धनंजय सिंह।यह चौथा अवसर है जब भारत ब्रिक्स शिखर सम्मेलन की मेजबानी कर रहा है।इससे पहले भारत ने साल 2012 में नई दिल्ली), 2016 में गोवा और 2021 में कोविड-19 महामारी के कारण वर्चुअल सम्मेलन में ब्रिक्स शिखर सम्मेलनों की मेजबानी की थी।
साल 2001 में गोल्डमैन सैक्स में ग्लोबल इकनॉमिक रिसर्च के प्रमुख जिम ओ नील ने एक शोध पत्र में ब्रिक संक्षिप्त नाम गढ़ा था,जिसमें उन्होंने तर्क दिया था कि ब्राजील,रूस,भारत और चीन,या ब्रिक,चार तेजी से उभरती ऐसी बाजार अर्थव्यवस्थाएं हैं जो भविष्य के वैश्विक आर्थिक विकास की प्रमुख वाहक होंगी।
ब्रिक देशों की पहली सरकार-स्तरीय बैठक उनके विदेश मंत्रियों की थी,जो साल 2006 में संयुक्त राष्ट्र महासभा सत्र के मौके पर हुई थी।तब उनके एजेंडे में ईरान और पश्चिम एशिया की स्थिति शामिल थी।पश्चिम एशिया संघर्ष नई दिल्ली में हो रहे 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में भी चर्चा का एक प्रमुख विषय होगा,इसमें ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान शामिल हो रहे हैं।
साल 2010 में दक्षिण अफ्रीका के ब्रिक में शामिल होने के साथ इस समूह का नाम बदलकर ब्रिक्स कर दिया गया। मिस्र,इथियोपिया,ईरान,सऊदी अरब और यूएई 2024 में ब्रिक्स के पूर्ण सदस्य बने।इंडोनेशिया जनवरी 2025 में शामिल हुआ,जिससे यह 11 सदस्यीय समूह बन गया।
बेलारूस,बोलीविया,कजाकिस्तान,क्यूबा,मलेशिया, नाइजीरिया,थाईलैंड,युगांडा,उज्बेकिस्तान और वियतनाम पिछले साल ब्रिक्स के 10 साझेदार देशों के रूप में शामिल हुए।
संयुक्त रूप से ब्रिक्स देशों की आबादी दुनिया की लगभग 49.5 प्रतिशत और जीडीपी की लगभग 40 फीसदी है। वित्त वर्ष 2025 में ब्रिक्स राष्ट्रों का वैश्विक सामान निर्यात में लगभग 24 फीसदी और वैश्विक माल आयात में 19 फीसदी हिस्सा था।
वित्त वर्ष 2026 की पहली छमाही में ईरान के कुल माल व्यापार में सालाना आधार पर 22.8 फीसदी की गिरावट आई और संयुक्त अरब अमीरात के व्यापार में 10 फीसदी की कमजोरी दर्ज की गई।चीन के कुल माल व्यापार में लगभग 21 फीसदी बढ़ोतरी हुई,दक्षिण अफ्रीका के लिए यह आंकड़ा 20 फीसदी रहा। भारत और रूस के माल व्यापार में क्रमशः लगभग 12 और 11.6 फीसदी की बढ़ोतरी हुई।
वित्त वर्ष 2026 की पहली छमाही में अन्य 10 ब्रिक्स देशों का भारत के माल निर्यात में लगभग 20 फीसदी और भारत के माल आयात में 43 फीसदी हिस्सा था।हालांकि अन्य 10 ब्रिक्स देशों से भारत के आयात का मूल्य,उन्हें किए गए निर्यात के मूल्य का लगभग 3.7 गुना था।
ब्रिक का पहला संयुक्त बयान 16 बिंदुओं का था,जबकि 17वें संयुक्त बयान में 126 पैराग्राफ थे।इससे सदस्य देशों के बीच विभिन्न क्षेत्रों में इन वर्षों में बढ़ी सहभागिता जाहिर होती है
