धनंजय सिंह
प्रतापगढ़।उत्तर प्रदेश के प्रतापगढ़ जिले के कुंडा में साल 2013 में हुए सीओ जियाउल हक हत्याकांड में पूर्व कैबिनेट मंत्री रघुराज प्रताप सिंह उर्फ राजा भइया को बड़ी राहत मिली है।दोबारा जांच के बाद सीबीआई की ओर से दाखिल फाइनल रिपोर्ट को अदालत ने स्वीकार कर लिया और मामले में आगे की कार्रवाई की मांग खारिज कर दी।इस हत्याकांड में राजा भइया की भूमिका को लेकर लंबे समय तक जांच और कानूनी प्रक्रिया चली।
सीओ जियाउल हक की पत्नी परवीन आजाद ने दर्ज कराई थी एफआईआर
सीओ जियाउल हक की पत्नी परवीन आजाद की ओर से दर्ज कराई गई एफआईआर में राजा भइया समेत कुछ अन्य लोगों को आरोपी बनाया गया था। सीबीआई की शुरुआती जांच के बाद राजा भइया और कुछ अन्य लोगों के खिलाफ फाइनल रिपोर्ट दाखिल की गई थी।इसके बाद परवीन आजाद ने इस रिपोर्ट पर आपत्ति जताई और मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद राजा भइया की भूमिका की दोबारा जांच की गई। 2023 में दोबारा जांच के बाद सीबीआई ने फिर फाइनल रिपोर्ट दाखिल की थी।अब सीबीआई कोर्ट ने इस फाइनल रिपोर्ट को स्वीकार करते हुए आगे की कार्रवाई की मांग खारिज कर दी है।इससे अब राजा भइया के खिलाफ इस मामले में चल रही कानूनी प्रक्रिया पर फिलहाल विराम लगा है।
2 मार्च 2013 को हुई थी सिओ की हत्या
बता दें कि 2 मार्च 2013 को कुंडा के बलीपुर गांव में प्रधान नन्हे यादव की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी,इसके बाद गांव में जबरदस्त तनाव बढ़ गया और नन्हे यादव के समर्थक बड़ी संख्या में वहां पहुंच गए।इसी दौरान पुलिस टीम मौके पर पहुंची और हालात को काबू करने के दौरान नन्हे यादव के भाई सुरेश यादव की भी हत्या हो गई,इसके बाद भीड़ और उग्र हो गई और पुलिस टीम पर हमला बोल दिया।इसी दौरान कुंडा के तत्कालीन सीओ जियाउल हक भीड़ के बीच फंस गए।बाद में जियाउल हक का शव गांव में मिला।जियाउल हक की हत्या के बाद यह मामला सुर्खियों में छा गया था।
राजा भइया को देना पड़ा था मंत्री पद से इस्तीफा
सीओ जियाउल हक की हत्या के बाद तत्कालीन सपा सरकार पर भी सवाल उठे थे।उस समय राजा भइया को मंत्री पद से इस्तीफा देना पड़ा था।बाद में मामले की जांच सीबीआई को सौंपी गई। सीबीआई की विशेष अदालत ने अक्टूबर 2024 में 10 आरोपियों को दोषी ठहराया और उन्हें उम्रकैद की सजा सुनाई थी,इनमें फूलचंद यादव,पवन यादव,मंजीत यादव, घनश्याम सरोज,राम लखन गौतम,छोटेलाल यादव,राम आसरे,पन्नालाल पटेल,शिवराम पासी और जगत बहादुर पटेल उर्फ बुल्ले पटेल शामिल थे।राजा भइया को इस मामले में सीबीआई की जांच के बाद क्लीन चिट मिल चुकी थी। अब दोबारा जांच के बाद दाखिल फाइनल रिपोर्ट को अदालत द्वारा स्वीकार किए जाने से राजा भइया के खिलाफ इस मामले में आगे की कार्रवाई की मांग भी खारिज हो गई है।