कानपुर के पांच ब्रांड भारत समेत विश्व में मचा रहे तहलका, घर-घर में बोलता है इनका जादू
कानपुर के पांच ब्रांड भारत समेत विश्व में मचा रहे तहलका, घर-घर में बोलता है इनका जादू

26 Sep 2026 |   22



 

 कानपुर।किसी भी देश की अर्थव्यवस्था में वहां के बिजनेस में बहुत ही अहम रोल निभाती है।जब किसी देश का ब्रांड वैश्विक स्तर पर एक अलग पहचान बनाता है तो वह ब्रांड कहीं न कहीं अपने देश,राज्य या फिर जिले की आर्थिक नींव को बहुत मजबूत कर रहा होता है।उत्तर प्रदेश के कानपुर शहर के टॉप 5 ब्रांड्स ने कुछ ऐसा ही किया है।

कानपुर सिर्फ उद्योगों और चमड़े के कारोबार के लिए ही नहीं जाना जाता। कानपुर ने ऐसे कई बड़े ब्रांड भी दिए हैं,जिनकी पहचान आज देश के अलग-अलग हिस्सों में है और तो और कुछ कंपनियां विदेशों तक अपना कारोबार पहुंचा चुकी हैं।
कानपुर की मेहनत,कारोबार की समझ और लगातार आगे बढ़ने की सोच ने इन कंपनियों को बड़ा मुकाम दिलाया। आज इनमें से कुछ नाम भारतीय घरों में रोजमर्रा के इस्तेमाल का हिस्सा बन चुके हैं,कुछ ने अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी अपनी जगह बनाई है।कानपुर के 5 ब्रांड्स,जिन्होंने बिजनेस की दुनिया में अपनी एक अलग पहचान बनाई है।ये 5 बड़े ब्रांड्स तहलका मचा रहे हैं। इनमें घड़ी डिटर्जेंट,रेड टेप,जेके सीमेंट,कमला पसंद और घड़ी डिटर्जेंट हैं।

घड़ी डिटर्जेंट की कहानी कानपुर से जुड़ी उन कारोबारी कहानियों में शामिल है,जिसमें छोटे स्तर से शुरुआत करके बड़े बाजार तक पहुंच गई। वर्ष 1987 में मुरलीधर और बिमल ज्ञानचंदानी ने एक छोटे कमरे से साबुन बनाने का काम शुरू किया था।शुरुआती दिनों में तैयार सामान को ग्राहकों तक पहुंचाने के लिए पैदल और साइकिल का सहारा लिया जाता था। धीरे-धीरे लोगों के बीच उत्पाद की पहचान बढ़ी और कारोबार का विस्तार होता गया।बाद में घड़ी डिटर्जेंट ने FMCG बाजार में अपनी मजबूत पहचान बनाई। इसका चर्चित स्लोगन पहले इस्तेमाल करें,फिर विश्वास करें लंबे समय तक ग्राहकों के बीच इसकी पहचान बना रहा। आज RSPL Group कई तरह के उत्पादों के कारोबार से जुड़ा हुआ है।

कानपुर का चमड़ा उद्योग दशकों से देश और विदेश में अपनी पहचान रखता है।इसी औद्योगिक माहौल से निकला Red Tape भी आज फुटवियर और फैशन से जुड़े प्रमुख ब्रांड्स में गिना जाता है।इसकी जड़ें मिर्जा परिवार के कारोबार से जुड़ी हैं। वर्ष 1976 में शुरू हुए पारिवारिक टेनरी कारोबार ने आगे चलकर बड़े व्यवसाय का रूप लिया। वर्ष 1996 में राशिद अहमद और तौसीफ मिर्जा ने Red Tape को एक ब्रांड के तौर पर आगे बढ़ाया।

कानपुर के चमड़ा कारोबार से निकला यह ब्रांड धीरे-धीरे भारतीय बाजार से बाहर भी पहुंचा। आज इसके उत्पाद कई अंतरराष्ट्रीय बाजारों में उपलब्ध हैं। इस तरह कानपुर की लेदर इंडस्ट्री की पहचान को Red Tape ने एक नए ब्रांड नाम के साथ आगे बढ़ाया।

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