पहला ब्रिक शिखर सम्मेलन,9 जून 2009, येकातेरिनबर्ग, रूस
रूस,ब्राजील,भारत और चीन के नेताओं ने समूह के संस्थापक सदस्यों के रूप में भाग लिया। यह 2008 के वित्तीय संकट के बाद हुआ।शिखर सम्मेलन ने वित्तीय संकट से निपटने में जी20 द्वारा निभाई गई केंद्रीय भूमिका पर जोर दिया।इसमें अंतरराष्ट्रीय वित्तीय संस्थानों में उभरती और विकासशील अर्थव्यवस्थाओं को अधिक महत्त्व दिए जाने पर जोर दिया गया।नेताओं ने ऊर्जा संसाधनों और आपूर्ति के विविधीकरण,ऊर्जा पारगमन मार्गों की सुरक्षा और नए ऊर्जा निवेश और बुनियादी ढांचे के निर्माण का समर्थन किया।
दूसरा ब्रिक शिखर सम्मेलन, 15 अप्रैल 2010, ब्रासीलिया, ब्राजील
इसने वित्तीय संकट से निपटने में जी20 की केंद्रीय भूमिका पर जोर दिया।शामिल हुए नेताओं ने कहा कि जी20 पिछले समझौतों की तुलना में अधिक समावेशी है।नेताओं ने कहा कि आईएमएफ और विश्व बैंक को तत्काल अपनी वैधता की कमी को दूर करने की आवश्यकता है।राष्ट्र प्रमुखों ने अपने वित्त मंत्रियों और केंद्रीय बैंकों के गवर्नरों से ब्रिक्स सदस्य देशों के बीच स्थानीय मुद्रा में व्यापार निपटान व्यवस्था सहित क्षेत्रीय मौद्रिक व्यवस्थाओं की संभावनाएं खंगालने के लिए कहा।
तीसरा ब्रिक्स शिखर सम्मेलन,सान्या,हेनान,चीन,अप्रैल 2011
नेताओं ने दक्षिण अफ्रीका के ब्रिक्स में शामिल होने का स्वागत किया।उन्होंने वस्तुओं के डेरिवेटिव बाजार के नियमन को मजबूत करने का आग्रह किया।
चौथा ब्रिक्स शिखर सम्मेलन नई दिल्ली,मार्च 2012
शिखर सम्मेलन में नए ब्रिक्स विकास बैंक की स्थापना पर चर्चा हुई।इसने ब्रिक्स इंटरबैंक सहयोग तंत्र के तहत स्थानीय मुद्रा में ऋण सुविधा का विस्तार करने के समझौते का स्वागत किया।
पांचवां ब्रिक्स शिखर सम्मेलन,डरबन, दक्षिण अफ्रीका,मार्च 2013
नेताओं ने अफ्रीका के विकास के लिए नई साझेदारी (नेपैड) की घोषणा की। उन्होंने न्यू डेवलपमेंट बैंक (एनडीबी) की स्थापना पर सहमति जताई। उन्होंने ब्रिक्स देशों के बीच आकस्मिक आरक्षित व्यवस्था (सीआरए) बनाए जाने पर भी सहमति व्यक्त की, जिसका प्रारंभिक आकार 100 अरब डॉलर तय किया गया।
छठा ब्रिक्स शिखर सम्मेलन,फोर्टालेजा,ब्राजील,जुलाई 2014
फोर्टालेजा घोषणा में एनडीबी की स्थापना के समझौते पर हस्ताक्षर की घोषणा की गई। शिखर सम्मेलन में ब्रिक्स निर्यात ऋण और गारंटी एजेंसियों पर हस्ताक्षर की भी घोषणा की गई।इसने अपनी संबंधित सरकारी स्वामित्व वाली कंपनियों (एसओसी) को सहयोग के तरीकों का पता लगाने के लिए प्रोत्साहित किया।
आठवां ब्रिक्स शिखर सम्मेलन,गोवा,भारत,अक्टूबर 2016
