भाजपा का धार्मिक मान्यता से बदला प्लान,अब काशी नहीं संगम नगरी से गंगाजल लेकर भाजपाई जाएंगे गुजरात
भाजपा का धार्मिक मान्यता से बदला प्लान,अब काशी नहीं संगम नगरी से गंगाजल लेकर भाजपाई जाएंगे गुजरात

11 Sep 2026 |   47



 

लखनऊ।आध्यात्मिक नगरी काशी से गंगाजल लेकर 1350 किलोमीटर दूर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के जन्म क्षेत्र (वडनगर) में जलाभिषेक की तैयारी में जुटी भारतीय जनता पार्टी ने धार्मिक मान्यताओं की वजह से कार्यक्रम में बदलाव किया है।

शास्त्रों के मुताबिक आध्यात्मिक नगरी काशी का जल लेकर घर और मंदिर में नहीं रखा जाता,ऐसे में भाजपा प्रयागराज और मिर्जापुर से गंगाजल मंगवाकर 17 सितंबर को ढाई सौ बाइकों पर पांच सौ कार्यकर्ताओं को गुजरात के वडनगर के लिए रवाना करेगी।

उत्तर प्रदेश से दस मार्गों से होकर वडनगर जाने वाले भाजपाइयों का हर 25 किलोमीटर पर स्वागत होगा। प्रति सौ किलोमीटर पर रात्रि विश्राम और गांव में चौपाल की व्यवस्था होगी।पांच राज्यों से गुजरने वाली यात्रा के बहाने कार्यकर्ता भाजपा की चुनावी जमीन मजबूत भी करेंगे।

नरेन्द्र मोदी के सार्वजनिक जीवन के 25 वर्ष पूरे होने पर भाजपा एक माह तक सेवा संकल्प अभियान चलाएगी।इसी कड़ी में आध्यात्मिक नगरी काशी से भाजपा युवा मोर्चा के पांच सौ कार्यकर्ताओं को गंगाजल लेकर गुजरात के वडनगर में भगवान हाटकेश्वर महादेव का जलाभिषेक करने का कार्यक्रम बना,लेकिन पंडितों ने काशी के गंगाजल से जलाभिषेक को शास्त्र विरुद्ध बताया।

अब भाजपा ने शुभ यात्रा के लिए प्रयागराज और मिर्जापुर से गंगाजल मंगवाकर 17 सितंबर को यात्रा निकालने का मुहूर्त रखा है। उधर गुजरात के वडनगर में शर्मिष्ठा तालाब से जल लेकर दस टोलियां आध्यात्मिक नगरी में बाबा विश्वनाथ का जलाभिषेक करने के लिए निकलेंगी।दोनों तरफ से निकली टीमें यूपी,मध्यप्रदेश,राजस्थान और महाराष्ट्र होते हुए हररोज 60 से 80 स्थानों पर पहुंचेंगी।अंत में काशी में गंगा घाट पर एक भव्य कार्यक्रम आयोजित होगा।

प्रत्येक टोली हररोज तीन से चार गांवों में 60 मिनट का कार्यक्रम करेगी। गुजरात और यूपी से दस-दस एलइडी वाहन संचालित किए जाएंगे। यात्रा जहां से निकलेगी, उन राज्यों में एक-एक यात्रा प्रभारी होंगे।

भाजपा युवा मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष रोहित मिश्रा ने बताया कि स्कंद पुराण में वर्णित है कि काशी में गंगा केवल जीवनदायिनी नहीं बल्कि वे उन आत्माओं के लिए मोक्षदायिनी बन जाती हैं। काशी से गंगाजल घर या अन्यत्र ले जाने में उसमें जीव का कोई सूक्ष्म अंश भी आ सकता है,जिसे उसकी मोक्ष की राह में बाधा माना जाता है। इसीलिए प्रयागराज से गंगाजल मंगाया गया है।

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