लखनऊ।राजनीति की जमीन पर शायरी के जरिए कदम रखने वाले कांग्रेस से राज्यसभा सांसद इमरान प्रतापगढ़ी आजकल चर्चा में हैं।माफिया अतीक अहमद की शान में कभी इमरान प्रतापगढ़ी कसीदे पढ़ते थे।अब जब अतीक के परिवार पर संकट आया है।अतीक के बेटे अबान अहमद की एक्सीडेंट में मौत हो गई है,जिस पर इमरान प्रतापगढ़ी ने सार्वजनिक रूप से कोई भी दुख जाहिर नहीं किया।इमरान प्रतापगढ़ी कभी अतीक अहमद को मुसलमानों का मसीहा बताया करते थे, लेकिन अब मौन हैं।
माफिया अतीक अहमद के बेटे अबान अहमद की मौत पर इमरान प्रतापगढ़ी ने सोशल मीडिया पर ना तो दुख जाहिर किया और न ही उनके परिवार के किसी सदस्य से बात कर संवेदना जताई।अतीक के परिवार के बुरे समय में इमरान प्रतापगढ़ी की दूरी और चुप्पी से सोशल मीडिया पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।मुस्लिम युवाओं का एक बड़ा वर्ग इमरान प्रतापगढ़ी को सोशल मीडिया पर ट्रोल कर सवाल पूछ रहे हैं। इसे काउंटर करने के लिए इमरान प्रतापगढ़ी ने अपने समर्थकों की पूरी फौज उतार दिया है,जो डैमेज कन्ट्रोल करने में जुट गए हैं।
मुस्लिम युवाओं के उठते सवाल के बीच इमरान प्रतापगढ़ी ने अपनी समर्थकों को काउंटर करने के लिए उतार दिया है, जिसमें ज्यादातर लोग कांग्रेस के अल्पसंख्यक कमेटी से जुड़े हुए हैं,वो रविवार से लगातार अपने-अपने सोशल मीडिया के जरिए कह रहे हैं कि इमरान प्रतापगढ़ी बहुत सुलझे हुए दिमाग से काम लिया है।
माफिया अतीक अहमद और उनके परिवार के साथ इमरान प्रतापगढ़ी के करीबी रिश्ते जगजाहिर थे।इमरान प्रतापगढ़ी का पुराने मुशायरों और चुनावी मंचों के कई वीडियो आज भी इंटरनेट पर मौजूद हैं,जिसमें इमरान प्रतापगढ़ी अतीक की शान में कसीदे पढ़ते थे और उनकी तारीफ करते नजर आते थे।अतीक अहमद के लिए इमरान प्रतापगढ़ी कहते थे, इलाहाबाद वालों मेरी एक बात याद रखना,कई सालों तक कोई अतीक अहमद होगा।मुझे इस बात का अंदाज़ा है कि एक शख्स इस शहर में बैठा यही, जो सबकुछ संभाल लेगा।
माफिया अतीक अहमद के परिवार से जुड़ी एक बड़ी दुखद घटना सामने आई है।अतीक के बेटे अबान अहमद की झांसी में एक कार दुर्घटना में मौत हो गई तो इमरान प्रतापगढ़ी ने इस पर पूरी तरह से मौन धारण कर लिया।इमरान प्रतापगढ़ी ने अतीक के परिवार से बात करना तो दूर,सोशल मीडिया पर संवेदना का एक शब्द तक साझा नहीं किया।
सोशल मीडिया पर इमरान प्रतापगढ़ी की माफिया अतीक अहमद के साथ पुराने फोटो और वीडियो और आज की खामोशी के साथ तुलना करके उन पर तीखे सवाल हो रहे हैं।
सोशल मीडिया पर नाराजगी जता रहे कई यूजर्स और मुस्लिम युवाओं का आरोप है कि जब राजनीतिक और व्यक्तिगत फायदे का समय था,तब अतीक अहमद के साथ नजदीकी दिखाने से गुरेज नहीं किया गया,लेकिन आज जब उनका परिवार पर संकट गहरा गया, तो राजनीतिक नफा-नुकसान के डर से कन्नी काट ली गई है।
इमरान प्रतापगढ़ी जिस अतीक अहमद को अपने पिता की हैसियत दी थी,उस अतीक के परिवार पर गम का पहाड़ टूटा है,सवा तीन साल में अतीक अहमद और उनके भाई और दो बेटे की मौत हो गई,लेकिन इमरान प्रतापगढ़ी उन जनाजों पर सार्वजनिक तौर पर शोक प्रकट भी नहीं किया।अतीक अहमद के बेटे अबान की कार दुर्घटना में मौत हो गई।सार्वजनिक रूप से इमरान प्रतापगढ़ी गम का इजहार नहीं किया।
जब इमरान प्रतापगढ़ी को कांधों पर चढ़कर बड़ा बनना था,तब भरे मंच से माफिया अतीक अहमद को बाप बता दिया था।जब कांधा देने की बारी आई तो कंधा नहीं दिया।क्या यह डर था कि इससे राजनीतिक तरक्की रुक सकती।माना कि हालात अच्छे नहीं हैं,लेकिन इतने भी बुरे नहीं हैं कि किसी अपने की मौत पर ग़म का इज़हार भी ना कर सकें।खुशामद में लिखे अशआर से कुर्सी कमाई है,खुशामद से मिली जिस माफिया की रहनुमाई है,मगर उस रहनुमा की मौत पर कैसे ज़ुबां खोलूं,बड़ा नेता हूं नीयत में निहायत बेहयाई है।