कांग्रेस से सटे चुनावी वैज्ञानिक स्वामी प्रसाद मौर्य क्या अपने परिवार को कर पाएंगे सेट
कांग्रेस से सटे चुनावी वैज्ञानिक स्वामी प्रसाद मौर्य क्या अपने परिवार को कर पाएंगे सेट

28 Oct 2026 |   26



 

 

लखन‌ऊ।उत्तर प्रदेश में चुनावी वैज्ञानिक स्वामी प्रसाद मौर्य ने 2027 के यूपी विधानसभा चुनाव को लेकर अपने पत्ते खोल दिए हैं।जनता दल,बहुजन समाज पार्टी, भारतीय जनता पार्टी और फिर समाजवादी पार्टी के बाद अब स्वामी प्रसाद मौर्य का कांग्रेस के साथ हाथ मिलाकर अपनी सियासी पारी को आगे बढ़ाने का प्लान है।क्या स्वामी प्रसाद अपने साथ-साथ बेटे उत्कृष्ट और बेटी संघमित्रा का राजनीतिक भविष्य कांग्रेस में सुरक्षित कर पाएंगे।

स्वामी प्रसाद ने 2027 में कांग्रेस के साथ गठबंधन कर चुनाव लड़ने की बनाई रणनीति 

स्वामी प्रसाद मौर्य ने 2027 में कांग्रेस के साथ गठबंधन कर चुनाव लड़ने की रणनीति बनाई है। स्वामी प्रसाद कांग्रेस नेता राहुल गांधी के साथ मुलाकात भी कर चुके हैं,इसके बाद इंडिया ब्लॉक के तहत चुनाव लड़ने का फैसला किया गया है।
सूत्रों के मुताबिक स्वामी प्रसाद मौर्य ने कांग्रेस से 12 विधानसभा सीटों की मांग की थी।हालांकि कांग्रेस की शर्त यह है कि स्वामी प्रसाद मौर्य, उनके बेटे उत्कृष्ट मौर्य और उनकी बेटी संघमित्रा मौर्य समेत उनके सभी प्रत्याशी कांग्रेस के सिंबल पंजे पर ही चुनाव लड़ें,लेकिन बड़ा सवाल यह है कि क्या सपा उन्हें अपने हिस्से की सीटें देने के लिए तैयार होगी।

स्वामी प्रसाद की डिमांड कितनी होगी पूरी

समाजवादी पार्टी से दूरी बनाकर अपनी नई राजनीतिक पार्टी बनाने वाले चुनावी वैज्ञानिक स्वामी प्रसाद मौर्य अब कांग्रेस के जरिए अपनी चुनावी पारी को आगे बढ़ाना चाहते हैं।स्वामी प्रसाद ने हाल ही में कांग्रेस नेता राहुल गांधी और प्रियंका गांधी से मुलाकात की और कांग्रेस के साथ मिलकर चुनाव लड़ने की इच्छा जाहिर की।स्वामी प्रसाद ने गठबंधन में अपनी पार्टी के लिए 12 सीटों की मांग रखी,लेकिन कांग्रेस इस पर सीधे तौर पर तैयार नहीं है।सूत्रों के मुताबिक कांग्रेस ने स्वामी प्रसाद को एक अलग ही ऑफर दिया है कि वे अपनी पार्टी के बजाय कांग्रेस के सिंबल पर चुनाव लड़ें।स्वामी प्रसाद ने कांग्रेस के सामने जिन विधानसभा सीटों का प्रस्ताव रखा है,उन पर मौर्य-कुशवाहा और अन्य पिछड़े वर्गों का प्रभाव काफी अच्छा माना जाता है।

स्वामी प्रसाद ने ऊंचाहार,बिल्सी,पडरौना और फाजिलनगर सहित कुछ सीटों की मांग की...