इसने एक स्वतंत्र ब्रिक्स क्रेडिट रेटिंग एजेंसी स्थापित करने की संभावना तलाशने पर सहमति व्यक्त की।
दसवां ब्रिक्स शिखर सम्मेलन,जोहानेसबर्ग,दक्षिण अफ्रीका, जुलाई 2018
इसने औपचारिक रूप से ब्रिक्स ऊर्जा अनुसंधान सहयोग प्लेटफॉर्म की स्थापना की।
12वां ब्रिक्स शिखर सम्मेलन, रूस की मेजबानी में वर्चुअल तरीके से आयोजित, नवंबर 2020
महामारी के मद्देनजर इसमें सदस्य देशों को 10 अरब डॉलर तक के आपातकालीन ऋण प्रदान करने के लिए एनडीबी के आपातकालीन सहायता कार्यक्रम की सराहना की गई।
14वां ब्रिक्स शिखर सम्मेलन,चीन की मेजबानी में वर्चुअल तरीके से आयोजित, जून 2022
भागीदार देशों ने औपचारिक रूप से ब्रिक्स वैक्सीन अनुसंधान एवं विकास केंद्र शुरू किया।
15वां ब्रिक्स शिखर सम्मेलन, जोहान्सबर्ग, दक्षिण अफ्रीका, अगस्त 2023
इसमें 1 जनवरी, 2024 से अर्जेंटीना, मिस्र, इथियोपिया, ईरान, सऊदी अरब और यूएई को ब्रिक्स का पूर्ण सदस्य बनने के लिए आमंत्रित करने का निर्णय लिया गया।
16वां ब्रिक्स शिखर सम्मेलन, कजान, रूस, अक्टूबर 2024
इसने ब्रिक्स इंटरबैंक सहयोग तंत्र (आईसीएम) का स्थानीय मुद्राओं में स्वीकार्य वित्तपोषण तंत्र खोजने के लिए स्वागत किया। इसने ब्रिक्स क्लियर(एक स्वतंत्र क्रॉस-बॉर्डर निपटान और डिपॉजिटरी इन्फ्रास्ट्रक्चर) और ब्रिक्स स्वतंत्र पुनर्बीमा क्षमता स्थापित करने के लिए अध्ययन पर सहमति व्यक्त की।
17वां ब्रिक्स शिखर सम्मेलन, रियो डी जेनेरियो, ब्राजील, जुलाई 2025
शिखर सम्मेलन ने इंडोनेशिया का ब्रिक्स सदस्य के रूप में स्वागत किया।इसने ब्रिक्स के 10 भागीदार देशों – बेलारूस, बोलीविया,कजाकिस्तान,क्यूबा,नाइजीरिया,मलेशिया, थाईलैंड,वियतनाम,युगांडा और उज्बेकिस्तान का भी स्वागत किया।शिखर सम्मेलन ने एआई के वैश्विक संचालन पर ब्रिक्स स्टेटमेंट जारी किया, जिसमें मानव-केंद्रित, समावेशी एआई नियमों की वकालत की गई।
अमेरिका द्वारा लगाए गए जवाबी शुल्क (जिसमें भारत पर लगाए गए शुल्क भी शामिल हैं) के संदर्भ में, नेताओं ने एकतरफा टैरिफ और गैर-टैरिफ कदमों में वृद्धि को लेकर गंभीर चिंता व्यक्त की और डब्ल्यूटीओ के महत्त्व पर जोर दिया। इसने ब्रिक्स न्यू इन्वेस्टमेंट प्लेटफॉर्म (एनआईपी) पर चर्चा की और बुनियादी ढांचे तथा सतत विकास के लिए निजी निवेश जुटाने के लिए ब्रिक्स मल्टीलेटरल गारंटी (बीएमजी) पहल शुरू किए जाने पर चर्चा की।
इसने ब्रिक्स इंटरबैंक सहयोग तंत्र (आईसीएम) का भी स्वागत किया, ताकि स्थानीय मुद्राओं में वित्त पोषण की स्वीकार्य व्यवस्था पर विचार किया जा सके। इस सम्मेलन में वित्त मंत्रियों और केंद्रीय बैंक के गवर्नरों से ब्रिक्स क्रॉस-बॉर्डर पेमेंट्स इनिशिएटिव पर चर्चा जारी रखने पर जोर दिया गया।