नई दिल्ली।आम आदमी पार्टी में शुक्रवार को बड़ा भूचाल आ गया।लगभग 15 साल तक अरविंद केजरीवाल के भरोसेमंद साथी रहे राघव चड्ढा ने भारतीय जनता पार्टी का दामन थाम लिया है।नई दिल्ली के कॉन्स्टिट्यूशन क्लब में प्रेस कॉन्फ्रेंस में राघव अकेले नहीं थे,उनके साथ राज्यसभा सांसद संदीप पाठक और अशोक कुमार मित्तल भी मौजूद थे। राघव ने घोषणा की कि राज्यसभा में आप के 10 में से 7 सांसद भाजपा में विलय कर रहे हैं। इस विलय के चलते उनकी राज्यसभा सदस्यता पर कोई आंच नहीं आएगी।
राघव चड्ढा और आम आदमी पार्टी में कड़वाहट लंबे समय से बढ़ रही थी।पिछले एक साल से राघव पार्टी की गतिविधियों से भी दूर थे,इसे लेकर समय-समय पर सवाल खड़े होते रहे। अरविंद केजरीवाल के जेल जाने के बाद आप के प्रदर्शन से लेकर उनके शराब घोटाले में आरोपों से मुक्त होने तक राघव ने कई बड़े मामलों में चुप्पी साधे रखी। तभी से अटकलें शुरू हो गईं थी कि आप के नेतृत्व और राघव के बीच सबकुछ ठीक नहीं है।
इसका बहुत बड़ा कारण 2 अप्रैल की घटना बनी। 2 अप्रैल को आप ने राघव चड्ढा को राज्यसभा में डिप्टी लीडर के पद से हटाकर अशोक कुमार मित्तल को यह जिम्मेदारी सौंप दी थी।इसी के साथ राज्यसभा में उन्हें बोलने के लिए समय ना देने के लिए आप ने पत्र भी लिख दिया।आप के अंदर राघव को दरकिनार करने और बोलने का समय छीनने की कोशिशों ने इस बगावत की पटकथा लिख दी थी।
राघव चड्ढा को डिप्टी लीडर पद से हटाने के बाद सौरभ भारद्वाज,आतिशी और पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान के गंभीर आरोपों ने आग में घी डालने का काम किया। उन्होंने राघव पर बीजेपी और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से डरकर आम आदमी पार्टी के मुद्दों को ना उठाने का आरोप लगाया।दिल्ली आम आदमी पार्टी के प्रमुख सौरभ भारद्वाज ने राघव पर आरोप लगाया कि वे संसद में भाजपा सरकार का कड़े राजनीतिक मुद्दों पर सामना करने के बजाय समोसे की कीमतों जैसे मुद्दों को उठाकर सॉफ्ट पीआर कर रहे हैं।
पूर्व मुख्यमंत्री आतिशी ने इससे भी आगे बढ़कर कई आरोप लगाए।आतिशी ने कहा,चड्ढा ने मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ विपक्ष के महाभियोग प्रस्ताव पर हस्ताक्षर करने से इनकार कर दिया था।पश्चिम एशिया के तेल संकट के दौरान एलपीजी की कमी का मुद्दा नहीं उठाया था और 2024 में केजरीवाल की गिरफ्तारी के दौरान जब आम आदमी पार्टी के नेता पुलिस स्टेशनों पर विरोध प्रदर्शन कर रहे थे,तब राघव आंखों के ऑपरेशन के लिए लंदन में थे।उन्होंने पूछा था,आप भाजपा से इतना क्यों डरते हैं।
राघव चड्ढा ने इस अलगाव के पीछे गंभीर कारण गिनाए।राघव ने भावुक होते हुए कहा,मैंने इस पार्टी को अपने खून-पसीने से सींचा है, लेकिन अब यह अपने सिद्धांतों और मूल्यों से पूरी तरह भटक चुकी है। राघव ने खुद को गलत पार्टी में सही आदमी बताया।भ्रष्टाचार के आरोपों की ओर इशारा करते हुए राघव ने कहा कि उनकी दूरियों की असली वजह यह थी कि वे उनके अपराधों का हिस्सा नहीं बनना चाहते थे।
बता दें कि यह घटनाक्रम मुख्यमंत्री भगवंत मान और अरविंद केजरीवाल के लिए किसी आपदा से कम नहीं है।राज्यसभा जाने वाले 7 में से 6 सांसद पंजाब से थे। अब राज्यसभा में पंजाब से आप का सिर्फ एक प्रतिनिधि (बलबीर सिंह सीचेवाल) बचा है। पंजाब विधानसभा चुनाव में अब महज 10 महीने का समय शेष है। ऐसे में राघव चड्ढा जैसे कद्दावर नेता का भाजपा में जाना और भ्रष्टाचार के आरोपों पर घेरना आप को बड़ी चोट पहुंचा सकता है।