मायावती के सियासी चक्रव्यूह में फंस गए ससुर और दामाद,अशोक ने संन्यास लिया तो आकाश को किया आजाद
मायावती के सियासी चक्रव्यूह में फंस गए ससुर और दामाद,अशोक ने संन्यास लिया तो आकाश को किया आजाद

10 Sep 2026 |   28



 

धनंजय सिंह।बहुजन समाज पार्टी की पिछले 24 घंटे में सियासत 360 डिग्री पलट गई।सियासत की महा खिलाड़ी बसपा मुखिया मायावती ने जो फैसला लिया है।सियासी धुरंधरों को इसकी भनक तक को नहीं लगी। मायावती ने पहले आकाश आनंद की वापसी के लिए उनके ससुर अशोक सिद्धार्थ को संन्यास की सलाह दी।जब अशोक सिद्धार्थ ने दामाद आकाश के करियर के लिए संन्यास की कुर्बानी तो मायावती ने सियासी ब्रह्मास्त्र से एक ही वार में ससुर और दामाद को चित कर दिया।

आकाश आनंद के ससुर अशोक सिद्धार्थ संन्यास देर से लिया,लेकिन मायावती ने सही फैसला तो करार दिया।बदले में आकाश आनंद को पार्टी से निकालकर सबके होश भी उड़ा दिए। 2027 विधानसभा चुनाव से पहले बसपा में चली सियासी रस्साकसी क्या गुल खिलाएगा यह तो आने वाला समय बताएगा,लेकिन मायावती ने एक बार फिर साबित कर दिया कि उनकी सियासत को समझ पाना बहुत टेढ़ी खीर है।

बुधवार को मायावती ने अशोक सिद्धार्थ के संन्यास की शर्त रखी थी।गुरुवार सुबह अशोक सिद्धार्थ ने सियासत से संन्यास का ऐलान कर दिया।अपने दामाद आकाश आनंद के लिए अशोक सिद्धार्थ ने कुर्बानी दे दी,लेकिन मायावती को यह भी रास नहीं आया।

अब मायावती को लग रहा है कि अशोक सिद्धार्थ और आकाश आनंद मिलकर माइंडगेम खेल रहे हैं।मायावती को यह नागवार गुजरा की आकाश आनंद ने उनकी पोस्ट को री-पोस्ट तक नहीं किया।ऐसे में पार्टी का क्या भला करेंगे,यह कहकर मायावती ने दूसरी बार आकाश आनंद को बसपा से बाहर कर दिया।

मायावती ने एक्स पर पोस्ट किया कि अशोक सिद्धार्थ के राजनीति से संन्यास लेने की घोषणा देर से उठाया गया,लेकिन सही कदम है।मायावती अगर यह फैसला काफी पहले ही लेती तो बसपा,बहुजन समाज,बहुजन मूवमेंट और अशोक सिद्धार्थ के दामाद आकाश आनंद को भी लगातार विपरीत परिस्थितियों का सामना नहीं करना पड़ता।न हीं विधानसभा आमचुनाव और खासकर यूपी में 5वीं बार सरकार बनाने की जबरदस्त तैयारियों के बीच बसपा और मूवमेंट के व्यापक हित के मद्देनजर इनके बारे में कई बार कड़े फैसले लेने की जरूरत न पड़ती।

अंबेडकरवादी राजनीति की परंपरा,परमपूज्य बाबा साहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर के पदचिन्हों पर चलने वाली जबरदस्त त्याग,तपस्या,संघर्ष व कुर्बानी आदि के साथ-साथ सबसे बढ़कर निजी व पारिवारिक स्वार्थ से दूर रहने की विशिष्ठ पहचान बसपा की है।

जितना महान लक्ष्य,उतनी ही बड़ी कुर्बानी की भी जरूरत होती है।कुल मिलाकर अशोक सिद्धार्थ का सियासत से संन्यास लेने का फैसला देर आए दुरुस्त आए की कहावत की तरह है,लेकिन अशोक सिद्धार्थ को अपने दामाद आकाश आनंद के उज्ज्वल भविष्य के साथ ही बसपा और इसके अंबेडकरवादी बहुजन मूवमेंट के व्यापक हित के प्रति थोड़ी भी सही चिंता होती तो वह बिना देरी किए कल फौरन ही सियासत से संन्यास लेने की घोषणा कर देते,जिससे आकाश आनंद की बसपा व मूवमेंट के प्रति सक्रियता काफी हद तक सुनिश्चित हो सकती थी।

