बाजार घर-जमीन में अब भी भारतीयों की 57% दौलत, अगले 10 साल में बदल सकती है तस्वीर
बाजार घर-जमीन में अब भी भारतीयों की 57% दौलत, अगले 10 साल में बदल सकती है तस्वीर

15 Sep 2026 |   21



 

धनंजय सिंह।भारत में लोगों के लिए लंबे समय से घर,जमीन और सोने में पैसा लगाने के सबसे पसंदीदा तरीके रहे हैं।घर खरीदना सिर्फ रहने की जरूरत नहीं,बल्कि भविष्य के लिए संपत्ति बनाने का जरिया है,लेकिन अब धीरे-धीरे यह तस्वीर बदल रही है।लोग अपनी दौलत का अधिक हिस्सा शेयर, म्युचुअल फंड और दूसरे वित्तीय विकल्पों में लगाने लगे हैं।
वित्त वर्ष 2024-25 में लोगों की कुल संपत्ति का लगभग 57 फीसदी हिस्सा रियल एस्टेट में था।इसके अलावा लगभग 11 फीसदी दौलत सोने में थी।यानी दोनों को मिला दें तो लोगों की लगभग 68 फीसदी संपत्ति अब भी घर-जमीन और सोने जैसे विकल्पों में है।

8 साल में कितना बदला निवेश का तरीका

 बदलाव पहले ही शुरू हो चुका है।वित्त वर्ष 2016-17 में लोगों की कुल संपत्ति का लगभग 67 फीसदी हिस्सा रियल एस्टेट में था।वित्त वर्ष 2024-25 में यह घटकर 57 फीसदी रह गया।यानी करीब आठ साल में इसकी हिस्सेदारी 10 प्रतिशत अंक कम हुई है।इसके उलट शेयर और म्युचुअल फंड की हिस्सेदारी बढ़ी है।वित्त वर्ष 2016-17 में परिवारों की कुल संपत्ति में शेयर और म्युचुअल फंड की हिस्सेदारी लगभग 4 फीसदी थी, जो 2024-25 में बढ़कर लगभग 8 फीसदी हो गई। यानी हिस्सेदारी लगभग दोगुनी हो चुकी है।

अगले 10 साल में कैसी हो सकती है तस्वीर

वित्त वर्ष 2034-35 तक लोगों की संपत्ति में रियल एस्टेट की हिस्सेदारी और घटकर लगभग 54 फीसदी रह सकती है। वहीं शेयर और म्युचुअल फंड की हिस्सेदारी बढ़कर लगभग 12 फीसदी तक पहुंच सकती है। यानी आज के मुकाबले शेयर और म्युचुअल फंड को परिवारों की दौलत में कहीं ज्यादा जगह मिल सकती है।हालांकि इसका मतलब यह नहीं है कि लोग घर-जमीन या सोने से पूरी तरह दूरी बना रहे हैं।भारतीय परिवारों की बैलेंस शीट अब भी विकसित देशों के मुकाबले जमीन-मकान जैसी संपत्तियों पर काफी ज्यादा निर्भर है। समय के साथ वित्तीय विकल्पों की हिस्सेदारी बढ़ने की गुंजाइश है।

शेयरों में भी तेजी से बढ़ी हिस्सेदारी

इस बदलाव की एक और तस्वीर शेयर बाजार में दिखती है। पिछले एक दशक में लोगों की कुल संपत्ति में शेयरों की हिस्सेदारी 2.3 गुना बढ़ी है। मार्च 2015 में यह लगभग 2.9 फीसदी थी, जो मार्च 2025 में बढ़कर लगभग 6.6 फीसदी पहुंच गई।इसके बावजूद भारत अभी कई दूसरे देशों से काफी पीछे है।भारतीय लोगों की कुल संपत्ति में शेयरों की हिस्सेदारी लगभग 7 फीसदी है।अमेरिका में यह 26 फीसदी, ताइवान में 17 फीसदी, यूरो क्षेत्र में 12 फीसदी और जापान में 11 फीसदी है।

म्युचुअल फंड में भी तेजी से आ रहा पैसा

म्युचुअल फंड उद्योग की बढ़ती रकम भी इसी बदलाव की तरफ इशारा करती है। जुलाई 2021 में भारत के म्युचुअल फंड उद्योग का एयूएम करीब 35.32 लाख करोड़ रुपए था। जुलाई 2026 तक यह बढ़कर 85.76 लाख करोड़ रुपए हो गया। यानी पांच साल में यह दोगुने से भी ज्यादा हो गया। इस दौरान इसकी सालाना औसत बढ़ोतरी करीब 19 फीसदी रही।एसआईपी भी इस बदलाव में बड़ी भूमिका निभा रही है। जुलाई 2026 में हर महीने एसआईपी के जरिए आने वाली रकम 31,961 करोड़ रुपए पहुंच गई।एसआईपी ने लोगों को कभी-कभार पैसा लगाने के बजाय नियमित रूप से निवेश करने के लिए बढ़ावा दिया है।

निवेशकों के लिए कहां बन सकता है मौका

अगर लोग आने वाले वर्षों में अपनी बचत का ज्यादा हिस्सा वित्तीय विकल्पों में लगाते हैं तो इसका असर सिर्फ म्युचुअल फंड तक सीमित नहीं रहेगा।यह बदलाव म्युचुअल फंड, बीमा, पेंशन, सीधे शेयर निवेश और दूसरे मैनेज्ड निवेश विकल्पों में दिखाई दे रहा है। ऐसे में एसेट मैनेजमेंट, बीमा, पेंशन और निवेश से जुड़ी दूसरी वित्तीय कंपनियों के लिए लंबे समय में कारोबार बढ़ाने का मौका बन सकता है।

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