कृष्ण जन्मभूमि पर बोलेंगे तो फंसेंगे अखिलेश यादव,चुप रहे तो घिरेंगे
कृष्ण जन्मभूमि पर बोलेंगे तो फंसेंगे अखिलेश यादव,चुप रहे तो घिरेंगे

06 Sep 2026 |   24



 

धनंजय सिंह।अयोध्या में राम मंदिर निर्माण के बाद भगवा पार्टी भारतीय जनता पार्टी की नजर अब धर्म नगरी मथुरा पर है।हिंदुत्व के फायर ब्रांड मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने ब्रज की धरती से जिस अंदाज में मोर्चा संभाला,इससे साफ है कि 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले भाजपा ने भगवान श्रीकृष्ण की नगरी को भी अपने बड़े सियासी मैदान के तौर पर तैयार करना शुरू कर दिया है।सीएम योगी ने भगवान श्रीकृष्ण का नाम लिया।बाबर और औरंगजेब का जिक्र करते हुए विपक्ष पर सीधा हमला बोला।सीएम योगी ने कहा कि जिनकी आस्था बाबर और औरंगजेब में होगी,क्या वो आपकी आस्था का सम्मान कर पाएंगे।

सपा मुखिया अखिलेश यादव को सीएम योगी ने घेरा

संदेश साफ है।रामनगरी अयोध्या के बाद अब धर्म नगरी मथुरा और 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले फिर वही सवाल आस्था किसकी,किस सियासी दल का क्या स्टैंड।एक सवाल यह भी सीएम योगी का ये हमला सबसे ज्यादा किस पर है तो इसका जवाब कोई भी बता देगा कि अखिलेश यादव पर,क्योंकि श्रीकृष्ण जन्मभूमि का मुद्दा कोर्ट में है और भाजपा अब इसे अदालत की फाइलों से निकालकर सियासी मैदान में ला रही है।मामला लगभग 13.37 एकड़ जमीन का है,जिसमें लगभग 11 एकड़ श्रीकृष्ण जन्मस्थान और 2.37 एकड़ शाही ईदगाह से जुड़ा है।हिंदू पक्ष का दावा है कि ईदगाह मंदिर की जमीन पर बनी।मुस्लिम पक्ष 1968 के समझौते और प्लेसेज ऑफ वर्शिप एक्ट का हवाला देता है।मामला कोर्ट में है, लेकिन सियासत कोर्ट से बहुत आगे निकल चुकी है।

श्रीकृष्ण जन्मभूमि-शाही ईदगाह विवाद

विवाद 13.37 एकड़ जमीन पर मालिकाना हक का है,11 एकड़ में श्रीकृष्ण मंदिर, 2.37 एकड़ में शाही ईदगाह।हिंदू पक्ष का दावा है कि मस्जिद श्रीकृष्ण जन्मस्थान मंदिर तोड़कर बनाई गई। 1670 में औरंगज़ेब के आदेश पर मंदिर तोड़े जाने का उल्लेख,1770 में मराठा शासन के दौरान केशवदेव मंदिर का पुनर्निर्माण हुआ,1815 में अंग्रेजों ने जमीन नीलाम की, इसे काशी नरेश ने खरीदा।

मालिकाना हक और पूजा के अधिकार को लेकर मामला कोर्ट में लंबित

यहीं अखिलेश यादव की असली मुश्किल शुरू होती है। मथुरा पर बोलेंगे तो क्या बोलेंगे,मंदिर की मांग का समर्थन करेंगे तो भाजपा कहेगी कि देखिए,अखिलेश भी हमारे नैरेटिव पर आ गए।विरोध करेंगे तो भाजपा हिंदू आस्था के सवाल पर घेरने का मौका नहीं छोड़ेगी।अगर चुप रहेंगे तो भाजपा पूछेगी श्रीकृष्ण जन्मभूमि पर अखिलेश का स्टैंड क्या है। अखिलेश यादव बोलेंगे तो फंसेंगे,चुप रहेंगे तो घिरेंगे।ये सिर्फ एक धार्मिक मुद्दा नहीं है,ये 2027 के विधानसभा चुनाव की गणित भी है। ब्रज क्षेत्र में लगभग 19 जिले,65 विधानसभा है। 2017 में भाजपा ने यहां 57 सीटों पर भगवा लहराया था।2022 में भी भाजपा ने 53 सीटों पर भगवा लहराया,लेकिन 2024 लोकसभा चुनाव में यहां 5 सीट पर साइकिल चली।

ब्रज क्षेत्र का सियासी गणित,19 जिले,13 लोकसभा,65 विधानसभा 

2017 विधानसभा चुनाव में भाजपा 57,सपा ने 8 सीटें जीती,2022 विधानसभा चुनाव में भाजपा 53,सपा 12 सीटें जीती। 2014 लोकसभा चुनाव में भाजपा 13 में 10 सीटें जीती,2019 लोकसभा चुनाव में भाजपा 13 में 12 सीटें जीती,2024 लोकसभा चुनाव में भाजपा 8,सपा 5 सीटें जीती,2024 के विधानसभा चुनाव में बढ़त,भाजपा 42, सपा 23 सीट।

भाजपा के लिए मथुरा सिर्फ भगवान श्रीकृष्ण की जन्मभूमि नहीं, बल्कि 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले अपनी पकड़ मजबूत करने का सियासी मौका है।अखिलेश यादव के लिए मुश्किल ये है कि एक तरफ हिंदू वोटर के सामने अपना स्टैंड साफ करना है तो दूसरी तरफ मुस्लिम वोटर को नाराज भी नहीं करना है।

श्रीकृष्ण जन्मभूमि समझौते की पूरी टाइमलाइन

1944 में उद्योगपति जुगल किशोर बिड़ला ने राजा पटनीमल के वारिसों से जमीन खरीदी,1951 में भगवान श्रीकृष्ण जन्मस्थान ट्रस्ट का गठन,जमीन ट्रस्ट को सौंपी गई,1953 में ट्रस्ट ने मंदिर निर्माण शुरू कराया,1958 में मंदिर निर्माण पूरा हुआ,भगवान श्रीकृष्ण जन्मस्थान सेवा संस्थान का गठन हुआ,1968 में सेवा संस्थान और मुस्लिम पक्ष के बीच समझौता हुआ कि मंदिर और शाही ईदगाह दोनों साथ रहेंगे।
ट्रस्ट का दावा कि 1968 का समझौता सेवा संस्थान ने किया था।ट्रस्ट का दावा,श्रीकृष्ण जन्मस्थान ट्रस्ट समझौते को मान्यता नहीं देता।

यानी की भाजपा सवाल पूछ रही है कि।अखिलेश यादव जवाब दें तो किसे दें और इसी वजह से मथुरा अब सिर्फ मंदिर-मस्जिद की बहस नहीं।योगी बनाम अखिलेश की सियासी परीक्षा बनता जा रहा है,क्योंकि अयोध्या में भाजपा ने राम के नाम पर अपना नैरेटिव गढ़ा।

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