लखनऊ।उत्तर प्रदेश में 2027 में होने विधानसभा चुनाव को लेकर प्रदेश की लगभग 21 फीसदी दलित वोटों को लेकर सियासत तेज हो गई हैं। इसी क्रम में समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव ने सोमवार को यूपी की आरक्षित (रिज़र्व) विधानसभा सीटों के पदाधिकारियों के साथ अहम बैठक की।अखिलेश ने बैठक के जरिए दलित वोटों पर पार्टी की रणनीति को धार देने की कोशिश की। सपा का ध्यान यूपी की कुल 86 रिज़र्व सीटों में से उन 65 सीटों पर है,जहां पिछले विधानसभा चुनाव में पार्टी को हार का सामना करना पड़ा था। सपा ने प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र में करीब 27 हजार वोट बढ़ाने का लक्ष्य तय किया है।सपा का मुख्य फोकस दलितों को अपने साथ जोड़ने पर है।
अखिलेश लगातार उठा रहे हैं दलितों के मुद्दे
सपा मुखिया अखिलेश यादव लगातार दलित और संविधान से जुड़े मुद्दे उठा रहे हैं।हाल ही में अखिलेश ने दावा किया कि भाजपा सरकार के कार्यकाल में उत्तर प्रदेश के 72 जिलों में डॉ. भीमराव अंबेडकर की 151 मूर्तियां तोड़ी जा चुकी हैं। सपा की रणनीति में पार्टी के संगठन को दलित समाज के बीच मजबूत करना भी शामिल है।सूत्रों के मुताबिक बसपा मुखिया मायावती के पारिवारिक झगड़ो में फंसे होने का फायदा सपा उठाना चाहती है।सपा छात्र सभा की नीली ड्रेस और अखिलेश पहले ही नीला गमछा पहन चुके है और छात्र सभा की ड्रेस नीली कर चुके हैं ।
दलित सपा को वोट नहीं देगा
भाजपा भी अखिलेश यादव के इस दांव का काट ढूंढ रही है। उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक का कहना है कि अखिलेश यादव चाहें अपना पूरा शरीर नीला कर लें,तब भी दलित समाज समाजवादी पार्टी को वोट नहीं देगा। वहीं भाजपा 2024 के लोकसभा चुनावों में हुए दलित वोट बैंक के नुकसान की भरपाई में जुट गई है।योगी सरकार ने डॉ. भीमराव अंबेडकर और अन्य दलित महापुरुषों की मूर्तियों,स्मारकों और पार्कों के सुंदरीकरण और सुरक्षा के लिए 400 करोड़ रुपये का बजट जारी किया है। इसके तहत हर विधानसभा में लगभग 10 स्मारकों और मूर्तियों के आसपास बाउंड्री वॉल और ग्रिल लगाने का काम किया जाएगा।
बसपा का वोट भाजपा में हुआ शिफ्ट
बता दें कि बसपा मुखिया मायावती दलितों की सबसे बड़ी नेता मानी जाती रही हैं।मायावती चार बार यूपी की मुख्यमंत्री रहीं। मायावती ने 2017 में बहुमत की सरकार बनाई, लेकिन 2014 से बड़े पैमाने पर दलित वोट बसपा से भाजपा में शिफ्ट हो गया। एक सर्वे के मुताबिक 2024 में मायावती को 44 फीसदी जाटव वोट मिला,इंडिया गठबन्धन को 25 फीसदी और एनडीए को 24 फीसदी वोट मिला। गैर जाटव वोट में इंडिया गठबन्धन को 56 फीसदी,एनडीए को 29 फीसदी और बसपा को सिर्फ 15 फीसदी वोट मिले।अब अखिलेश यादव की कोशिश है कि उनके दलित वोट बढ़े और भाजपा 2024 के लोकसभा चुनाव में दलित वोट के नुकसान की भरपाई करने की कोशिश में है।