड़ और आधुनिक तकनीक चर्चा का विषय बन जाती हैं, तब रोशनलाल की यह यात्रा एक अलग संदेश देती है।

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