स्वामी प्रसाद मौर्य ने रायबरेली की ऊंचाहार,बदायूं की बिल्सी, कुशीनगर की पडरौना और फाजिलनगर,जालौन की कालपी, शाहजहांपुर की तिलहर और प्रतापगढ़ और कानपुर देहात की कुछ सीटों की मांग की है।ऊंचाहार सीट पर कांग्रेस के अजय पाल सिंह पहले से ही दावेदार हैं,तो सपा भी अपना प्रत्याशी उतारने की तैयारी में है।बिल्सी सीट पर सपा अपना प्रत्याशी उतारने का प्लान बना रही है,क्योंकि वहां सपा का प्रभाव रहा है,ऐसे में स्वामी प्रसाद को कौन सी सीटें मिलेंगी,इस पर सस्पेंस बना हुआ है,इसकी एक बड़ी वजह यह है कि इंडिया गठबंधन में यूपी स्तर पर सीट शेयरिंग की मुख्य कमान सपा के हाथ में है।

स्वामी क्या बेटे और बेटी को कर पाएंगे सेट

स्वामी प्रसाद मौर्य गैर-यादव ओबीसी के बड़े नेता माने जाते हैं,लेकिन बसपा और सपा से अलग होने के बाद उनका राजनीतिक ग्राफ कुछ कमजोर पड़ा है,ऐसे में स्वामी प्रसाद का कांग्रेस से हाथ मिलाना न केवल खुद को सियासी जमीन पर बनाए रखने की कोशिश है,बल्कि अपने दोनों बच्चों का भविष्य सेट करने का एक बड़ा प्रयास भी है।इसे स्वामी प्रसाद मौर्य के बेटे उत्कृष्ट मौर्य और बेटी डॉ. संघमित्रा मौर्य का सियासी भविष्य सुरक्षित करने की एक बड़ी बार्गेनिंग स्ट्रैटेजी माना जा रहा है।रायबरेली जिले की ऊंचाहार विधानसभा सीट से स्वामी प्रसाद मौर्य अपने बेटे उत्कृष्ट को मैदान में उतारना चाहते हैं, जो उनका पारंपरिक गढ़ रहा है।उत्कृष्ट मौर्य पहले भी ऊंचाहार सीट से दो बार किस्मत आजमा चुके हैं,लेकिन पराजय का सामना करना पड़ा था।राहुल गांधी के संसदीय क्षेत्र रायबरेली के अंतर्गत आने वाली ऊंचाहार सीट पर कांग्रेस के बैनर तले उत्कृष्ट के लिए परिस्थितियां आसान हो सकती हैं, लेकिन सपा और कांग्रेस के स्थानीय दावेदारों के चलते यह सीट उनके खाते में जाना आसान नहीं दिख रहा है।बदायूं से पूर्व बीजेपी सांसद संघमित्रा मौर्य को बीजेपी से टिकट न मिलने के बाद से ही उनके नए ठिकाने की तलाश जारी थी। स्वामी प्रसाद अपनी बेटी को बदायूं की बिल्सी विधानसभा सीट से चुनाव लड़ाने की चर्चा में हैं।माना जा रहा है कि उन्हें कांग्रेस प्रत्याशी के तौर पर मैदान में उतारा जा सकता है। इसके लिए संघमित्रा को औपचारिक रूप से कांग्रेस की सदस्यता लेनी होगी।कुशीनगर जिले की पडरौना या फाजिलनगर सीट से स्वामी प्रसाद खुद किस्मत आजमा सकते हैं।पडरौना सीट से स्वामी प्रसाद पहले भी प्रतिनिधित्व कर चुके हैं,लेकिन 2022 में फाजिलनगर सीट से चुनाव लड़े थे और जीत दर्ज नहीं कर सके थे।अब उनके सामने खुद से ज्यादा अपने परिवार का राजनीतिक भविष्य सेट करने की चुनौती है।

क्या कांग्रेस में सेट हो पाएगा मौर्य परिवार

सपा से हटने के बाद स्वामी प्रसाद मौर्य के लिए यह समझौता एक सियासी जीवनदान की तरह देखा जा रहा है।यूपी में मौर्य-कुशवाहा-शाक्य वोट बैंक लगभग 6 से 7 फीसदी तक है। कांग्रेस को लगता है कि स्वामी प्रसाद के साथ आने से बीजेपी के इस वोट बैंक में सेंधमारी की जा सकती है।
हालांकि स्वामी प्रसाद के पुराने विवादित बयानों को लेकर कांग्रेस के भीतर भी एक वर्ग सतर्क है।संभव है कि कांग्रेस का पारंपरिक ब्राह्मण तबका स्वामी प्रसाद को लेकर कुछ सहज न हो,लेकिन संविधान बचाओ और भाजपा हटाओ के साझा एजेंडे के तहत राहुल गांधी और कांग्रेस नेतृत्व के साथ मौर्य परिवार का समझौता अब लगभग तय माना जा रहा है,ऐसे में देखना दिलचस्प होगा कि स्वामी प्रसाद इस नए दांव से अपने परिवार को कितना सेट कर पाते हैं।

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