सहारनपुर।उत्तर प्रदेश के सहारनपुर में पति को पुलिस हिरासत से छुड़ाने की आशा लेकर देवबंद थाने पहुंची महिला से सामूहिक दुष्कर्म किए जाने के मामले में दोषी पाए गए दो पुलिसकर्मियों को अदालत ने 20 साल कठोर कारावास की सजा सुनाई है।फास्ट ट्रैक कोर्ट द्वितीय के न्यायाधीश प्रबोध कुमार वर्मा की कोर्ट ने शुक्रवार को तत्कालीन थाना प्रभारी रहे,सेवानिवृत्त सीओ बृजमोहन यादव और तत्कालीन एसएसआई और वर्तमान में इंस्पेक्टर वेदपाल सिंह उर्फ वेगपाल सिंह को सजा सुनाते हुए प्रत्येक पर एक लाख रुपये का अर्थदंड भी लगाया है।अदालत ने दोनों को धमकी देने के मामले में पांच-पांच साल के साधारण कारावास और 20-20 हजार रुपये के जुर्माने से भी दंडित किया है। दोनों मामलों में सजाएं साथ-साथ चलेंगी।
घटना छह अगस्त 2015 की है।पीड़िता अपने पति को पुलिस हिरासत से छुड़ाने की गुहार लेकर देवबंद थाने पहुंची थी। आरोप था कि तत्कालीन थाना प्रभारी के सरकारी आवास पर उसके साथ सामूहिक दुष्कर्म किया गया और विरोध करने पर जान से मारने की धमकी दी गई।पीड़िता ने स्थानीय पुलिस अधिकारियों से शिकायत की,लेकिन कार्रवाई नहीं हुई। इसके बाद हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया। सात नवंबर 2017 को हाईकोर्ट के आदेश पर चार आरोपियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज हुआ। जांच सीबीसीआईडी को सौंपी गई।
सीबीसीआईडी ने अंतिम रिपोर्ट लगा दी थी,जिसे पीड़िता ने अदालत में चुनौती दी।लंबी कानूनी लड़ाई और सुनवाई के बाद अदालत ने दो आरोपियों को दोषी करार दिया था। अब सजा का आदेश सुनाते हुए दोनों को जेल भेज दिया गया। बृजमोहन यादव सीओ पद से सेवानिवृत्त है और वेगपाल सिंह की तैनाती फिरोजाबाद में बताई गई है।
सामूहिक दुष्कर्म के मामले में लगाया गया एक-एक लाख रुपये का जुर्माना पूरा पीड़िता को दिया जाएगा।धमकी देने के मामले में वसूले गए जुर्माने की 75 प्रतिशत धनराशि पीड़िता को मिलेगी और शेष धनराशि राजकोष में जमा की जाएगी। जुर्माना अदा नहीं करने पर दोनों दोषियों को अतिरिक्त कारावास भी भुगतना होगा।
पूर्व में हुए हमलों और लगातार दर्ज मुकदमों से डरा पीड़ित परिवार शुक्रवार को अदालत पहुंचने के लिए भी सुरक्षा को लेकर परेशान रहा।अनहोनी की आशंका से परिवार ने पुलिस अधिकारियों से फोन पर सुरक्षा मांगी,लेकिन आरोप है कि कई बार कॉल करने के बावजूद किसी अधिकारी ने फोन नहीं उठाया।आखिरकार परिवार को रास्ता बदलकर चोरी-छिपे सहारनपुर कचहरी पहुंचना पड़ा।
पीड़ित पक्ष के मुताबिक शुक्रवार सुबह 8:53 बजे देवबंद कोतवाली के सीयूजी नंबर पर तीन बार कॉल की गई। शुरुआत में फोन नहीं उठा और बाद में नंबर ब्लॉक कर दिया गया। सुबह 9:02 बजे कचहरी चौकी प्रभारी को पांच बार फोन किया,लेकिन कॉल रिसीव नहीं हुई। सुबह 9:13 बजे एसएसपी को भी दो बार कॉल की गई,लेकिन बात नहीं हो सकी। पीड़िता ने भी 9:28 बजे कोतवाली के सीयूजी नंबर पर नौ बार फोन किया। इससे पहले 9:03 बजे चौकी प्रभारी से बात हुई तो उन्होंने उच्चाधिकारियों से संपर्क करने को कहा। परिवार पहले टपरी-लाखनौर मार्ग से सहारनपुर आता था, लेकिन शुक्रवार को देवबंद से भायला,बड़गांव और मल्हीपुर रोड होते हुए बाइक से कचहरी पहुंचा। लगातार हमलों और मुकदमों से परेशान परिवार पहले राष्ट्रपति और मुख्यमंत्री से इच्छा मृत्यु की मांग भी कर चुका है।