मगर ऐसा कुछ नहीं होना यह साबित करता है कि अशोक सिद्धार्थ की नीयत में खोट और अभिलाषा कम नहीं हुई है, बल्कि अभी तक भी पूरी तरह से बरकरार है।इतना ही नहीं आकाश आनंद का भी अपने करियर से अधिक अपने ससुर अशोक सिद्धार्थ के प्रति इस हद तक लगाव कायम है। आकाश आनंद ने मायावती के एक्स पर तत्सम्बंधी पोस्ट को री-पोस्ट करना भी उचित नहीं समझा,हालांकि यह पोस्ट उनके ही सकारातमक और भलाई के लिए थी,जबकि इससे पहले आकाश आनंद मायावती की एक्स पर पोस्ट को री-पोस्ट करके अपनी वफादारी का सबूत देने का प्रयास करते रहे हैं।

इससे यही लगता है कि अशोक सिद्धार्थ और आकाश आनंद को बसपा व मूवमेंट की सफलता में कम और अपने निजी और पारिवारिक स्वार्थ का ज्यादा मोह है,जबकि बसपा ने ही अशोक सिद्धार्थ और आकाश आनंद को और अन्य अनेकों लोगों को भी फर्श से अर्श की बुलंदी पर पहुंचाया है और जिसके लिए उन सभी लोगों ने बसपा और उसके नेतृत्व का जितना भी वह लोग अहसान मानें व शुक्रगुजार हों,वह कम ही होगा।

मायावती ने एक्स पर पोस्ट में लिखा कि ऐसे हालात में आकाश आनंद को पार्टी व मूवमेंट के वास्तविक हित और इससे जुड़े अपने करियर की भी परवाह कम और रिश्ते-नातों आदि का मोह ज्यादा है,तो ऐसे में यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि आकाश आनंद डबल माइंड होकर फिर बीएसपी पार्टी व मूवमेंट का भला कैसे कर सकते हैं।इसीलिए पार्टी के लोगों को यही बेहतर लगता है कि उन्हें पहले 03 सितंबर को जिस प्रकार से पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक के अति-महत्वपूर्ण पद की सभी अहम जिम्मेदारियों से मुक्त कर दिया गया था, उसी प्रकार अब उन्हें पार्टी में भी आज से पूरी तरह से फ्री कर दिया जाए,इसलिए आकाश आनंद पार्टी में अब स्वतंत्र रहना चाहते हैं तो वह स्वतंत्र हैं,ऐस में अब इनको पार्टी से पूरे तौर से मुक्त कर दिया गया है।अंत में यही कहना है कि बीएसपी के सभी लोगों को विरोधियों के साम,दाम,दंड, भेद सभी प्रकार के हथकंडों का डटकर सामना करते हुए खासकर यूपी में फिर से पूर्ण बहमत की अपनी सर्वजन हिताय व सर्वजन सुखाय की जबरदस्त कानून-व्यवस्था व बेहतरीन विकास वाली आयरन हुकूमत बनाने के संघर्ष में पूरे जी-जान से,तन,मन,धन की लगन से लगे रहें, बस यही लक्ष्य सर्वोपरि है।

मायावती ने अपने भतीजे आकाश आनंद को 10 सितंबर को फिर से पार्टी से निष्कासित कर दिया है।इससे पहले पहली बार बसपा की प्राथमिक सदस्यता और सभी दायित्वों से 3 मार्च 2025 को निष्कासित किया था,इससे पहले मई 2024 में लोकसभा चुनाव के दौरान आकाश आनंद को केवल नेशनल कोऑर्डिनेटर और उत्तराधिकारी के पद से हटाया गया था,तब आकाश आनंद पार्टी से निकाला नहीं गया था।

मार्च 2025 में मायावती ने अनुशासनात्मक कारणों और उनके ससुर अशोक सिद्धार्थ के प्रभाव का हवाला देते हुए आकाश आनंद को पार्टी से बाहर करने का औपचारिक ऐलान किया था।अब एक बार फिर ससुर के साथ मिलीभगत कर डबल माइंड के चक्कर में मायावती ने अशोक सिद्धार्थ को पहले से ही पार्टी से निष्कासित कर दिया था,आज अशोक सिद्धार्थ ने सियासत से संन्यास का ऐलान भी कर दिया, लेकिन आकाश आनंद को अपनी शर्त के बावजूद बसपा में पद वापस करने के बजाय मायावती ने बाहर करने का फैसला ले लिया।

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